Assembly election result: ईवीएम से कैसे होती है मतगणना, कौन-कौन जा सकता है अंदर? जानिए हर सवाल का जवाब
मध्यप्रदेश, तेलंगाना सहित 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। पांच में से चार राज्यों के चुनाव के नतीजे आज सामने आ जाएंगे। वोटिंग के बाद सभी राज्यों के एग्जिट पोल भी आ चुके हैं। एग्जिट पोल्स में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियां बढ़त बनाती दिख रही हैं। कहीं एग्जिट पोल्स पर भरोषा कर के आगे चल रही पार्टियां अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं तो वहीं दूसरी ओर एग्जिट पोल में पीछे रह गयी पार्टियां 2018 के दौर को याद करते हुए अपनी जीत की उम्मीद लगा रही हैं।
इन सभी के बीच कुछ सवाल है जो लोगों के मन में उठ रहे होगें जैसे, आखिर ये काउंटिंग यानी की मतों की गणना होती कैसे है? गणना के वक्त कौन-कौन से लोग मौजूद होते हैं, कौन सी चीजें काउंटिंग सेंटर के अंदर ले जाने की परमिशन होती है, ऐसे और भी कई सवाल। अगर आपके मन भी कुछ ऐसे सवाल उठ रहे हैं तो हम आपके लिए आज उन सभी सवालों का जवाब लेकर आए हैं।

सबसे पहला सवाल...
1.काउंटिंग यानी की मतगणना कहां होती है?
वोटिंग के बाद सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को निर्वाचन क्षेत्र के लिए बनाए गए मतगणना केंद्रों के स्ट्रांग रूम में जमा किया जाता है। मतगणना केंद्रों के अंदर काउंटिंग हॉल होते हैं। एक हॉल में केवल 14 काउंटिंग टेबल लगाने की अनुमति होती है। रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की टेबल इन 14 टेबलों में नहीं गिनी जाती है।
2.मतगणना कितने बजे शुरू होती है?
वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती है। 8 बजने से पहले टेबल के अनुसार ईवीएम वितरित कर दिया जाता है। काउंटिंग शुरू होने से पहले सभी रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर मतों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जोर-जोर से बोल कर शपथ लेते हैं।
3.कैसे की जाती है मतों की गिनती?
वोटों की गिनती इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट पेपर्स (ETPBs) और पोस्टल बैलट्स (PBs) से शुरू की जाती है। जिसके आधे घंटे बाद ईवीएम की काउंटिंग शुरू होती है। ETPBs और PBs की गिनती आरओ के टेबल पर होती है। आधे घंटे के अंदर ये काउंटिंग पूरी नहीं भी हो तब भी ईवीएम की काउंटिंग शुरू की जा सकती है।
14 ईवीएम में पड़े वोट हर राउंड में गिने जाते हैं। ECI ऑब्जर्वर उस राउंड में किसी भी दो ईवीएम की पैरलल काउंटिंग करने के बाद नतीजों की टेबल तैयार करते हैं। हर राउंड के नतीजों पर सुपरवाइजर, काउंटिंग एजेंट्स या कैंडिडेट्स के हस्ताक्षर होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा साइन किया जाता है। जिसके बाद बाहर आ कर कौन कितने वोट से आगे है इसकी घोषणा की जाती है।
हर राउंड पूरा होने के बाद आरओ स्ट्रांग रूम से ईवीएम काउंटिंग रूम में मंगवाते हैं और ये पूरी प्रक्रिया वापस दोहराई जाती है। काउंटिंग के बाद VVPAT वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है। आपको बता दें, पूरी काउंटिंग प्रोसेस CCTV की निगरानी में की जाती है।
4.क्या होती ही VVPAT वेरिफिकेशन?
वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल यानी की VVPAT की प्रक्रिया ईवीएम के वोटों की गिनती के बाद अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हर विधानसभा क्षेत्र के किन्हीं पांच पोलिंग स्टेशंस की VVPAT पर्चियों को वहां के EVMs के नतीजों से मिला कर देखा जाएगा। ये प्रक्रिया बेहद जरुरी है। अगर VVPAT और EVM के मतों की गिनती मेल नहीं खाती तो VVPAT को वापस गिना जाएगा और उसके नतीजों को ही सही माना जाएगा।
5.क्या है VVPAT?
वोटिंग के दौरान जब वोटर EVM का कोई बटन दबाता है तब VVPAT मशीन से एक कागज निकलता है। उस कागज पर उस उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह बना होता है जिसे वोट किया गया है। ये पर्ची वोटर को 7 सेकंड के लिए दिखती है जिसके बाद वो मशीने के ड्राप बॉक्स में गिर जाती है। ऐसा इसलिए किया होता है ताकि वोटर को पता चल सके की उसका वोट सही व्यक्ति को गया है।
6.किसके पास होता है VVPAT का एक्सेस?
VVPAT मशीने को केवल पोलिंग अधिकारी ही खोल सकता है। हर मतगणना में VVPAT की गिनती को सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य कर दिया है।
7.स्ट्रांग रूम क्या है और इसकी निगरानी कौन करता है?
स्ट्रांग रूम एक लॉकर की तरह बेहद सुरक्षित स्थान होता है जो हर मतगणना केंद पर बनाया जाता है। इसमें चुनाव से पहले और चुनाव के बाद EVM और VVPAT मशीनों को स्टोर किया जाता है। स्ट्रांग रूम्स के अंदर CCTV कैमरे लगे होते हैं। इसके अलावा यहां डबल लॉकिंग सिस्टम के साथ-साथ चौबीसों घंटे सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाती है। यहां हाई सिक्यॉरिटी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई जाती है ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति ईवीएम या वीवीपीएटी को हाथ नहीं लगा सके या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ ना की जा सके।
8.काउंटिंग के दौरान कितने काउंटिंग एजेंट मौजूद रहते हैं?
वोट की गिनती के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने-अपने काउंटिंग एजेंट या इलेक्शन एजेंट के साथ काउंटिंग सेंटर पर रहने की इजाजत होती है। ये वोटों की गिनती पर नजर रखते हैं ताकि काउंटिंग की प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
9.क्या मतगणना दोबारा हो सकती है?
अगर कोई उम्मीदवार चुनाव के नतीजों से संतुष्ट नहीं है तो वो काउंटिंग के 45 दिनों के भीतर दोबारा मतगणना की मांग कर सकता है। रिकाउंटिंग की मांग उठाने वाले उम्मीदवार के पास जमानत जब्त होने से छह गुना ज्यादा वोट होना अनिवार्य है। दोबारा मतगणना कराने की अनुमति उस क्षेत्र के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम) दे सकते हैं। दरअसल, चुनाव के समय किसी भी जिले के डीएम उस क्षेत्र के निर्वाचन पदाधिकारी होते हैं। उनके पास ही वोटों की गिनती दोबारा करवाने के लिए आदेश पारित करने का अधिकार होता है।
10.नतीजे आने के बाद कहां जाती है EVM?
नतीजों की घोषणा होने और विजेता उम्मीदवार को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जीत का सर्टिफिकेट देने के बाद EVM को फिर से स्ट्रांग रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है। EVM काउंटिंग के 45 दिनों बाद तक उसी स्टोर रूम में रखी रहती हैं। जिसके बाद उसे वहां से बड़े स्टोर रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है।
11.अगर दो उम्मीदवारों को बराबर वोट मिलें तो जीत किसकी होगी?
ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर पहले वोटों की गिनती दोबारा की जाती है। अगर उसके बाद भी नतीजे बराबर होते हैं तो वैलेट पेपर के आधार पर फैसला किया जाता है। अगर उसमें भी नतीजे समान हुए तब वरीयता के आधार पर विजेता का चुनाव किया जाता है। वरीयता यानी की कौन सा उम्मीदवार अधिक सीटों से लीड कर रहा है।
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