महिलाओं के प्रति तंगदिल हैं हिमाचल के राजनैतिक दल

शिमला। भाजपा हो या कांग्रेस बड़े जोर शोर से महिला उत्थान की बात करती हैं। महिलाओं को बराबरी पर लाने की बातें भी दोनों ही दल करते नहीं थकते। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। हिमाचल प्रदेश के चुनावी मैदान पर नजर दौड़ाई जाये,तो दोनों ही दल महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारने में तंगदिल ही रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो प्रदेश भाजपा से दस महिलाओं के नाम चुनाव के लिये मांगे,तो इतने नाम प्रदेश के नेता दे ही नहीं पाये। हालांकि बाद में छह महिला प्रत्याशियों को भाजपा ने टिकट दिए। लेकिन कांग्रेस पार्टी तो इस मामले में भाजपा से खासी पीछे है। कांग्रेस पार्टी ने डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से आशा कुमारी, देहरा से विप्लव ठाकुर और मंडी के चंपा ठाकुर मात्र तीन महिलाओं को मैदान में उतारा है।

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हिमाचल में मुकाबला अक्सर भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों में ही देखने को मिलता है। जहां महिलाओं को उनके हक देने की बात की जाती है साथ ही उन्हें अर्धआंगिनी का दर्जा भी उनके घरों में मिला होता है, जिसका अर्थ आधे आंगन की हकदार होता है। उन्हें आधा हिस्सा तो क्या दहाई के आंकड़े तक भी दोनों राजनीतिक दलों ने टिकटें देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। हालांकि महिलाओं को विधानसभा चुनाव में 33 फीसदी आरक्षण देने वाला बिल 2008 के दौरान राज्यसभा में पास हो गया था, पर लोकसभा में इस बिल के पास होने पर ब्रेक लग गई। हिमाचल की बात की जाए तो भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों ने मात्र 9 ही महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारना सही समझा।

इस चुनावी दंगल में 16 महिला उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रही हैं। दोनों पार्टियों से नौ ही महिला उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। इसमें कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीन महिला उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया जबकि भाजपा की छह महिलाओं ने पर्चा भरा है। यह संख्या वर्ष 2012 में दोनों पार्टियों की 11 थी। उस वक्त बीजेपी ने नौ और कांग्रेस ने चार महिला उम्मीदवार मैदान में उतारी थीं इसमें से कांग्रेस की चार महिला उम्मीदवारों में से तीन ने चुनाव जीता। हिमाचल प्रदेश के बहुत सारे विस क्षेत्रों में महिलाएं मुख्य भूमिका अदा करेंगी। पिछले मतदान के रुझानों पर नजर डाले तो पुरुषों के मुकाबले महिलाएंं हमेशा अधिक मतदान करती हैं। सभी पार्टियों के इस बार 338 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 136 दोनों पक्षों के प्रत्याशी हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में 459 कैंडिडेट मैदान में उतरे इनमें 34 महिलाएं शामिल थीं।

इस साल कांग्रेस पार्टी की ओर से डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से आशा कुमारी, देहरा से विप्लव ठाकुर और मंडी के चंपा ठाकुर को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने इंदौरा से रीता धीमान, भोरंज से कमलेश कुमारी, कसुमप्टी से विजय ज्योति सेन, रोहड़ू से शाही बाला, शाहपुर से सरवीन चौधरी और पालमपुर से इंदु गोस्वामी को उतारा है।

इस साल राज्य में 50.26 लाख मतदाता हैं, 25.31 लाख पुरुष हैं, 24.57 लाख महिलाएं हैं, 37, 574 सरकारी सर्विस करने वाले मतदाता हैं प्रदेश में 14 मतदाता ही थर्ड जैंडर के हैें। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में जहां पुरुष मतदाताओं से अधिक संख्या में महिलाएं हैं उनमें भट्टियात, देहरा, जयसिंहपुर, सुल्ला, लाहौल-स्पीति, नचान, जोधपुर, धर्मपुर, मंडी, बल्ह, सरकाघाट, भोरंज, सुजानपुर, हमीरपुर, बड़सर, नादौन, घुमारवीं और जुब्बल कोटखाई शामिल हैं। सुजानपुर, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर और नादौन जैसी महत्व रखने वाली सीटों में महिलाओं का निर्णायक भूमिका होगी। भाजपा के सीएम कैंडिडेट प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर से लड़ रहे हैं, भाजपा नेता महेंद्र सिंह ठाकुर धर्मपुर से चुनावी मैदान में हैंं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू नादौन से पार्टी के उम्मीदवार हैं।

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