Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी आज, क्या है शुभ मुहू्र्त? क्यों लगता हैं मां को बासी भोजन का भोग?

Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है, आज ये पावन दिन आया है, यह पर्व माता शीतला को समर्पित है, जिन्हें रोगों और विशेष रूप से चेचक जैसी बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। शीतला अष्टमी आमतौर पर होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।

इस दिन भक्त माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाते हैं जिसे कि बसोड़ा कहते हैं। आपको बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला रोगों को दूर करने वाली देवी हैं। पुराने समय में चेचक जैसी बीमारियों से बचाव के लिए लोग माता शीतला की पूजा करते थे।

Sheetala Ashtami 2026

इस दिन माता की पूजा करने से बच्चों और परिवार के सदस्यों को बीमारियों से रक्षा मिलती है। साथ ही घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है।

Sheetala Ashtami 2026 Muhurat: क्या है मुहूर्त?

चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 10 मार्च को रात 1 बजकर 55 मिनट से शुरू हो गया और इसका समापन अष्टमी तिथि समाप्त 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत आज रखा गया है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह में 8 बजकर 4 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट तक का है।

Sheetala Ashtami 2026 Puja Vidhi: शीतला अष्टमी पूजा विधि

शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, दही, बासी भोजन (पूड़ी, गुजिया, हलवा आदि) जल अर्पित करें। माता शीतला की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

Sheetala Ashtami 2026 Bhog:शीतला अष्टमी पर क्यों लगाया जाता है बासी भोग?

शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला माता को बासी भोजन (ठंडा भोग) चढ़ाने की परंपरा बहुत प्राचीन है। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना हुआ भोजन माता को अर्पित किया जाता है। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक से जुड़े दोनों कारण बताए जाते हैं।

शीतला माता को शीतल (ठंडी) चीजें प्रिय

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता को शीतल (ठंडी) चीजें प्रिय होती हैं। इसलिए उन्हें गरम भोजन नहीं चढ़ाया जाता। ठंडे भोजन का भोग से मां प्रसन्न होकर भक्तों को चेचक, बुखार और अन्य रोगों से रक्षा करती हैं। जबकि वैज्ञानिक कारण ये है कि होली के बाद मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। इस समय शरीर को आराम देने और पाचन को संतुलित रखने के लिए भी हल्का और ठंडा भोजन करने की परंपरा बनाई गई है।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार की राय जरूर लें।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+