बीते तीन महीने में महाराष्‍ट्र के हाथ से निकले 1.8 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्‍ट

बीते तीन महीने में महाराष्‍ट्र के हाथ से निकले 1.8 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्‍ट

Maharashtra lost Projects: महाराष्‍ट्र की सरकार को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे है। पिछले तीन महीने में महाराष्‍ट्र ने 1.8 लाख करोड़ रुपये की 4 बड़े प्रोजेक्‍ट हाथ से निकल गए। जिसके कारण राज्‍य को भारी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही बड़े महत्‍वपूर्व प्रोजेक्‍ट महाराष्‍ट्र के हाथ से जाने के बाद यहां जो उन प्रोजेक्‍ट के कारण लाखों की संख्‍या में रोजगार के अवसर लोगों की मिलने की उम्‍मीद थी उस पर भी पानी फिर गया।

airbus

टाटा-एयरबस प्रोजेक्‍ट

इसमें 22,000 करोड़ रुपये वाली टाटा-एयरबस प्रोजेक्‍ट भी शुमार है। टाटा-एयरबस महाराष्‍ट्र के हाथ से जा चुका है और अब ये गुजरात के वड़ोदरा को मिल चुका है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत सी-295 ट्रांसपोर्ट एकयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे। उद्योग मंत्री उदय सामंत और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी करोड़ों के इस टाटा-एयरबस सी-295 ट्रांसपोर्ट एकयरक्राफ्ट संयंत्र को नागपुर के मिहान में लाने की उम्‍मीद जताई थी लेकिन अब ये प्रोजेक्‍ट गुजरात को मिल चुका है। ये चौथा बड़ा प्रोजेक्‍ट है जो महाराष्‍ट्र के हाथ में आते-आते रह गया। इस प्रोजेक्‍टस से राज्य में लगभग 6,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों मिलने की उम्‍मीद थी।

वेदांत-फॉक्सकॉन प्रोजेक्‍ट

इसके पहले 1.54 लाख करोड़ रुपये की वेदांत-फॉक्सकॉन प्रोजेक्‍ट भी महाराष्‍ट्र ने गवां दिया है। पहले कंपनी को महाराष्ट्र के तालेगांव इंडस्ट्रियल क्षेत्र में एक सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित करनी थी, जिसके लिए स्थान भी निर्धारित हो चुका था लेकिन अब ये प्रोजेक्‍ट गुजरात के धोलेरा को मिल चुका है। इस प्रोजेक्‍ट से और इस पर निर्भर अन्‍य उद्योगों में लगभग एक लाख रोजगार होने की संभावना है।

बल्क ड्रग पार्क प्रोजेक्‍ट

3,000 करोड़ रुपये बल्क ड्रग पार्क प्रोजेक्‍ट का भी महाराष्‍ट्र राज्य बड़ा दावेदार माना जा रहा था। इस प्रोजेक्‍ट से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां लोगों को मिल सकती थी। महाराष्ट्र इस प्रोजेक्‍ट के लिए रायगढ़ जिले के रोहा और मुरुद तहसीलों में आने पर जोर दे रहा था और इसके लिए 5,000 एकड़ भूमि भी तय की थी लेकिन ये अन्‍य राज्‍यों को मिल गया।

केंद्र सरकार ने ठुकरा दिया महाराष्‍ट्र का ये प्रस्‍ताव

1 सितंबर को केंद्र ने थोक दवा पार्कों को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश के प्रस्तावों को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। सितंबर में केंद्र सरकार ने औरंगाबाद के औरिक शहर में 424 करोड़ रुपये के मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित करने के महाराष्ट्र के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।

जानें प्रोजेक्‍ट महाराष्‍ट्र को ना मिलने पर क्‍या बोले मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे

गौरतलब है कि महाराष्‍ट्र में पिछली महा विकास अघाड़ी सरकार ने अक्टूबर 2020 में विशेष प्रोत्साहन के साथ प्रोजेक्‍ट को मंजूरी दी थी। सरकार ने तब अनुमान लगाया था कि अगर यह परियोजना महाराष्ट्र में आई तो 3,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे तब देवेंद्र फडणवीस जो वर्तमान सरकार में डिप्‍टी सीएम हैं उन्‍होंने तब चुनौती दी थी कि उन्हें एक भी दस्तावेज दिखाया जाए जिसमें कहा गया था कि प्रोजेक्‍ट महाराष्ट्र में आने वाले थे। वहीं अब इतने बड़ प्रोजेक्‍ट खोने के बाद महाराष्‍ट्र के वर्तमान मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रोजेक्‍ट को दूसरे राज्‍यों में चले जाने के लिए पूर्व अघाडी सरकार को जिम्‍मेदार बताया और एमवीए सरकार की ओर से कथित विफलता और पहल की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।

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