Who is Bijendra Prasad Yadav: कौन हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव? जो बन सकते हैं बिहार के नए डिप्टी सीएम

Who is Bijendra Prasad Yadav: बिहार की राजनीति इस वक्त एक बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और उनके राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सूबे में नई सरकार के गठन की कवायद युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है।

जहां मुख्यमंत्री की रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, वहीं सत्ता के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा सुपौल के कद्दावर नेता और 'कोसी के चाणक्य' कहे जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव की है।

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चर्चा है कि नई सरकार में बिजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम (उप-मुख्यमंत्री) की जिम्मेदारी दी जा सकती है। 79 वर्षीय यादव का नाम सामने आते ही कोसी और मिथिलांचल की राजनीति में उत्साह की लहर दौड़ गई है।

कौन हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव? बिहार में रहा है विकासवादी राजनीति की पहचान

बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के उन विरले चेहरों में से हैं, जिनकी साख पक्ष और विपक्ष दोनों में समान रूप से मजबूत है। साल 1990 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे बिजेंद्र यादव ने पिछले साढ़े तीन दशकों में खुद को एक विकासवादी और जनहितैषी नेता के रूप में स्थापित किया है। उनकी प्रशासनिक पकड़ और जटिल राजनीतिक स्थितियों को सुलझाने की क्षमता उन्हें इस पद का सबसे योग्य दावेदार बनाती है।

Bihar Deputy CM Race में बिजेंद्र प्रसाद यादव आगे, क्यों कहलाते हैं 'कोसी के विश्वकर्मा'?

कोसी क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार से 'कोसी के विश्वकर्मा' कहते हैं। इसके पीछे उनकी वो दूरदर्शिता है जिसने बाढ़ और पिछड़ेपन की मार झेलने वाले कोसी और मिथिलांचल की तस्वीर बदल दी। ऊर्जा मंत्री के रूप में बिजेंद्र यादव का कार्यकाल बिहार के इतिहास में 'स्वर्ण युग' माना जाता है। बिजली संकट से जूझते बिहार को 24 घंटे बिजली की दहलीज तक पहुंचाने का श्रेय उन्हीं को जाता है।

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सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों में ग्रिड का जाल बिछाना और नए पावर सब-स्टेशनों की स्थापना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शुमार है। उन्होंने न केवल कोसी को अंधेरे से निकाला, बल्कि कोसी और मिथिलांचल को जोड़ने के लिए सड़कों और रेल मार्गों का कायाकल्प भी किया। सुपौल-मधेपुरा और सहरसा के बीच सड़कों का चौड़ीकरण और पुलों का निर्माण उनके कार्यकाल की पहचान बनी।

कोसी नदी पर बुने पुलों के जाल

कोसी नदी, जिसे कभी 'बिहार का शोक' कहा जाता था, उस पर पुलों और एप्रोच रोड का निर्माण करवाकर बिजेंद्र यादव ने दोनों किनारों के बीच की दूरी को कम किया। इन परियोजनाओं ने क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों के लिए नए बाजार खोले और आर्थिक विकास को एक नई गति दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे अनुभवी चेहरे को डिप्टी सीएम बनाना सरकार के लिए संतुलन का काम करेगा। उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है और वे नीतीश कुमार के बेहद करीबी व भरोसेमंद रहे हैं। ऐसे में कोसी क्षेत्र के इस दिग्गज नेता को नई सरकार में बड़ी भूमिका मिलना लगभग तय माना जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या 'कोसी के विश्वकर्मा' को बिहार के विकास का नया ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी जाती है।

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