हिमालय के साये में भारतीय रेलवे पहुंचा रहा विकास: बंदे भारत से सुगम हुआ हिमाचल का जन जीवन, मिला पर्यटन को बढाव
हिमाचल प्रदेश को मिली वंदे भारत ट्रेन की सौगात और अंब अंदौरा सहित प्रदेश के तीन रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करना इसके नवीन उदाहरण है।
ऊंची-ऊंची खूबसूरत पहाड़ियों से घिरे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। यहाँ शैलानी गर्मियों की छुट्टियां मनाने और साल के अंत में बर्फबारी देखने देश के अलग-अलग कोने से खिंचे चले आते हैं। बीते कुछ सालों में हिमाचल प्रदेश में काफी कुछ बदला है। जैसे-जैसे यातायात के साधन और संपर्क बेहतर हो रहे हैं, वैसे-वैसे हिमाचल का पर्यटन उद्योग भी नए क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बना रहा है। राष्ट्रीय उच्चमार्ग के अतिरिक्त केंद्र की सरकार रेल यातायात को भी बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश औऱ रेलवे का नाम जब एक साथ आता है तो दिमाग में सबसे पहले नाम शिमला-कालका रेलमार्ग का आता है।
कालका शिमला रेलमार्ग दरअसल 120 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 1903 में हुई थी। 103 टनल, 869 पुल, 919 मोड़ वाले इस रेलमार्ग को 2008 में यूनेस्को से वैश्विक धरोहर का दर्जा मिला था। 96 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग में छोटे-बड़े कुल 18 स्टेशन हैं।

जिस प्रदेश में वैश्विक धरोहर है वहाँ रेलवे नेटवर्क के विस्तार का जो बीड़ा केंद्र सरकार ने उठाया है, उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश को मिली वंदे भारत ट्रेन की सौगात और अंब अंदौरा सहित प्रदेश के तीन रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करना इसके नवीन उदाहरण है। वंदे भारत ट्रेन ने रेल यात्रियों का यात्रा अनुभव एकदम से बदल दिया है। इस ट्रेन के शुरू होने से ना सिर्फ प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी बेहतर हुई है बल्कि दिल्ली से ऊना के बीच की दूरी तय करने में अब बहुत कम समय लगता है।
180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाली नई वंदे भारत ट्रेन दिल्ली से हिमाचल के अंब अंदौरा तक की दूरी केवल साढ़े 5 घंटे में पूरा करती है। ये ट्रेन अंबाला, चंडीगढ़, आनंदपुर साहिब और ऊना से होते हुए अंदौरा तक जाती है। इस ट्रेन से सफर कर प्रदेशवासी भी काफी खुश हैं और कम पैसों में विश्व स्तरीय सुविधा का आनंद उठा पा रहे हैं।
वंदे भारत ट्रेन के शुरू होने से स्थानीय लोगों को तो फायदा हुआ ही है, साथ ही इसने देवभूमि में आने वाले श्रद्धालुओं की राह आसान कर दी है। ज्वालाजी, ब्रजेश्वरी देवी कांगड़ा और मां चामुंडा जैसे प्राचीन धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी वंदे भारत ट्रेन एक वरदान साबित हुई है।
रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार अब देश और हिमाचल प्रदेश के स्टेशनों को भी विश्व स्तरीय बनाने पर जोर दे रही है। स्टेशनों का कायाकल्प करने के लिए मोदी सरकार ने अमृत भारत स्टेशन योजना की शुरुआत की है। अमृतकाल में नए भारत के सपने को साकार करती अमृत स्टेशन योजना के तहत देश के 1309 स्टेशनों का पुनरुत्थान किए जाने का लक्ष्य है। हिमाचल प्रदेश के तीन रेलवे स्टेशन अंदौरा, बैजनाथ पपरोला और पालमपुर भी अब इस सूची में शामिल है। इन स्टेशनों में जहां विश्व स्तरीय सुविधा मिलेगी, वहीं पारंपरिक विकास भी देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से शुरू कि गई इन योजनाओं के कारण राज्य में प्रगति और स्थानीय लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। बेहतर सुविधा और रेलवे की बेहतर पहुँच के कारण प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है, जिससे प्रदेश के पर्यटन को गति मिली है और यहां की अर्थव्यवस्था और मजबूत हुई है।
मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान और आत्मनिर्भर भारत के तहत रेलवे परियोजनाएं तय समय पर पूरी की जा रही है। बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचकर पिता का हाथ बंटाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब देश के रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प करने और देश के आम नागरिकों को बेहतर सुविधा देने के लक्ष्य के साथ इस दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं और नए भारत की संकल्प शक्ति पूरे विश्व को दिखा रहे हैं।












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