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VVPAT वेरिफिकेशन पर SC का फैसला सुरक्षित, सुनवाई के दौरान कहा- 'हम चुनावों को नियंत्रित नहीं कर सकते'

Supreme Court on VVPAT Case: देश में लोकसभा चुनाव 2024 जारी है। ऐसे सियासी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को EVM- VVPAT के मुद्दे पर अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की पर्चियों की 100 फीसदी क्रॉस-चेकिंग की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम चुनावों को नियंत्रित नहीं कर सकते।

दरअसल, बुधवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इस तकनीक से जुड़े चार-पांच और प्वाइंट पर जानकारी मांगी और निर्वाचन आयोग के अफसरों को बुलाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम की कार्यप्रणाली से जुड़े पांच सवालों पर भारत चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था।

VVPAT Case

बता दें कि इससे पहले 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वकीलों और चुनाव आयोग की 5 घंटे दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

जिसके बाद बुधवार को वीवीपैट और ईवीएम से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम चुनावों को नियंत्रित नहीं करते हैं, चुनाव आयोग ने संदेह दूर कर दिया है।

ईवीएम की कार्यप्रणाली के संबंध में पांच प्रश्नों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था। जिस पर चुनाव आयोग के एक अधिकारी को आज दोपहर 2 बजे तक सवालों का जवाब देने को कहा।

अदालत ने कहा, "हम चुनावों को नियंत्रित नहीं कर सकते, हम किसी अन्य संवैधानिक प्राधिकरण के कामकाज को नियंत्रित नहीं कर सकते। ईसीआई ने संदेह दूर कर दिया है। हम आपकी विचार प्रक्रिया को नहीं बदल सकते। हम संदेह के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं।"

सुनवाई के दौरान जस्टिस खन्ना ने कहा कि हम मेरिट पर दोबारा सुनवाई नहीं कर रहे हैं। हम कुछ निश्चित स्पष्टीकरण चाहते हैं। हमारे कुछ सवाल थे और हमें जवाब मिल गए। फैसला सुरक्षित।
इससे पहले जस्टिस खन्ना ने कहा, "हमने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का अध्ययन किया। हम सिर्फ तीन-चार स्पष्टीकरण चाहते थे। हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते, लेकिन अपने निष्कर्षों के बारे में दोगुना आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने के बारे में सोचा।"

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील ने कहा कि पारदर्शिता के लिए ईवीएम के सोर्स कोड का भी खुलासा किया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस खन्ना ने जवाब दिया, "सोर्स कोड का खुलासा कभी नहीं किया जाना चाहिए। अगर खुलासा हुआ तो इसका दुरुपयोग होगा।"

उन्होंने आगे कहा कि हम सिर्फ स्पष्टीकरण चाहते थे। एक, क्या माइक्रो कंट्रोलर कंट्रोलिंग यूनिट में स्थापित है या वीवीपीएटी में? ऐसा संकेत प्रतीत होता है, हम इस धारणा के तहत थे कि माइक्रोकंट्रोलर कंट्रोल यूनिट में है। हमें बताया गया कि वीवीपैट में एक फ्लैश मेमोरी है।

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