BJP का नया चीफ कौन होगा? अब इस नए नेता की चर्चा हुई तेज, उम्र में भी हैं फिट और RSS की भी हैं पसंद
BJP President Race: बिहार में बड़ी जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब पूरी ताकत के साथ मिशन बंगाल में जुट गई है। वाम दलों को पीछे छोड़कर पश्चिम बंगाल में विपक्ष की कुर्सी हासिल करने के बाद बीजेपी को अब वहां सत्ता की उम्मीद दिखने लगी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बंगाल की बारी पर खुलकर बयान दे चुके हैं। लेकिन इन सबके बीच पार्टी के भीतर एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है - अगला बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा और भाजपा को नया अध्यक्ष कब मिलेगा।
मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बाद अब नए चेहरे की तलाश तेज हो चुकी है और इसी रेस में एक नाम अचानक तेजी से सबसे आगे निकल आया है। वो नाम है-केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का। 63 साल की उम्र में जोशी न सिर्फ संगठन और सरकार दोनों में संतुलन रखने की क्षमता रखते हैं, बल्कि RSS की पृष्ठभूमि भी उनके पक्ष में जाती है। प्रह्लाद जोशी वे लंबे समय से संघ की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। इस तरह से वो उम्र फैक्टर और RSS फैक्टर दोनों में फिट बैठते हैं।

प्रह्लाद जोशी का संघ से राजनीति तक का सफर (Who is Pralhad Joshi)
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को हुआ था। प्रह्लाद जोशी उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्हें संघ ने शुरू से गढ़ा है। युवावस्था में वे नियमित तौर पर RSS के प्रशिक्षण शिविरों में जाते थे। 1992 से 1994 के बीच हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आंदोलन से वे पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।
यह आंदोलन उस दौर में काफी बड़ा मुद्दा बना था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मैदान का स्वामित्व नगर निगम को सौंप दिया था। इसी आंदोलन ने जोशी को कर्नाटक की राजनीति में एक पहचान दिलाई।
लगातार पांच बार सांसद, मजबूत जनाधार
प्रह्लाद जोशी 2004 से लगातार धारवाड़ लोकसभा सीट से जीतते आ रहे हैं। 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में उन्होंने जीत दर्ज की है। 2009 में तो उन्होंने कर्नाटक की 28 सीटों में दूसरी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी, जब उस वक्त कई बड़े मंत्री और सांसद चुनाव हार गए थे।
2019 में भी उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि 2024 में जीत का अंतर कुछ कम रहा, लेकिन पांचवीं बार सफलता हासिल करना अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।

सरकार में भी मजबूत पकड़
2019 में प्रह्लाद जोशी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली। जून 2024 के बाद उन्हें उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नई व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की कमान सौंपी गई। यानी वह सरकार के ऐसे विभागों को संभाल चुके हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। यही वजह है कि संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
कर्नाटक फैक्टर और RSS की पसंद
बीजेपी के अंदर यह बात भी अहम मानी जा रही है कि कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव अभी तक अटका हुआ है और वहां कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में अगर कर्नाटक से कोई नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष बनता है तो पार्टी को दक्षिण भारत में नई ऊर्जा मिल सकती है। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक से आते हैं और संघ की बैकग्राउंड के कारण नागपुर का भरोसा भी उन्हें मिलता माना जा रहा है।
परिवार और निजी जीवन
राजनीति के अलावा प्रह्लाद जोशी का निजी जीवन भी काफी सादा बताया जाता है। वे शुरुआती दिनों में एक उद्योगपति भी रहे हैं। उनकी पत्नी का नाम ज्योति जोशी है और उनकी तीन बेटियां हैं। उन्हें किताबें पढ़ने का शौक है और वे भारतीय शास्त्रीय संगीत और क्रिकेट में भी गहरी रुचि रखते हैं।

15 दिसंबर से पहले हो सकता है बड़ा ऐलान
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर मंथन अंतिम दौर में पहुंच चुका है। पहले चर्चा थी कि इस बार बीजेपी किसी ओबीसी चेहरे को कमान सौंप सकती है। इसी वजह से अब तक दर्जनभर से ज्यादा नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। बिहार चुनावों के बीच गृह मंत्री अमित शाह यह संकेत भी दे चुके हैं कि चुनाव खत्म होते ही नए अध्यक्ष का ऐलान किया जाएगा।
अब पार्टी के अंदर यह चर्चा जोरों पर है कि 15 दिसंबर से पहले ही नए अध्यक्ष के नाम से पर्दा उठ सकता है। इसके पीछे धार्मिक कैलेंडर और शुभ मुहूर्त को भी एक वजह माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद खरमास शुरू हो जाता है।
कौन-कौन हैं भाजपा अध्यक्ष की रेस में शामिल
अब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, विनोद तावड़े, निर्मला सीतारमण, डी परंदेश्वरी और वनित श्रीनिवासन जैसे कई नामों पर चर्चा हो चुकी है। लेकिन पार्टी के अंदरखाने में यह संदेश साफ है कि जोशी का नाम नेतृत्व की गुडबुक में लगातार बना हुआ है।
2026 के चुनाव और बड़ा मिशन
बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसे वक्त में चुना जाएगा जब पार्टी को 2026 की शुरुआत में कई बड़े राज्यों में चुनावों का सामना करना है। इनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम जैसे राज्य शामिल हैं। ऐसे में नेतृत्व ऐसा चेहरा चाहता है जो संगठन को नए सिरे से धार दे सके और चुनावी मोर्चे पर पार्टी को मजबूत बनाए। इसी वजह से प्रह्लाद जोशी का नाम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अब सबकी नजर अंतिम फैसले पर
फिलहाल बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। अमित शाह के बयान के बाद उम्मीद जरूर जगी थी कि जल्द ऐलान होगा, लेकिन अब तक आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
पार्टी के भीतर जिस तरह से प्रह्लाद जोशी का नाम जोर पकड़ रहा है, उससे साफ है कि अगर ओबीसी चेहरे पर सहमति नहीं बनी, तो RSS बैकग्राउंड वाला यह ब्राह्मण नेता बीजेपी की कमान संभाल सकता है। अब सबकी नजर सिर्फ उस तारीख पर टिकी है, जब इस सियासी पहेली से पर्दा उठेगा और देश को बीजेपी का नया अध्यक्ष मिलेगा।












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