Delhi SIR: ‘डबल ड्यूटी’ पर विवाद! SIR में लगे 7500 टीचरों को जनगणना से छूट दिलाने की मांग, क्या है विवाद
Delhi SIR: दिल्ली में चुनावी तैयारियों के बीच एक अहम प्रशासनिक मुद्दा सामने आया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर ने डिविजनल कमिश्नर से अनुरोध किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में लगे करीब 7,500 शिक्षकों को जनगणना से जुड़े कार्यों से फिलहाल छूट दी जाए। अधिकारियों का कहना है कि अगर इन शिक्षकों को एक साथ दोनों जिम्मेदारियां दे दी गईं तो चुनाव से जुड़ा अहम काम प्रभावित हो सकता है।
निर्वाचन आयोग ने हाल ही में संकेत दिया है कि अप्रैल 2026 से SIR शुरू होने की संभावना है। इससे पहले कई जरूरी तैयारियां पूरी करनी हैं। फिलहाल 2025 की मतदाता सूची में दर्ज नामों का मिलान वर्ष 2002 के वोटर डेटा से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके आधार पर मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा।

इस काम के लिए बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO को रोजाना अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटानी पड़ रही है। उन्हें 2002 से जुड़े मतदाता रिकॉर्ड की पुष्टि करनी होती है और उसे 2025 की मतदाता सूची से जोड़ना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि यह समयबद्ध और मेहनत वाला काम है, इसलिए इसमें किसी तरह की देरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
जनगणना की तैयारी भी तेज
इसी बीच दिल्ली में Census 2027 की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक अगले महीने से हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग फेज शुरू होने वाला है। इसके लिए करीब 40,000 कर्मचारियों को फील्डवर्क की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह चरण 15 अप्रैल से शुरू होकर जून तक पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को कवर करने वाला है।
क्यों जरूरी है शिक्षकों को छूट देना
दिल्ली में इस समय कुल 13,033 पोलिंग स्टेशन हैं और चुनावी कामकाज के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की मदद ली जाती है। दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) के स्कूलों के लगभग 7,500 शिक्षक BLO और BLO सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे हैं।
CEO कार्यालय का मानना है कि यदि इन्हीं शिक्षकों को जनगणना के काम में भी लगा दिया गया तो SIR की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से डिविजनल कमिश्नर से अनुरोध किया गया है कि उन्हें फिलहाल Census ड्यूटी से मुक्त रखा जाए।
जनगणना के लिए कौन है जिम्मेदार
दिल्ली सरकार में राजस्व सचिव-cum-डिविजनल कमिश्नर को जनगणना 2027 के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में अब फैसला उन्हीं को करना है कि चुनावी प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से छूट दी जाए या नहीं। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनावी तैयारी और जनगणना जैसे दो बड़े सरकारी अभियानों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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