Iran America War: 'भारत ही युद्ध रूकवा सकता है', ईरान ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव कचरे के डिब्बे में फेंका
Iran Vs America War: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच कूटनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। पाकिस्तान खुद को एक मुख्य मध्यस्थ (Mediator) के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से आए अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब ईरानी सूत्रों ने भारत की भूमिका पर भरोसा जताया, जबकि पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

Pakistan mediation fail: ईरान का पाकिस्तान पर अविश्वास
ईरानी सरकारी सूत्रों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में केवल अपनी "क्रेडिट हंगर" (श्रेय लेने की भूख) के कारण सक्रिय है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में किसी भी आधिकारिक बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने पाकिस्तान के उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि ईरान अमेरिकी प्रस्तावों पर सहमत हो रहा है। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान वैश्विक मंच पर खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए इस संकट का इस्तेमाल कर रहा है।
India as mediator: एक भरोसेमंद 'दोस्त देश'
सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सूत्रों ने भारत को एक "सच्चा दोस्त" करार दिया है। ईरान का कहना है कि भारत एक ऐसा देश है जिस पर वह अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान पूरी तरह भरोसा कर सकता है। ईरान की नज़र में भारत की कूटनीति संतुलित और निष्पक्ष है, जो उसे एक आदर्श मध्यस्थ या सहयोगी बनाती है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख और ईरान के साथ उसके गहरे ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।
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Iran rejects US proposal: अमेरिका का 15-सूत्रीय प्रस्ताव और इनकार
पाकिस्तान के जरिए भेजे गए अमेरिकी राष्ट्रपति के 15-सूत्रीय प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर रोक, मिसाइल सीमाएं और प्रतिबंधों में ढील जैसे बिंदु शामिल थे। हालांकि, ईरान ने इसे "धोखा" करार देते हुए ठुकरा दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि युद्ध तब खत्म होगा जब उसकी शर्तें (जैसे क्षतिपूर्ति और संप्रभुता का सम्मान) मानी जाएंगी, न कि तब जब अमेरिका या कोई मध्यस्थ इसे तय करेगा। ईरान ने पाकिस्तान की "जबरन मध्यस्थता" को फिलहाल स्वीकार करने से मना कर दिया है।
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पाकिस्तान की 'इस्लामी ब्लॉक' रणनीति
अपनी साख बचाने के लिए पाकिस्तान अब सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर एक 'इस्लामी ब्लॉक' बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान का प्रस्ताव है कि इस्लामाबाद को शांति वार्ता के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, ईरान की भारत के प्रति सकारात्मकता और पाकिस्तान के प्रति बेरुखी ने इस्लामाबाद की इन कोशिशों को तगड़ा झटका दिया है। ऐसा लगता है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दुनिया अब भारत की ओर अधिक उम्मीद से देख रही है।












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