कार्तिकई दीपम विवाद: 'सारे हिंदू एक हों', RSS प्रमुख मोहन भागवत ने क्यों कही ये बात?
RSS Chief Mohan Bhagwat: तमिलनाडु के तिरुपरनकुंद्रम में दीप जलाने को लेकर उठे विवाद ने पिछले कुछ दिनों में धार्मिक भावनाओं, परंपराओं और राजनीति तीनों को एक मंच पर ला दिया है। कार्तिकई दीपम जैसे शांतिपूर्ण त्योहार के दौरान भड़की हलचल ने न केवल स्थानीय प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि पूरे राज्य में हिन्दू समुदाय की भूमिका, उनकी परंपराओं और उनके अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी। इसी गरम माहौल के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया है।
भागवत का मानना है कि तमिलनाडु में हिन्दुओं की बढ़ती जागरूकता और एकजुटता ही इस विवाद को सही दिशा में ले जाने के लिए पर्याप्त है। और शायद किसी बड़े आंदोलन या टकराव की अभी जरूरत नहीं है। दीप जलाने को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेता जा रहा है।

हिन्दू त्योहार कार्तिकई दीपम के दौरान भड़की झड़पों के बाद यह मामला अब अदालत, सरकार और राजनीतिक दलों तक पहुंच चुका है। इसी बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने इस पूरे विवाद पर अपनी मजबूत राय रखते हुए कहा कि तमिलनाडु में हिन्दू समाज की जागरूकता ही इस मुद्दे को सही दिशा में ले जाने के लिए काफी है।
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'हिन्दुओं की जागरूकता ही पर्याप्त'
एक बड़े कार्यक्रम "100 Years of Sangh Journey - New Horizons" में भाग ले रहे मोहन भागवत से जब तिरुपरनकुंद्रम विवाद पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि स्थिति को अनावश्यक रूप से बड़ा बनाने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि हिन्दू समुदाय की बढ़ती सक्रियता और एकजुटता से ही इस मुद्दे का समाधान निकल सकता है।
भागवत ने कहा, "अगर इस मामले में किसी तरह की तीव्रता लाने की जरूरत पड़ी तो ऐसा किया जाएगा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता है। मामला अदालत में है, इसलिए इसे वहीं शांतिपूर्ण तरीके से सुलझने देना चाहिए। मुझे विश्वास है कि तमिलनाडु के हिन्दुओं की जागरूकता ही आवश्यक परिणाम लाने के लिए काफी होगी।"
'जरूरत पड़ी तो हिन्दू संगठन बताएंगे'
भागवत ने यह भी कहा कि यदि विवाद को लेकर कोई बड़ा कदम उठाना पड़ा तो तमिलनाडु के हिन्दू संगठन ही इसकी दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा, "अगर कभी इसकी आवश्यकता हुई तो हिन्दू संगठन हमें बताएंगे और फिर इस पर विचार होगा। अभी मुझे लगता है कि यह मसला यहीं, स्थानीय स्तर पर, हिन्दुओं की शक्ति और एकता के आधार पर हल हो सकता है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि समाधान हिन्दू पक्ष के हित में होना चाहिए और इस उद्देश्य के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे।
क्यों भड़का तिरुपरनकुंद्रम विवाद?
कार्तिकई दीपम त्योहार के दौरान इस बार विवाद तब शुरू हुआ जब दीप जलाने की जगह को लेकर दो पक्षों में असहमति सामने आई। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित मंदिर में पारंपरिक दीप जलाया जाए। लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना था कि कई वर्षों से दीप दीपा मंडपम नामक स्थान पर ही जलता आया है और परंपरा को बदलना उचित नहीं है। इसी मतभेद ने विवाद को जन्म दिया और बाद में कुछ स्थानों पर झड़पें भी हुईं।
जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग का पत्र
विवाद के बीच एक बड़ा राजनीतिक मोड़ उस समय आया जब 100 से अधिक INDIA गठबंधन के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग की मांग वाला पत्र सौंप दिया। इन सांसदों का आरोप है कि न्यायाधीश ने धार्मिक परंपराओं में अनुचित हस्तक्षेप किया और उनका निर्णय साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला था।
'यह वोट बैंक की राजनीति'
लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "आजादी के बाद पहली बार केवल एक फैसले के आधार पर किसी जज के खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है। यह सब वोट बैंक को खुश करने के लिए किया गया है... यह बेहद गलत परंपरा की शुरुआत है।"
शाह ने यह कहते हुए भी हैरानी जताई कि शिवसेना (UBT) ने भी इस मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने केवल परंपरा के आधार पर दीप जलाने का निर्देश दिया था, जिसे विवाद का मुद्दा बनाना राजनीति से प्रेरित कदम है।
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