कांग्रेस के दिमाग में एक तरह की मंडी.. कंगना रनौत ने सुप्रिया श्रीनेत को दिया करारा जबाव,बताया मंडी का इतिहास
हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से कंगना रनौत काफी चर्चा में है। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के ट्विट को लेकर मंडी लोकसभा सीट को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है।

कांग्रेस के टिप्पणी से हिमाचल के लोग नाराज
कांग्रेस प्रवक्ता के आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर टाइम्स नाव नवभारत के सवाल पब्लिक कार्यक्रम में कंगना रनौत ने इसको लेकर खुलकर बातचीत की। कंगना ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता की इस टिप्पणी से मुझे बहुत दुख हुआ। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोग बहुत भोले हैं। वे इस टिप्पणी से खासे नाराज हैं।
मांडव ऋषि के नाम पर पड़ा मंडी का नाम
उन्होने आगे बताया कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। साथ ही मंडी जो जगह का नाम पड़ा वह मांडव ऋषि के नाम पर पड़ा। साथ ही मनु स्मृति के नाम पर मनाली और वेद व्यास के नाम पर ब्यास नदी का नाम है। उन्होंने बताया कि मंडी में पराशर मुनि के नाम पर पराशर लेख है। वहां आज भी एक कुटिया है।
कांग्रेस के दिमाग में एक तरह की मंडी
देवभूमि मार्केडेंय ऋषि ने इस भूमि पर कई सालों तक तपस्या की है। उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और कहा कि कांग्रेस के दिमाग में एक तरह की मंडी चलती है। जबकि हिमाचल की मंडी ऋषि मांडव की मंडी है।
मांडव नगर के नाम से जानते
बता दें कि मंडी को हिमाचल की काशी के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोग इसे छोटी काशी के नाम से भी बुलाते हैं। हिमाचल प्रदेश के इस शहर का इतिहास करीब 13 सौ साल पुराना है। इस शहर को इतिहास में मांडव नगर के नाम से जाना जाता है। तिब्बती लोग इसे जहोर कह कर बुलाते थे।
संत मांडव ने तप किया
इस शहर को हिमाचल प्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी बताया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि शहर से बहने वाली ब्यास नदी के किनारे कोल्सरा नाम के एक खास पत्थर पर बैठ कर महान संत मांडव ने तप किया था। उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम मांडव नगर पड़ा था। बाद में इसका नाम बोलचाल में मंडी हो गया।












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