Lok Sabha Speaker Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से कैसे खारिज हुआ? विपक्ष की 4 बड़ी चूक क्या?
Om Birla No-Confidence Motion Update: लोकसभा के बजट सत्र 2026 के दूसरे चरण में बुधवार (11 मार्च) को स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात और विपक्षी सदस्यों को बोलने न देने का आरोप लगाया था, लेकिन 10 घंटे की तीखी बहस के बाद सदन ने इसे नामंजूर कर दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा, जबकि विपक्ष की रणनीति संख्या बल की कमी के कारण फेल हो गई। आपको बता दें कि आजादी के बाद स्पीकर कभी हटाए नहीं गए। आखिरी बार 1987 में ऐसा प्रस्ताव आया था, लेकिन गिर गया। यह 39 साल बाद का मामला है, जब स्पीकर के खिलाफ ऐसा पहला प्रस्ताव था, जो लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठाता है। आइए, इस घटना को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं...

Om Birla No-Confidence Motion: क्या-क्या हुआ?
- प्रस्ताव पेश: कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि ने 9 मार्च को नोटिस दिया। आरोप था कि स्पीकर ने सदन में भेदभाव किया, विपक्षी नेताओं (जैसे राहुल गांधी) को बोलने नहीं दिया, और सत्ताधारी पक्ष का साथ दिया। महिला सदस्यों के खिलाफ भी टिप्पणियां होने का जिक्र किया गया।
- बहस का दौर: दो दिनों तक चली चर्चा में विपक्ष ने स्पीकर के आचरण पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सदन की निष्पक्षता के लिए है। लेकिन NDA ने स्पीकर का बचाव किया। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार पर तंज कसा कि वे खुद को 'PM इन वेटिंग' समझते हैं।
- अमित शाह (Amit Shah) की स्पीच: गृह मंत्री ने 56 मिनट की स्पीच में राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर निशाना साधा। कहा कि राहुल की अटेंडेंस 15वीं लोकसभा में 43%, 16वीं में 52% और 17वीं में 51% रही, जबकि नेशनल एवरेज ज्यादा था। शाह ने चुटकी ली कि राहुल विदेश दौरे पर चले जाते हैं, और कांग्रेस वरिष्ठों जैसे शशि थरूर को उन्हें संसदीय नियम सिखाने चाहिए। उन्होंने स्पीकर को नियमों का पालन कराने का अधिकार बताया और कहा, 'सदन मेला नहीं है, नियम तोड़ने पर माइक बंद होगा।'
- खारिज कैसे हुआ अविश्वास प्रस्ताव?: बहस के बाद ध्वनिमत (वॉयस वोट) से प्रस्ताव गिरा। विपक्ष के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदन स्थगित किया, लेकिन प्रस्ताव पास नहीं हो सका।
No-Confidence Motion Procedure: अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या है?
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लाया जाता है।
- नोटिस: कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी। यहां 118 सांसदों ने साइन किया।
- चर्चा: स्पीकर खुद चेयर नहीं करते, पैनल से कोई सदस्य पीठासीन होता है।
- वोटिंग: साधारण बहुमत (272 वोट) चाहिए। ध्वनिमत या डिविजन वोट से फैसला।
No-Confidence Motion Opposition Failure 4 Points: विपक्ष कहां-कहां चूका? 4 Point में समझें...
विपक्ष की रणनीति में कई कमियां रहीं, जो प्रस्ताव की असफलता का कारण बनीं:-
- पहली चूक- संख्या बल की कमी: लोकसभा में कुल 543 सीटें। स्पीकर हटाने के लिए 272 वोट चाहिए, लेकिन विपक्ष के पास सिर्फ 118 हस्ताक्षर थे। TMC ने सपोर्ट दिया, लेकिन कुल भी 200 से कम। NDA का बहुमत मजबूत था।
- दूसरी चूक- एकजुटता का अभाव: सभी विपक्षी दल पूरी तरह साथ नहीं आए। कांग्रेस ने लीड लिया, लेकिन कुछ दलों ने हंगामा किया, जिससे बहस प्रभावित हुई। राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने भी कमजोरी दिखाई।
- तीसरी चूक- रणनीतिक गलती: प्रस्ताव स्पीकर पर फोकस था, लेकिन विपक्षी वक्ताओं ने सरकार पर हमले ज्यादा किए। X (पूर्व में ट्विटर) पर यूजर्स ने इसे 'नाकारा विपक्ष' बताया। कांग्रेस को मालूम था कि पास नहीं होगा, लेकिन प्रतीकात्मक कदम से लोकतंत्र की छवि पर असर पड़ा।
- चौथी चूक- टाइमिंग और तैयारी: बजट सत्र में लाना जोखिम भरा था, जहां सरकार मजबूत थी। विपक्ष बैठकें तो कीं, लेकिन व्हिप जारी करने में देरी हुई।
यह घटना दिखाती है कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव राजनीतिक हथियार है, लेकिन बिना बहुमत के असरदार नहीं। विपक्ष को एकजुटता और रणनीति पर काम करना होगा। स्पीकर की भूमिका निष्पक्षता की है, और ऐसे प्रस्ताव लोकतंत्र की मजबूती दिखाते हैं।












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