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क्या है VVPAT यानी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन और कागज की पर्ची

By Bbc Hindi

ईवीएम
Getty Images
ईवीएम

वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट (वीवीपीएट) व्यवस्था के तहत वोटर डालने के तुरंत बाद काग़ज़ की एक पर्ची बनती है.

इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है.

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यह व्यवस्था इसलिए है कि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके.

काग़ज़ की पर्ची

ईवीएम ले जाते चुनाव कर्मी
Reuters
ईवीएम ले जाते चुनाव कर्मी

ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है.

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड औक इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने यह मशीन 2013 में डिज़ायन की.

सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिए.

चुनाव आयोग ने जून 2014 में तय किया किया अगले चुनाव यानी साल 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा.

3174 करोड़ रुपए

प्रेस रिलीज़
Election Commission of India
प्रेस रिलीज़

आयोग ने इसके लिए केंद्र सरकार से 3174 करोड़ रुपए की मांग की.

बीईएल ने साल 2016 में 33,500 वीवीरपैट मशीन बनाईं. इसका इस्तेमाल गोवा के चुनाव में 2017 में किया गया.

बीते दिनों पाच राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया.

इसे केंद्र सरकार से ज़रूरी पैसे अब तक नहीं मिले हैं.

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English summary
what is VVPAT and how is it work
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