Asha Bhosle Last Post: 'मैं विलीन हो जाऊंगी', निधन से पहले ही आशा ताई ने लिख दिया था 'आखिरी सच'
Asha Bhosle Death: भारतीय संगीत जगत की 'मल्लिका-ए-तरन्नुम' आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रही थीं। शनिवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ और हृदय संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार दोपहर उनके बेटे आनंद ने उनके निधन की पुष्टि की।
आशा भोसले अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ी रहती थीं। उनके ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर की गई आखिरी पोस्ट उनकी संगीत के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाती हैं।

आशा भोसले की इंस्टाग्राम पर आखिरी पोस्ट क्या थी?
आशा ताई की आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट वर्चुअल बैंड 'Gorillaz' के साथ उनके कोलैबोरेशन 'The Shadowy Light' को लेकर थी। इस पोस्ट में उन्होंने वाराणसी और गंगा नदी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा था, 'वाराणसी की यात्रा और पवित्र गंगा के किनारे चलते हुए मुझे जीवन का अर्थ समझ आया... संगीत ही मेरा नाविक है जो मुझे जीवन रूपी इस नदी के पार ले जाएगा।' उन्होंने इस पोस्ट में 'मोक्ष' प्राप्ति और प्रकृति के सुरों में विलीन होने की इच्छा भी जताई थी।
ट्विटर (X) पर आशा भोसले की आखिरी पोस्ट क्या थी?
दरअसल, 9 फरवरी, 2025 को ट्विटर पर उन्होंने अपनी आखिरी पोस्ट अपने डिजिटल डेब्यू यानी पॉडकास्ट को लेकर की थी। 91 वर्ष की आयु में उन्होंने 'Couple Of Things' पॉडकास्ट के जरिए अपनी जीवन यात्रा साझा की थी, जिसे प्रशंसकों ने खूब सराहा था।
एक नजर उनके बेमिसाल करियर पर
1933 में जन्मी आशा भोसले ने महज 9 साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था। लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने कैबरे और डांस नंबरों से लेकर 'उमराव जान' की रूहानी गजलें तक गाईं।
7 बार फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड
उन्हें 7 बार फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड और 2 बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड (दिल चीज क्या है और मेरा कुछ सामान के लिए) से नवाजा गया। अपने हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे आज भी खुद को बेहतर बनाने के लिए शास्त्रीय संगीत और भीमसेन जोशी को सुनना पसंद करती हैं।
संगीत जगत की यह चमकती लौ भले ही बुझ गई हो, लेकिन उनके हजारों गाने आने वाली कई पीढ़ियों तक उनकी उपस्थिति का अहसास कराते रहेंगे। उनका अंतिम संस्कार कल मुंबई में किया जाएगा।












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