यूपी छठा दौर: BJP के खाते में आ सकती है सिर्फ 1 सीट, 13 पर माया-अखिलेश के पक्ष में आंकड़े

नई दिल्ली- 12 मई को होने वाले छठे दौर के चुनाव में यूपी में वोटों का अंकगणित पूरी तरह से मोदी और बीजेपी के खिलाफ है। अगर 2014 के लोकसभा चुनाव और 2018 के उपचुनावों के नतीजों को देखें तो जिन 14 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें बदले हुए चुनावी समीकरण में सिर्फ एक सीट पर ही बीजेपी अपना खाता खोल सकती है। आइए देखते हैं कि वो कौन-कौन सीटें हैं, जहां पर बीजेपी को महागठबंधन की वजह से नुकसान हो सकता है और वो कौन सी सीट है, जहां उसके जीतने के इसबार भी पूरे आसार हैं।

क्यों फंस रही है बीजेपी?

क्यों फंस रही है बीजेपी?

2014 के वोट शेयर के आधार पर इस बार जिन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार के सिर पर हार का खतरा मंडरा रहा है, पहले उनमें से कुछ सीटों के आंकड़ों पर बात कर लेते हैं। उदाहरण के लिए बस्ती, भदोही और लालगंज सीट को ही ले लेते हैं, जहां महागठबंधन बनने से वोटों का अंकगणित इसबार बीजेपी (BJP) के खिलाफ नजर आ रहा है। मसलन, 2014 में बस्ती (Basti) सीट पर बीजेपी के विजयी उम्मीदवार हरीश द्विवेदी को 3,57,680 वोट मिले थे। जबकि, सपा (SP) उम्मीदवार ब्रिज किशोर सिंह को 3,24,118 और बसपा (BSP) के राम प्रसाद चौधरी को 2,83,747 वोट मिले थे। ऐसे में अगर एसपी एवं बीएसपी को मिले वोट को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 6,07,865 हो जाता है, जो बीजेपी प्रत्याशी को मिले वोट से लगभग दो गुना ज्यादा है। वहीं, भदोही (Bhadohi) में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह को 4,03,695 वोट मिले थे। जबकि, एसपी के सीमा मिश्रा को 2,38,712 और बीएसपी के राकेश धर त्रिपाठी को 2,45,554 वोट मिले थे। इन दोनों पार्टियों के वोट का जोड़ 5,04,266 बैठता है। ऐसे ही लालगंज (Lalganj) में बीजेपी की नीलम सोनकर को 3,24,016 वोट मिले थे, जबकि बसपा के डॉक्टर बलिराम को 2,33,971 और सपा के बेचाई सरोज को 2,60,930 वोट प्राप्त हुए थे। अगर वहां सपा-बसपा के वोट को मिला दें तो उनका वोट 4,94,901 हो जाता है।

इन सभी सीटों पर भी बीजेपी को संकट

इन सभी सीटों पर भी बीजेपी को संकट

ऐसे में बीजेपी को बस्ती, भदोही एवं लालगंज के अलावा जिन और सीटों पर जीत का संकट है, वे हैं श्रावस्ती (Shrawasti), डुमरियागंज (Dumariyaganj), सुल्तानपुर (Sultanpur), जौनपुर (Jaunpur), मछलीशहर (Machhlishahr), संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar),इलाहाबाद (Allahabad) और अंबेडकर नगर (Ambedkar Nagar) की भी है। जबकि, आजमगढ़ (Azamgarh) की सीट पिछले बार भी समाजवादी पार्टी के ही खाते में थी और इसबार महागठबंधन के चलते अखिलेश यादव की दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत नजर आती है।

ये सीट बचाकर रख सकती है बीजेपी

ये सीट बचाकर रख सकती है बीजेपी

छठे दौर के 14 सीटों में से प्रतापगढ़ (Pratapgarh) की सीट ऐसी है, जिसपर इस बार बीजेपी अपना कब्जा जमा सकती है। पिछले चुनाव में भाजपा की सहयोगी अपना दल (Apna Dal) के प्रत्याशी कुंवर हरिवंश सिंह को 3,75,789 वोट मिले थे, जबकि बसपा के आसिफ निजामुद्दीन को 2,07,567 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमोद कुमार सिंह पटेल 1,20,107 वोट मिल पाए थे। अगर इस बार बसपा एवं सपा का वोट जोड़ भी दें तो उनका आंकड़ा महज 3,27,674 वोटों का ही रह जाता है और इस तरह से यहां पर बीजेपी को एडवांटेज मिलता दिख रहा है।

फूलपुर उपचुनाव हार चुकी है बीजेपी

फूलपुर उपचुनाव हार चुकी है बीजेपी

2014 में बीजेपी इलाहाबाद से सटी फूलपुर (Phulpur) सीट भी पहली बार जीती थी। तब राज्य के मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य वहां पर करीब डेढ़ लाख वोटों से विजयी रहे थे। लेकिन, उनके इस्तीफे के बाद 2018 में वहां उपचुनाव हुआ, जिसमें महागठबंधन का पहला प्रयोग पूरी तरह सफल रहा। यहां गठबंधन के साझा उम्मीदवार के तौर पर समाजवादी पार्टी के नागेंद्र पटेल को 3.42 लाख वोट मिले थे और उन्होंने बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को हरा दिया था, जिन्हें सिर्फ 2.83 लाख वोट ही मिल सके। अलबत्ता बीजेपी का दावा है कि उपचुनाव में पोलिंग कम हुई थी, इसलिए उसका गणित बिगड़ गया, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वैसा नहीं होने वाला।

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