कश्मीर के लोगों का ब्रेन वॉश कर अपना हित साध रही है हुर्रियत!
श्रीनगर। [ऋचा बाजपेई] कश्मीर पर हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी का जो ताजा बयान है, वह वाकई एक बार फिर से कश्मीर को सुर्खियों में लाने के लिए काफी है। गिलानी कहते हैं कि कश्मीर एक अंतराष्ट्रीय मुद्दा है और इसे अब सुलझाया जाना काफी जरूरी है।

यह पहला मौका नहीं है जब हुर्रियत की ओर से इस तरह की कोई बात कही गई है। हुर्रियत अक्सर ही घाटी के लोगों को बरगलाने और उन्हें देश के खिलाफ भड़काने का काम करती रहती है।
इन गर्मियों में जब मुझे श्रीनगर जाने का मौका मिला तो पता लगा कि किस कदर हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं ने घाटी के लोगों का ब्रेन वॉश कर रखा है। यहां के लोगों के दिलों में भी हुर्रियत ने अपनी उस आवाज को बुलंद करा डाला है जिसमें वह अक्सर कश्मीर को देश से अलग-थलग करने की मांग करते रहती है।
'तो इसमें गलत क्या है'
जून 2010 में कश्मीर में हुई पत्थरबाजी के बाद वहां पर जो हालात पैदा हुए उन्हें कोई भी भुला नहीं सका है। उस समय यहां पर सुरक्षाबलों पर आरोप लगा कि उन्होंने गोलीबारी में एक युवक को मार डाला है जबकि सुरक्षाबलों ने इस बात से साफ इंकार कर दिया था।
श्रीनगर के लाल चौक को यहां के एक खतरनाक इलाकों में से एक माना जाता है। इसी लाल चौक पर एक किनारे पर सूखे मेवे की दुकान चलाने वाले अब्बास खान से मैंने बात की और जानने की कोशिश की कि आखिर यहां के लोग कश्मीर के बारे में क्या राय रखते हैं।
अब्बास खान की मानें तो हुर्रियत की जो मुहिम है वह वाकई सही है। वह कहते हैं कि देश में कभी भी कश्मीरियों के हितों और उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने के बारे में कोई बात नहीं होती है। अगर हुर्रियत उनके लिए लड़ाई लड़ रही है तो गलत क्या है।
अब्बास को जून 2010 की घटना की वजह से करीब 50 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था क्योंकि जून से लेकर नवंबर माह तक घाटी के हालात इस कदर बिगड़े थे कि वहां पर न तो स्कूल खुल सके थे और न ही कोई व्यावसायिक प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सका था।
'घाटी की भलाई का काम कर रही हुर्रियत'
डल झील न सिर्फ श्रीनगर की खूबसूरती को बढ़ाती है बल्कि पर्यटन के जरिए यहां के 60 से 70 प्रतिशत युवाओं को रोजगार प्रदान कर रही है। हाउसबोट और शिकारे न सिर्फ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं बल्कि
उनके जरिए यहां के युवा सुबह से लेकर रात तक आय अर्जित करने में लगे रहते हैं। इन्हीं युवाओं में से एक हैदर। हैदर की उम्र अभी सिर्फ 25 वर्ष है और वह इस बात को मानने से भी इंकार करता है कि पाकिस्तान देश में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
मैंने उससे पूछा कि अक्सर पाक की ओर से खबरें आती हैं तो उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है? उसने जवाब दिया कि इन खबरों में कभी कोई सच्चाई नजर नहीं आती है। हैदर की मानें तो जो काम हुर्रियत कर रही है वह तो घाटी के लोगों की भलाई के लिए ही है।
हैदर तो इस बात को भी कहने से नहीं हिचके कि जो अमरनाथ यात्रा हर वर्ष होती है उसे बंद किया जाए और साथ ही घाटी में तैनात सेना को भी तुरंत वापस बुलाया जाए।












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