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खट्टे-रसीले नींबू की पूरे साल डिमांड, किसानों को मिलेगी कमाई की मिठास, जानिए कैसे करें खेती

नींबू की खेती (lemon farming) करने वाले किसान पूरे साल रहने वाली इसकी डिमांड के कारण अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। जानिए नींबू की खेती से जुड़े कुछ टिप्स

नई दिल्ली, 16 मई : नींबू एक ऐसा फल है जो पूरे साल डिमांड में बना रहता है। किसानों को इसके उत्पादन से आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दर्जनभर राज्यों में बड़े पैमाने पर नींबू की खेती होती है, तो बदलते दौर के साथ लोग अपनी गार्डन में भी नींबू के पेड़ लगाने लगे हैं। जानिए नींबू की खेती से जुड़ी कुछ रोचक और जरूरी बातें। इनका ध्यान रखकर नींबू की खेती में मुनाफा कमाया जा सकता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा नींबू उत्पादक

भारत दुनिया का सबसे बड़ा नींबू उत्पादक

मेडिसिनल गुण वाले फल- नींबू की मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे अधिक नींबू उत्पादन करने वाला देश है। नींबू की खेती बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर होने के अलावा देश के अधिकांश राज्यों में नींबू उत्पादन होता है। नींबू का पौधा लगभग 10 वर्ष तक फल देता है। रोपाई के लगभग 3 साल बाद बड़े होने वाले नींबू के पौधे में फल अच्छी तरह लगने लगते हैं। पूरे साल नींबू पैदा होता है। अनुमान के मुताबिक एक एकड़ खेत में नींबू के पौधों की रोपाई करने पर सालाना लगभग 4 से 5 लाख रुपये कमाए जा सकते हैं।

अच्छे उत्पादन के लिए नींबू की उन्नत किस्में

अच्छे उत्पादन के लिए नींबू की उन्नत किस्में

नींबू की खेती में उन्नत किस्मों का चुनाव जरूरी है। पौधा विकसित होने के बाद नींबू की देखरेख की जरूरत होती है। अच्छी देखभाल के बाद पैदावार प्रति वर्ष बढ़ती है। एक पेड़ से 20 से 30 किलो नींबू उत्पादन होता है। मोटे छिलके वाले नींबू की उपज 30 से 40 किलो तक हो सकती है। आम तौर से मंडी में नींबू का रेट 40 से 70 रुपए किलो होता है, लेकिन गर्मियों में गुणवत्ता के आधार पर इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है।

नींबू की वेराइटी

भारत में नींबू की कई किस्मों में फ्लोरिडा रफ, करना या खट्टा नींबू और जंबीरी लोकप्रिय हैं। रोजाना घरेलू उपयोग में कागजी नींबू, गलगल और लाइम सिलहट किस्म का इस्तेमाल होता है। कागजी नींबू का उत्पादन चेन्नई, मुंबई, पश्चिम बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हैदराबाद और दिल्ली जैसी जगहों पर प्रमुख रूप से होता है। व्यावसायिक रूप से नींबू की कुछ अन्य किस्मों में बारहमासी, मीठा नींबू, प्रमालिनी, विक्रम, चक्रधर, पी के एम-1, साई शरबती, अभयपुरी लाइम, करीमगंज लाइम भी लोकप्रिय हैं। अधिक रस और पैदावार के लिए किसान इन किस्मों का उपयोग करते हैं।

कैसी मिट्टी में नींबू की खेती

कैसी मिट्टी में नींबू की खेती

नींबू के पौधे के लिए बलुई, दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। इसके अलावा लाल लेटराईट मिट्टी में भी नींबू की खेती हो सकती है। नीबू की खेती अम्लीय या क्षारीय मिट्टी में भी की जा सकती है। यहां तक कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी नींबू उगाया जा सकता है। नींबू के पौधे को सर्दी और पाला से बचाने की जरूरत होती है। जिन इलाकों में सर्दियां अधिक पड़तीं हैं, वहां नींबू की पैदावार कम होती है। ऐसे में दक्षिण भारत के प्रदेशों में नींबू अधिक उपजता है। उत्तर भारतीय प्रदेशों- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में अधिक सर्दी या पाला पड़ने पर नींबू की पैदावार बहुत कम हो जाती है।

कैसे करें नींबू की रोपाई

कैसे करें नींबू की रोपाई

नींबू की खेती इसके बीज और पौधों दोनों से शुरू की जा सकती है। पौधों की रोपाई करने से नींबू की खेती जल्दी और अच्छी होती है। नींबू के पौधों को नर्सरी से खरीदा जा सकता है। पौधे एक महीने पुराने और बिलकुल स्वस्थ होने चाहिए। पौधों की रोपाई के लिए जून और अगस्त के बीच की अवधि ठीक मानी जाती है। इस मौसम में नींबू का पौधा सबसे तेजी से बढ़ता है। बारिश के मौसम में इसके पौधे अच्छे से विकसित होते हैं। नींबू के पौधों को लगाने के दौरान दो पौधों के बीच 10 फीट की दूरी रखी जाती है। मिट्टी में बराबर गोबर की खाद मिलाकर पौधे की रोपाई करने से उत्पादन अच्छा होता है। एक हेक्टेयर खेत में लगभग 600 नींबू के पौधों की रोपाई हो सकती है।

नींबू की सिंचाई

नींबू की सिंचाई

नींबू के पौधों की रोपाई के बाद प्रति पौधे के हिसाब से 5 किलो गोबर की खाद दें। पहले साल 300 ग्राम यूरिया भी दें। यूरिया की खाद को सर्दी के महीने में दें। नींबू के पौधों में अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। जून से अगस्त के दौरान मानसून के कारण बारिश से इन पौधों को पर्याप्त पानी मिलता रहता है। बारिश न होने पर 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करें। मिट्टी में 6-8 प्रतिशत तक नमी बनी रहे, बस इतनी ही सिंचाई करें।

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