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2021 विधानसभा चुनाव: EVM और VVPAT टैली डेटा 100% हुआ मैच, चुनाव आयोग ने कही ये बात

2021 विधानसभा चुनाव: EVM और VVPAT टैली डेटा 100% हुआ मैच, चुनाव आयोग ने कही ये बात

नई दिल्ली, 03 जून: पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल्स (वीवीपैट) का टैली डाटा 100 प्रतिशत मैच हुआ है। भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के एक अधिकारी ने कहा, "डेटा ईवीएम और वीवीपैट के बीच 100 प्रतिशत मिलान दिखाता है, जो इसकी सटीकता और प्रामाणिकता साबित करता है।'' चार राज्यों केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और एक केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में मार्च और अप्रैल 2021 में विधानसभा चुनाव हुए थे और नतीजे 2 मई को आए थे। ईवीएम और वीवीपैट का 100 फीसदी मिलावा वाला डेटा इसकी वास्तविकता की पुष्टि करते हैं।

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    EVM, VVPAT

    हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में 1,492 वीवीपैट, तमिलनाडु में 1,183, केरल में 728, असम में 647 और पुदुचेरी में 156 वीवीपीएटी थे। ईवीएम को 1989 में भारत के चुनाव आयोग द्वारा विकसित किया गया था। 2019 के आम चुनावों में भारत के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में वीपीपैट इकाइयों का उपयोग किया गया था, हालांकि, 2014 में वीवीपैट का उपयोग आठ निर्वाचन क्षेत्रों में किया गया था। अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि चुनाव आयोग के लिए भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।

    जानें वीवीपैट क्या होता है?

    ईवीएम के साथ लगी मशीन वीवीपैट असल में एक प्रिंटर की तरह काम करती है, जो मतदाताओं को उसके डाले गए वोटों के बारे में जानकारी देती है। वोटर के वोट डालने के बाद वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची में ये जानाकारी होती है कि आपने किस उम्मीदवार को वोट डाले हैं। वीवीपैट इस बात की भी पुष्टि करता है कि आपने जो वोट किया है, वो उसी कैंडिडेट को गया है या नहीं। इसलिए अब हर चुनाव में ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन लगाई जाती है।

    चुनाव आयोग ने ये कई बार साफ-साफ कहा है कि ईवीएम किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं की जा सकती है। इसलिए अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ईवीएम के वीवीपैट की जरूरत क्या है तो बता दें कि ईवीएम में भी वोटर का वोट आपके द्वारा चुने गए उम्मीदवार को ही जाता है। बस वीवीपैट में उसकी पुष्टि दोबारा हो जाती है, जिसको एक डबल क्रॉस चेक की तरह देखा जा सकता है।

    वीवीपैट कैसे करती है काम?

    जब कोई भी वोटर वोट डालत है तो वीवीपैट से एक पर्ची निकलती है। इस पर्ची में वोटर ने जिस उम्मीदवार को वोट डाला है, उसका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। जिसको आप वीवीपैट में लगे ग्लॉस वॉल से 7 सेकेंड तक देख सकते हैं। फिर यह पर्ची सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है। वीवीपैट की यह पर्ची वोटरों को दी नहीं जाती है। ये सिर्फ पोलिंग अधिकारियों के लिए ही होता है। चुनाव की मतगणना के वक्त किसी भी तरह के शक में इन पर्चियों और ईवीएम का मिलना किया जाता है।

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