US Iran War Impact: LPG-Petrol के बाद ईरान बंद करेगा दुनिया का इंटरनेट? भारत में ये सेक्टर होंगे ठप!

US Iran War Impact: अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई रोककर दुनिया के सामने बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन अब एक और बड़ा खतरा सामने आ रहा है। इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के कई महत्वपूर्ण सबसी (समुद्र के नीचे बिछे) इंटरनेट केबल भी गुजरते हैं। अगर इन केबलों को नुकसान होता है, तो भारत समेत कई देशों में इंटरनेट ठप हो सकता है।

क्या ईरान इंटरनेट भी काट सकता है?

अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और इसके खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे। इसी बीच एक नई चिंता उभर रही है कि क्या ईरान सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि इंटरनेट को भी निशाना बना सकता है? क्योंकि अब युद्ध के दूसरे चरण में ऊर्जा ठिकानों पर हमले शुरू हो चुके हैं। जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के ऊर्जा और कमाई के संसाधनों पर बमबारी कर रहे हैं।

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हॉर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब पर भी खतरा

हॉर्मुज के अवरुद्ध होने से लाल सागर के बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर भी खतरा बढ़ गया है। यहां ईरान समर्थित हूती हमले कर सकते हैं। ये दोनों समुद्री रास्ते सिर्फ तेल के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के इंटरनेट के लिए भी बेहद अहम हैं, क्योंकि यहीं से समुद्र के नीचे केबल गुजरते हैं।

माइन बिछाने से शिपिंग पूरी तरह ठप

ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइन (बारूदी सुरंगें) बिछा दी हैं। इसके चलते शिपिंग कंपनियों और बीमा कंपनियों ने इस रूट पर आवाजाही रोक दी है। जब तक यह रास्ता सुरक्षित घोषित नहीं होता, तब तक जहाजों का चलना मुश्किल है।

लाल सागर में हूतियों के हमले

लाल सागर में यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों पर हमले कर रहे हैं, जिससे यह इलाका और ज्यादा खतरनाक बन गया है। यह जलमार्ग बहुत संकरा है, और इसके नीचे से ही हजारों किलोमीटर लंबे इंटरनेट केबल गुजरते हैं। हूथी विद्रोही बस ईरान से सिग्नल मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

समुद्र के नीचे फैला इंटरनेट का जाल

ये फाइबर-ऑप्टिक केबल दुनिया के इंटरनेट का असली नेटवर्क हैं। इन्हीं के जरिए वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और AI सेवाएं चलती हैं। यानी अगर ये केबल कटते हैं, तो पूरी दुनिया की डिजिटल लाइफ प्रभावित हो सकती है।

लाल सागर से गुजरते हैं 17 बड़े केबल

कैपेसिटी ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल सागर के नीचे से 17 बड़े सबमरीन केबल गुजरते हैं। ये केबल यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ते हैं और इन क्षेत्रों के बीच इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा इन्हीं से जाता है।

हॉर्मुज से गुजरने वाले अहम केबल

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले केबल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। टेलीज्योग्राफी की रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी में AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International Cable System और Tata-TGN Gulf जैसे बड़े केबल सक्रिय हैं। ये भारत की इंटरनेशनल इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं।

टेक कंपनियों का अरबों डॉलर दांव पर

Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने यूएई और सऊदी अरब में डेटा सेंटर बनाने के लिए अरबों डॉलर निवेश किए हैं। उनका मकसद इस क्षेत्र को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बड़ा हब बनाना है। ये सभी सेंटर समुद्री केबलों पर निर्भर हैं।

मरम्मत लगभग नामुमकिन

दोनों जलमार्गों के असुरक्षित होने की वजह से अगर कोई केबल टूटता है, तो उसे ठीक करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। केबल रिपेयर करने वाले खास जहाज इन इलाकों में नहीं जा सकते क्योंकि वहां युद्ध चल रहा है।

एक हादसा और महीनों तक बंद इंटरनेट

अगर कोई माइन फटती है, हमला होता है या जानबूझकर केबल काट दिए जाते हैं, तो ये लाइन्स हफ्तों या महीनों तक बंद रह सकती हैं। इसका असर पूरी दुनिया के इंटरनेट पर पड़ेगा।

2024 में भी दिखा था असर

2024 में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान हूतियों के हमलों से लाल सागर के कई केबल प्रभावित हुए थे। इसका असर एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में इंटरनेट स्पीड पर पड़ा था, और मरम्मत में महीनों लग गए थे।

दोनों चोक पॉइंट बंद हुए तो तबाही

इंटरनेट एनालिस्ट डग मैडोरी ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज और बाब-अल-मंडेब दोनों बंद हो जाते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी समस्या बन जाएगी। इसे "विनाशकारी घटना" तक कहा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में पानी की गहराई सिर्फ 200 फीट है। इसका मतलब है कि केबल काफी उथले पानी में हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाना ज्यादा आसान है।

ईरान की अंडरवॉटर क्षमता

भले ही ईरान के कुछ नौसैनिक जहाज नष्ट हो गए हों, लेकिन उसके पास पानी के नीचे काम करने वाली टीमें और एक शैडो फ्लीट अब भी मौजूद है। यानी तकनीकी रूप से वह केबल को निशाना बना सकता है। मतलब ईरान जब चाहेगा तब इन केबल को काट सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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