टूटा हैरी का सपना! लिंग बदलवाकर ली पायलट बनने की ट्रेनिंग, लेकिन DGCA ने नहीं दिया लाइसेंस
नई दिल्ली: भारत सरकार और कई राज्यों ने पिछले कुछ सालों में ट्रांसजेंडर्स के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ट्रांसजेंडर एडम हैरी की दुखभरी कहानी वायरल हो रही है। वो बचपन से पायलट बनना चाहते थे, उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत भी की, लेकिन सिर्फ जेंडर की वजह से उनका सारा सपना टूट गया।

केरल सरकार ने दी स्कॉलरशिप
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक हैरी ने प्राइवेट पायलट लाइसेंस के लिए परीक्षा दी थी। इसके बाद उन्हें 2017 में जोहानसबर्ग में प्राइवेट पायलट का लाइसेंस भी मिला। उन्होंने अपनी बात केरल सरकार तक पहुंचाई, जिस वजह से उनको राज्य की ओर से 22 लाख रुपये की स्कॉलरशिप भी मिल गई। इसके बाद हैरी को लगा कि वो अपने सपने के बहुत पास पहुंच गए हैं, लेकिन आगे का रास्ता और ज्यादा कठिन था।

साइकोमेट्रिक टेस्ट में अनफिट
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जन्म के वक्त हैरी लड़की थे, लेकिन बाद में वो पुरूष बन गए। जोहानसबर्ग के बाद उन्होंने एशियन एकेडमी ज्वाइन किया और क्लास 2 के लिए मेडिकल एग्जाम दिया। जब उन्होंने फॉर्म भरा था, तो उन्होंने जेंडर में महिला का ऑप्शन चुना, जबकि एग्जाम के वक्त उन्होंने खुद को ट्रांसजेंडर बताया। DGCA ने अभी तक ट्रांसजेंडर का ऑप्शन मेडिकल एग्जाम में नहीं दे रखा है। ऐसे में वो फेल हो गए। इसके बाद साइकोमेट्रिक टेस्ट में उन्हें अनफिट घोषित कर दिया गया।

DGCA ने कही ये बात
अब हैरी का सपना टूट गया है, जिस वजह से वो पायलट की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी एक फूड कंपनी में बतौर डिलीवरी ब्वॉय काम कर रहे हैं। मामले में DGCA के एक अधिकारी ने कहा कि उम्मीदवार को जेंडर डिस्फोरिया था यानी जन्म के वक्त उनका जेंडर दूसरा था, जबकि अब वो कुछ और हैं। इसके अलावा उनकी हार्मोन थेरेपी की वजह से उड़ान की इजाजत नहीं दी जा सकती है। फिलहाल हैरी ने हार नहीं मानी है। उन्होंने कहा कि मैंने बचपन से बहुत कुछ सहा है, ऐसे में वो आगे भी लड़ने को तैयार हैं।












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