बीफ, असहिष्णुता और अब समलैंगिकता?

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने समलैंगिकों के अध‍िकारों का समर्थन करते हुए कहा कि समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से मुक्त करने की हिमायत की। उनका समर्थन पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भी किया, लेकिन कांग्रेस ने जिस प्रकार मोर्चा खोला है, उससे साफ है कि बीफ, असहिष्णुता के बाद अब समलैंगिकता देश में चर्चा का अगला विषय बनने वाला है।

यह बात पक्की है कि केंद्र सरकार एक बार फिर से घेरे में आ जायेगी। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने इसकी शुरूआत भी कर दी है। मनीष ने ट्वीट के माध्यम से पूछा कि सरकार समलैंगिक संबंधों को तो अपराधमुक्त कर सकती है, लेकिन समलैंगिक शादियों के बारे में सरकार क्या सोचती है? मनीष तिवारी ने कहा कि अगर सरकार गंभीर है तो धारा 377 को खत्म करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के ऊपर भी बहुत दबाव था, लेकिन हमने घुटने नहीं टेके।

ध्यान भटकाने जैसा तो नहीं?

वैसे जेटली की यह चिंगारी फुलझड़ी के रूप में जली है और निश्चित रूप से यह मामला तूल पकड़ेगा। ऐसा माना जा रहा है कि लोगों का ध्यान असहिष्णुता से हटाने का इससे अच्छा विकल्प कोई नहीं हो सकता है। हालांकि समलैंगिकता के मुद्दे को उठाना भाजपा की सोची समझी रणनीति है या महज एक बयान, यह तो कहना मुश्किल है लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि इस मामले पर केंद्र को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर हिंदूवादी संगठनों की ओर से कड़ा विरोध झेलना पड़ सकता है।

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