पीयूष जैनः मोदी, योगी, शाह सच बोल रहे हैं या अखिलेश?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कब होंगे, होंगे भी या टल जाएँगे, इन सारे सवालों को लेकर अभी अनिश्चितता बनी है. मगर एक बात जिसे लेकर कोई भी संदेह नहीं है, वो ये है कि पार्टियों के बीच चुनावी संग्राम छिड़ चुका है.
इसी चुनावी संग्राम में पिछले कुछ दिनों से एक मुद्दा बड़े ज़ोर-शोर से उठ रहा है. और वो है एक इत्र कारोबारी के यहाँ पड़े चर्चित छापों का मुद्दा.
कानपुर स्थित व्यवसायी पीयूष जैन के ठिकानों पर पड़े छापों में ढाई सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा के नोट और सोना, चांदी मिले हैं. टैक्स चोरी के आरोप में पीयूष जैन को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
मगर पीयूष जैन के पास से जो रकम बरामद हुई है, उसके तार क्या राजनीति से जुड़े हैं? और जुड़े हैं तो किस राजनीतिक दल से? इस सवाल का स्पष्ट जवाब मिलना फ़िलहाल तो मुश्किल लगता है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष - दोनों विरोधाभासी दावे कर रहे हैं.
आइए पहले देखते हैं कि इस बारे में क्या कह रहे हैं भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभाओं में खुलकर विपक्ष पर हमला बोला है.
28 दिसंबर को कानपुर में एक जनसभा में पीएम मोदी ने कहा - "ये लोग ज़रुर कहते हैं, ये तो हमने किया था, ये तो हमने तो किया था, मैं सोच रहा था कि बीते दिनों जो बक्से भर-भर के नोट मिली है, उसके बाद भी ये लोग कहेंगे कि ये भी हमने ही किया है.
"2017 से पहले भ्रष्टाचार का जो इत्र उन्होंने पूरे यूपी में छिड़क रखा था, वो फिर सबके सामने आ गया है, लेकिन अब वो मुँह पर ताला लगाके बैठे हैं., क्रेडिट लेने आगे नहीं आ रहे हैं. नोटों का जो पहाड़ पूरे देश ने देखा, वही उनकी उपलब्धि है, वही उनकी सच्चाई है."
https://twitter.com/BJP4UP/status/1475782236221763585
वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने 28 दिसंबर को हरदोई में एक जनसभा में खुलकर अखिलेश यादव का नाम लिया.
अमित शाह ने कहा, "कुछ दिन पहले इनकम टैक्स विभाग ने रेड लगाई, भाई अखिलेश को पेट के अंदर बहुत मचलन हुई, ये राजनीतिक द्वेष के कारण रेड लगी है, और आज उनको जवाब देते नहीं बनता है कि समाजवादी इत्र बनाने वाले के वहाँ से ढाई सौ करोड़ रुपया कैश मिला है.
"ये ढाई सौ करोड़ किसका है, ये यूपी की जनता का लूटा हुआ ढाई सौ करोड़ इत्र वाले के घर से मिला है."
https://twitter.com/BJP4UP/status/1475807971762315266
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सभाओं में खुलकर कह रहे हैं कि छापे के बाद पकड़े गए इत्र व्यापारी का संबंध समाजवादी पार्टी से है.
योगी आदित्यनाथ ने 26 दिसंबर को प्रयागराज में एक जनसभा में कहा था- "आपने देखा होगा, पिछले दो-तीन दिनों से लगातार समाजवादी पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति ने जो कभी समाजवादी इत्र की बात करता था, तब हमारे हमारे प्रदेश अध्यक्ष जी ने कहा था "यह 'समाजवादी इत्र' नहीं, 'समाजवादी बदबू' है, जो प्रदेश में फैलाई जा रही है"."
योगी ने कहा,"जो पैसा इन्होंने लूटकर रखा था, वो दीवारों से कैसे निकल रहा है, इसका प्रमाण आप देख रहे होंगे. कल 257 करोड़ रुपये, और कई किलो सोना और चांदी निकला, आज भी कई करोड़ रुपये और सोना और चांदी निकला, ये ग़रीब का पैसा है."
https://twitter.com/myogiadityanath/status/1475132093063516164
28 दिसंबर को कानपुर में पीएम मोदी के साथ मंच साझा कर रहे मुख्यमंत्री योगी ने फिर एक बार आरोप दोहराया और कहा - "आपने देखा होगा, पिछले कुछ दिनों से दीवारें खोद कर निकलने वाली नोटों की गड्डियाँ इस बात को प्रमाणित कर रही हैं कि पहले विकास का पैसा किन लोगों के पास पहुँच जाता था."
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समाजवादी पार्टी का दावा - झूठ बोल रहे योगी
उधर, अखिलेश यादव और उनकी पार्टी लगातार पकड़े गए इत्र व्यापारी से अपना कोई संबंध होने से इनकार कर रहे हैं.
अखिलेश यादव ने मंगलवार को सीधे-सीधे योगी आदित्यनाथ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.
अखिलेश यादव ने कहा,"इस व्यक्ति का समाजवादी इत्र बनाने वाले से जो रिश्ता जोड़ा जा रहा है वो सरासर झूठ है. इससे बड़ा झूठ कोई मुख्यमंत्री बोल नहीं सकते जो बोल रहे हैं. आख़िर ज़िम्मेदारी किसकी थी. ये जो पैसा निकला है, ये क्या हवाई जहाज़ से आया होगा - तो वो भारत सरकार है. क्या ट्रेन से आया होगा - तो इनकी सरकार है. सड़क से आया होगा - तो इनकी सरकार है. पानी के जहाज़ से आया होगा - तो इनकी सरकार है. आख़िरकार ज़िम्मेदार कौन है?"
https://twitter.com/news24tvchannel/status/1475769002177675265
सपा के डिजिटल मीडिया कोऑर्डिनेटर मनीष जगन अग्रवाल लगातार इस मामले पर अपनी बातें रख रहे हैं. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनके ट्वीट को शेयर कर रहे हैं.
बुधवार को भी उन्होंने कुछ अख़बारों की रिपोर्टों को शेयर करते हुए आरोप लगाया कि ये मामला कुछ और है.
मनीष जगन अग्रवाल ने लिखा," भाजपा ने चंदा मांगा था और व्यापारी ने नहीं दिया तो छापा डलवा दिया, अब बरामद नकदी को टर्नओवर मान लिया गया, अब काली रकम को सफे़द करने का रास्ता दे दिया गया, अब भाजपा ने व्यापारी के साथ सेटिंग कर ली, ये व्यापारी भाजपाई है ,सपा शुरू से कहती आ रही, मामला ज्यादा चंदा वसूली का था!"
https://twitter.com/manishjagan/status/1476086285953486848
मनीष अग्रवाल ने इससे पहले पिछले सप्ताह 24 दिसंबर को भी ट्वीट कर स्पष्ट किया था कि पीयूष जैन से उनकी पार्टी का कोई संबंध नहीं है.
अग्रवाल ने लिखा था- "कानपुर में शिखर पान मसाला ग्रुप और इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर पड़े छापों और बरामद नकदी नोटबंदी की विफलता की कहानी बयां कर रही है , भाजपा व मीडिया पीयूष जैन और शिखर पान मसाले को सपा से जबरन जोड़कर सपा को बदनाम कर रही, सपा एमएलसी पम्पी जैन से पीयूष जैन का कोई मतलब नहीं है.
"छापे की जद में आये ये दोनों कारोबारी भाजपा से जुड़े हुए हैं व भाजपा को चंदा देते थे ,भाजपा ने इस बार इनसे ज़्यादा चुनावी चंदा मांगा ,इन्होंने ज़्यादा चुनावी चंदा देने से मना कर दिया तो भाजपा सरकार ने इन पर रेड डालकर पैसा पकड़कर सपा से जोड़कर सपा को बदनाम करने की साजिश रची."
https://twitter.com/manishjagan/status/1474272929349193729
सपा का दावा है कि कुछ दिनों पहले उनकी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों के यहाँ छापे पड़े थे मगर वहाँ से कुछ बरामद नहीं हुआ जिसके बाद 'बौखलाई भाजपा ने तुरंत यहां छापेमारी करके कैश बरामद करके इसे सपा से जोड़कर जनता को अपने दुष्प्रचार से भ्रमित करने की साजिश की है!'
समाजवादी पार्टी ने 26 दिसंबर को एक टीवी चैनल की रिपोर्ट को शेयर करते हुए लिखा - "भाजपा झूठ की दुकान है और इस झूठ की दुकान पर जुमले, दुष्प्रचार और फेक न्यूज़ के सिवा और कुछ नहीं मिलता. भाजपा के षड्यंत्र का पर्दाफाश करता यह वीडियो."
https://twitter.com/samajwadiparty/status/1475029555136315397
पीयूष जैन और पम्पी जैन
समाजावादी पार्टी का कहना है कि उनके समाजवादी इत्र से जुड़े व्यक्ति का नाम पुष्पराज जैन उर्फ़ पम्पी जैन है. वो पार्टी के एमएलसी हैं और उनका ताल्लुक़ कन्नौज से हैं.
पार्टी नेताओं का कहना है कि पम्पी जैन का छापे से कोई लेना-देना नहीं है.
पार्टी नेता पीयूष जैन के फ़ोन कॉल रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक किए जाने की माँग कर रहे हैं, ताकि उनके मुताबिक बीजेपी से उनके संबंधों को उजागर किया जा सके.
लेकिन समाजवादी पार्टी की इस सफ़ाई के बाद भी बीजेपी नेता लगातार जनसभाओं में समाजवादी इत्र और छापों के सपा से संबंध के आरोप लगा रहे हैं.
कौन हैं पीयूष जैन
पीयूष जैन मूल रूप से कन्नौज के रहने वाले हैं. उनके पास कन्नौज में एक घर, परफ़्यूम फ़ैक्ट्री, कोल्ड स्टोरेज और पेट्रोल पंप है.
इसके अलावा मुंबई में भी उनका एक घर है और एक शोरूम भी है. उनकी कंपनियां मुंबई में रजिस्टर भी हैं.
अधिकारियों के मुताबिक़, पीयूष जैन क़रीब 40 कंपनियों के मालिक हैं. जिनमें से दो मिडिल ईस्ट में भी हैं. हालांकि वह मुख्य रूप से इत्र व्यापारी के तौर पर ही जाने जाते हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=WOB1dBUBoqI
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