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Pankaj Chaudhary: यूं ही पंकज चौधरी नहीं बनें UP BJP अध्यक्ष! कांग्रेस के इन धुरंधरों को हराकर जीता था चुनाव

Pankaj Chaudhary Journey: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान अपने सबसे अनुभवी नेता और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को सौंप दी है। यह फैसला राजनीतिक अनुभव, संगठन के प्रति निष्ठा और एक मजबूत ओबीसी (OBC) चेहरे को साधने की बीजेपी की रणनीति को दर्शाता है।

एक साधारण पार्षद से लेकर सात बार लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री बनने तक, पंकज चौधरी का सफर भारतीय राजनीति में दृढ़ता का एक अद्भुत उदाहरण है। आइए इस दिग्गज नेता के राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं।

pankaj chaudhary with cm yogi adityanath

कौन कौन बना पंकज चौधरी का प्रस्तावक?

  • योगी आदित्यनाथ
  • कैशव मौर्य
  • ब्रजेश पाठक
  • स्मृति ईरानी
  • स्वतंत्र देव सिंह
  • सूर्य प्रताप शाही
  • सुरेश खन्ना
  • बेबी रानी मौर्य

शुरुआती जीवन और स्थानीय राजनीति में प्रवेश
पंकज चौधरी का जन्म 20 नवंबर 1964 को गोरखपुर जिले में हुआ था। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की। बड़े पद की लालसा न रखते हुए, उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत जमीनी स्तर से की, जिसने उनके आधार को मजबूत किया:

  • (1989-91) वह सबसे पहले गोरखपुर नगर निगम में सदस्य (पार्षद) चुने गए
  • (1990-91) जल्द ही वह नगर निगम के उप महापौर (डिप्टी मेयर) के पद तक पहुंचे
  • 1991 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कार्य समिति में भी शामिल किया गया।

महाराजगंज में दबदबा: सात बार लोकसभा की जीत

स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने के बाद, पंकज चौधरी ने महाराजगंज लोकसभा सीट से अपनी संसदीय यात्रा शुरू की और कुल सात बार जीत दर्ज करके अपनी लोकप्रियता साबित की। इस दौरान उनकी चुनावी जीत और हार का ब्यौरा इस प्रकार है:

जीत का सिलसिला (1991 - 2024):

  • 1991 (पहली जीत): जनता दल के श्री कृष्ण मणि को हराया।
  • 1996, 1998, 2004: समाजवादी पार्टी और बसपा के दिग्गज नेता अखिलेश सिंह को इन तीन चुनावों में लगातार पराजित किया।
  • 2014: मोदी लहर में बसपा के काशीनाथ शुक्ला को बड़े अंतर से हराया।
  • 2019: समाजवादी पार्टी के अखिलेश सिंह के साथ-साथ कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को भी मात दी।
  • 2024: कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को हराकर सातवीं बार लोकसभा पहुंचे।
  • हार और वापसी: उन्हें 1999 में सपा के अखिलेश यादव और 2009 में कांग्रेस के स्वर्गीय हर्षवर्धन से हार मिली थी, लेकिन उनकी वापसी हमेशा मजबूत रही।

केंद्रीय मंत्री और संसदीय अनुभव

अपने लंबे संसदीय करियर के दौरान, उन्होंने प्रशासनिक और विधायी कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • संसदीय समितियां: 1991 से 2019 तक उन्होंने रेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन, और सार्वजनिक उपक्रम सहित कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में सदस्य के रूप में कार्य किया।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री:

  • जुलाई 2021: उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री का पद मिला।
  • वर्तमान भूमिका: वह बजट, कर प्रणाली, आर्थिक सुधारों और वित्तीय नीतियों के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

UP BJP अध्यक्ष बनने के कारण
पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना दर्शाता है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन पर कितना भरोसा करता है। इसके मुख्य कारण हैं:

  • मजबूत ओबीसी चेहरा: वह कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश में गैर-यादव ओबीसी वोटों का एक बड़ा आधार है। भाजपा 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ग को साधना चाहती है।
  • संगठनात्मक निष्ठा: उन्हें पूर्वांचल में पार्टी का एक अनुशासित, संतुलित और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है, जो विवादों से दूर रहते हैं।
  • अनुभव का लाभ: सात बार के सांसद होने और केंद्रीय मंत्री के रूप में काम करने का उनका लंबा अनुभव उन्हें संगठन की कमान संभालने के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है। पंकज चौधरी की ताजपोशी से अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है।
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