Kerala Election 2026: त्रिशूर में मोदी का मेगा शो, क्या BJP की एंट्री से बंटेगा LDF-UDF का मुस्लिम वोट बैंक?
Kerala Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बज चुकी है। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है।
इसी कड़ी में आज रविवार, 29 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल के त्रिशूर में एक हाई-प्रोफाइल चुनावी अभियान का नेतृत्व करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल बीजेपी (NDA) के कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा, बल्कि केरल की पारंपरिक 'दो-पक्षीय' राजनीति को 'त्रिकोणीय' मुकाबले में बदलने का एक बड़ा संकेत है।

इस बीच, राज्य की राजनीति में एक बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या बीजेपी की बढ़ती मौजूदगी पारंपरिक समीकरणों को बदल देगी और इसका असर एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) पर कितना पड़ेगा।
PM मोदी त्रिशूर में करेंगे मेगा रोडशो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पालक्काड में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के बाद दोपहर बाद त्रिशूर पहुंचेंगे। शाम करीब 4 बजे वे कुट्टनेल्लूर स्थित सी. अच्युत मेनन सरकारी कॉलेज के हेलीपैड पर उतरेंगे, जहां केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता उनका भव्य स्वागत करेंगे।
प्रधानमंत्री शहर के प्रसिद्ध स्वराज राउंड में लगभग 900 मीटर लंबा रोडशो करेंगे। त्रिशूर को केरल की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है और सुरेश गोपी की हालिया सफलताओं के बाद बीजेपी इस क्षेत्र को अपना सबसे मजबूत गढ़ मानकर चल रही है।
केरल विधानसभा में BJP की एंट्री से किसे होगा नुकसान?
केरल में दशकों से सत्ता की लड़ाई वामपंथी गठबंधन (LDF) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले (UDF) के बीच रही है। लेकिन इस बार बीजेपी ने विकास और कल्याणकारी एजेंडे के साथ खुद को एक मजबूत 'तीसरे विकल्प' के रूप में पेश किया है।
राजनीतिक पंडितों की मानें तो, यदि बीजेपी हिंदू मतों और तटस्थ वोट बैंक में सेंध लगाती है, तो इसका सीधा नुकसान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले LDF को हो सकता है, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी की बढ़ती पैठ ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में गणित बिगाड़ दिया है, जिससे मुकाबला अब केवल दो गठबंधनों के बीच नहीं रह गया है।
मुस्लिम वोट बैंक बनेगा 2026 चुनाव का 'किंगमेकर'
केरल की करीब 25% आबादी अल्पसंख्यक समुदाय की है, जिसमें मुस्लिम समाज का बड़ा हिस्सा शामिल है। जिनका प्रभाव उत्तरी केरल के मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड और कासरगोड जैसे जिलों में निर्णायक है। ऐसे में इस बार भी चुनावी नतीजों में मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। मुस्लिम समुदाय कांग्रेस का वोट बैंक का आधार है।
पारंपरिक रूप से IUML के जरिए कांग्रेस (UDF) का समर्थन करता रहा है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है, यदि वे इस बार भी हारते हैं, तो राज्य में पार्टी का भविष्य संकट में पड़ सकता है। पिछले कुछ सालों में CPI(M) ने मुस्लिम समुदाय और प्रवासी वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है।
बदला-बदला दिख रहा वोटिंग ट्रेंड
पिछले लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव मुख्य रूप से UDF की ओर था, जबकि विधानसभा चुनावों में LDF को भी समर्थन मिला था। हालांकि इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है। कुछ संगठनों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है।
वहीं LDF की कल्याणकारी योजनाएं अभी भी प्रभावी फैक्टर बनी हुई हैं इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का रुख भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जो संगठन पहले LDF के करीब माने जाते थे, अब उनका झुकाव UDF की ओर दिख रहा है।
हालिया विवादों और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कुछ वर्गों में नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के भीतर एकरूपता नहीं है और अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग राजनीतिक रुझान देखने को मिल सकते हैं।
क्या तीसरी बार सत्ता में आएगा LDF?
LDF लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर इतिहास रचने की कोशिश में है, जबकि UDF वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। वहीं बीजेपी इस बार किंगमेकर या गेम चेंजर की भूमिका में नजर आ सकती है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 सिर्फ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी है। मुस्लिम वोट बैंक, बीजेपी की एंट्री और LDF-UDF के बीच सीधा मुकाबला ये तीनों फैक्टर मिलकर तय करेंगे कि इस बार केरल की सत्ता किसके हाथ आएगी।












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