Bengal: बर्तन-झाड़ू करने वाली उम्मीदवार! कौन हैं कलिता माझी, BJP से लड़ रहीं चुनाव, मोदी भी करते हैं तारीफ!

Meet Kalita Majhi West Bengal Assembly election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसा चेहरा चर्चा में है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। कलिता माझी, जो दूसरों के घरों में बर्तन धोने और झाड़ू-पोछा करने का काम करती हैं, अब विधानसभा चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार हैं। पूर्वी वर्धमान जिले की आउसग्राम सीट से उन्हें पार्टी ने एक बार फिर टिकट दिया है।

कलिता माझी की मासिक आमदनी महज 3000 से 4000 रुपये के बीच है। वे दो घरों में काम करके परिवार चलाती हैं। लेकिन अब उन्होंने एक महीने के लिए काम से छुट्टी लेकर पूरी तरह चुनाव प्रचार पर फोकस कर लिया है।

Meet Kalita Majhi West Bengal Assembly election 2026

कलिता माझी पहले भी लड़ चुकी हैं चुनाव (who is Kalita Majhi)

कलिता माझी का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। कलिता मजहपुकुर पारी इलाके की रहने वाली हैं और अपने पति सुब्रतो माझी के साथ रहती हैं, जो पेशे से प्लंबर हैं। उनका एक बेटा है, जिसने इस साल 12वीं की परीक्षा दी है। आर्थिक तंगी के कारण कलिता ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सकीं, लेकिन अब वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने का सपना देखती हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों की हालत ठीक नहीं है और इसमें सुधार की जरूरत है।

करीब एक दशक से राजनीति में सक्रिय कलिता माझी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्धमान जिले की आउसग्राम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। पांच साल बाद वह दोबारा चुनावी मैदान में उतरी हैं। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पार्टी ने टिकट दिया था, लेकिन तब वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार अबेदनंद ठाकुर से करीब 12,000 वोटों के अंतर से हार गई थीं। उस चुनाव में उन्हें 88,577 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 1,00,392 वोट मिले थे।

चुनावी मैदान में दोबारा उतरने को लेकर कलिता कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें फिर से यह मौका मिलेगा। उनके मुताबिक, पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है और यह उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है। वह अभी पूरी तरह अपने चुनाव प्रचार पर ध्यान दे रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन घरों में वह काम करती हैं, उनके मालिकों ने भी उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और जीतकर लौटने की शुभकामनाएं दी हैं।

PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

कलिता माझी की सादगी और संघर्ष की कहानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ध्यान खींचा है। पीएम मोदी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें राजनीति में एक मिसाल बताया था। उन्होंने कहा था कि कलिता जैसी महिलाएं समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो अपनी मेहनत और सेवा भाव से आगे बढ़ रही हैं।

गरीबी ने सिखाया जमीनी सच्चाई

कलिता माझी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। आर्थिक तंगी के कारण वे ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाईं। लेकिन यही संघर्ष उन्हें आम लोगों के करीब लेकर आया। वे कहती हैं कि घर-घर जाकर काम करने की वजह से उन्हें लोगों की असली समस्याओं का अंदाजा है। गरीब परिवार किन हालातों में जीते हैं, यह उन्होंने खुद महसूस किया है। यही अनुभव अब उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है।

कलिता कहती हैं, ''एक मेड होने के नाते वह आम लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझती हैं। अगर वह चुनाव जीतती हैं, तो इलाके में विकास की नई शुरुआत करेंगी। उनके क्षेत्र में सड़क, पीने का पानी, पक्के मकान और रोजगार जैसी कई बुनियादी समस्याएं हैं, जिन पर वह काम करना चाहती हैं।''

कलिता माझी के चुनावी मुद्दे क्या हैं?

🔷कलिता माझी का फोकस पूरी तरह जमीनी मुद्दों पर है। वे कहती हैं कि अगर उन्हें जीत मिलती है, तो सबसे पहले अपने इलाके में एक अस्पताल बनवाना चाहेंगी, क्योंकि अभी लोगों को इलाज के लिए दूर बर्धमान शहर जाना पड़ता है।

🔷इसके अलावा वे सड़क, पानी, बिजली और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर काम करना चाहती हैं। कई गांवों में अभी भी बिजली नहीं है, जहां वे सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रही हैं।
वे प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू कर गरीबों के लिए घर और शौचालय बनवाने की भी बात करती हैं।

🔷कलिता माझी के एजेंडे में महिलाओं की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है और महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। इसके साथ ही वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात करती हैं। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों की हालत ठीक नहीं है और अगर मौका मिला तो वे बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी।

🔷स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को वह सबसे बड़ी चुनौती मानती हैं। उनका सपना है कि उनके इलाके में एक अस्पताल बने, क्योंकि अभी लोगों को इलाज के लिए बर्धमान शहर तक जाना पड़ता है। इसके अलावा वह बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर देना चाहती हैं।

🔷कलिता ने यह भी बताया कि कई गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे में वह सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रही हैं, ताकि लोगों को बिजली की सुविधा मिल सके। वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर और शौचालय उपलब्ध कराने की भी बात करती हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को सुरक्षित छत का अधिकार है।

🔷वह किसानों की समस्याओं को भी उठाना चाहती हैं और मानती हैं कि कृषि क्षेत्र को मजबूत किए बिना गांवों का विकास संभव नहीं है। कुल मिलाकर, कलिता माझी खुद को आम जनता की आवाज के रूप में पेश कर रही हैं, जो जमीनी स्तर से उठकर राजनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही हैं।

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