Study: मोटापे की वजह से बच्चों में बढ़ रहा है अस्थमा का खतरा, बढ़ता वजन दे रहा है गंभीर बीमारियों को जन्म
नई दिल्ली। एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि मोटापे से बच्चों में दमा (अस्थमा) का खतरा बढ़ जाता है, शोध के मुताबिक अस्थमा का इलाज कराने वाले बच्चों में मोटे बच्चों की संख्या औसत भार वाले बच्चों की तुलना में अधिक है और 23 से 27 फीसदी अस्थमा के नए मामले मोटापे की वजह से है। यह शोध जर्नल 'पीडियाट्रिक्स' में प्रकाशित हुआ है, इस शोध के लिए पांच लाख बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन किया गया है।

भारत में भी बढ़ रही है मोटे बच्चों की संख्या
वैसे जहां तक भारत का सवाल है तो यहां भी मोटे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो कि एक अच्छी खबर नहीं कही जा सकती है, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत पाचनतंत्र सिंड्रोम की महामारी से गुजर रहा है। इसे आम भाषा में 'सामान्य वजन मोटापा' कहते हैं, जिसके मुताबिक तोंद निकलना, हाई ट्रिग्लिसाइड, लो कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, हाई शूगर, पुरुषों में 90 सेंटीमीटर से ज्यादा पेट वाले और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर ज्यादा पेट वाले इस रोग के अंदर आते हैं। इस रोग के घेरे में बच्चे भी हैं, जो अगे चलकर युवावस्था में ही दिल के रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। इसलिए मोटापे से ग्रस्त बच्चों पर मां-बाप पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है।

मोटापे की वजह से महिलाओं को गर्भ धारण में दिक्कत
यही नहीं सारी गंभीर बीमारियों की जड़ मोटापा ही है, ज्यादा वजनधारी महिलाओं को गर्भधारण करने में अधिक समय लगता है और ये उनके होने वाले बच्चे के लिए सही नहीं होते हैं, हालिया कई सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अगर पति-पत्नी दोनों ही वजनी या मोटे हैं, तो पत्नी को गर्भधारण करने में सामान्य लोगों से 55 से 59 फीसदी ज्यादा समय लगता है।

गंभीर बीमारियां
मोटापे के शिकार बच्चो में केवल अस्थमा ही नहीं पनपता है बल्कि बच्चों में निम्नलिखित गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं...
- हाईपरटेंशन और हाई कोलेस्ट्रोल, जो गंभीर दिल के रोगों का कारण हैं।
- शरीर में ग्लूकोज सहनशीलता का असंतुलन और इंसुलिन प्रतिरोधात्मकता
- सांस के विकार, स्लीप एपनिया
- जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों और हड्डियों के विकार लीवर में सूजन और दिल की जलन सामाजिक हीन भावना
- आत्म-विश्वास में कमी और लगातार तनाव
- मोटापे से बचने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार कार्बोहाईड्रेट्स से परहेज करें
- मीठे आहार को कड़वे आहार से मिला कर लें जैसे आलू-मटर की जगह आलू-मेथी लें
- जैसे भी हो आधे घंटे सैर जरूर करें।
- हरी कड़वी चीजें खाएं, जैसे करेला, मेथी, पालक, भिंडी वनस्पति घी या ट्रांसफैट बिल्कुल न खाएं
- एक दिन में 80 एमएल से ज्याद सॉफ्ट ड्रिंक ना पिएं
- 30 प्रतिशत से ज्यादा मीठे वाली मिठाईयां ना खाएं मैदा, चावल और सफेद चीनी से बचें।

ध्यान देने योग्य बातें
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