Khamenei Death: खामेनेई की मौत पर शशि थरूर का 'विस्फोटक' बयान, मोदी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप, सियासी भूचाल!
Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भारतीय राजनीति में बयानबाजी का दौर गरमा गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार की 'खामोशी' और प्रतिक्रिया में हुई देरी पर कड़े सवाल उठाए हैं। थरूर का तर्क है कि कूटनीतिक शिष्टाचार के नाते भारत को तत्काल शोक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, जैसा कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के समय किया गया था।
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच थरूर का यह रुख मोदी सरकार की 'संतुलन साधने की कूटनीति' पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। जहां विपक्ष इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विफलता देख रहा है, वहीं सरकार के लिए इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच यह एक जटिल परीक्षा बन गई है।

Shashi Tharoor on Khamenei Death: शोक संदेश में देरी पर सवाल
शशि थरूर ने भारत की कूटनीतिक 'चुप्पी' को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि अयातुल्ला खामेनेई का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि ईरान के साथ भारत के गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों की एक अहम कड़ी है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर मानवीय संवेदनाएं और औपचारिक शिष्टाचार किसी भी भू-राजनीतिक दबाव या गठबंधन की तुलना में अधिक वजन रखते हैं।
थरूर के अनुसार, शोक संदेश भेजने में की गई हिचकिचाहट वैश्विक स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर की छवि को धूमिल कर सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि कूटनीति में समय का बहुत महत्व होता है; देरी अक्सर अनिर्णय या पक्षपात का संकेत दे जाती है, जिसे एक परिपक्व राष्ट्र के रूप में भारत को टालना चाहिए था।
Ayatollah Khamenei Death News: पुरानी घटना का दिया हवाला
अपने तर्क को मजबूती देने के लिए थरूर ने साल 2024 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तब भारत सरकार ने तुरंत राजकीय शोक की घोषणा की थी। थरूर का मानना है कि खामेनेई के मामले में भी वैसी ही सक्रियता दिखानी चाहिए थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि बाद में विदेश सचिव को शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर के लिए भेजा गया।
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Iran America War Update: निंदा और शोक के बीच अंतर
कांग्रेस नेता ने कूटनीति के एक बारीक पहलू को समझाया। उन्होंने कहा कि भारत भले ही अमेरिका या इस्राइल के हमलों की निंदा न करे (राजनीतिक मजबूरियों के कारण), लेकिन शोक जताना एक अलग मानवीय प्रक्रिया है। शोक व्यक्त करना किसी हमले का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि दुख की घड़ी में सहानुभूति दिखाना है। थरूर के मुताबिक, एक परिपक्व राष्ट्र के रूप में भारत को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए था।
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संयम और राष्ट्रीय हित की सलाह
लेख और पार्टी स्टैंड पर बात करते हुए थरूर ने कहा कि तनावपूर्ण समय में 'संयम' बरतना कमजोरी नहीं बल्कि ताकत की निशानी है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच देश के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। थरूर ने जोर दिया कि विपक्ष एक नैतिक स्टैंड ले सकता है, लेकिन सरकार को बहुत सावधानी और संतुलन के साथ कदम उठाने चाहिए ताकि भारत के रणनीतिक हित सुरक्षित रहें और किसी भी पक्ष से रिश्ते न बिगड़ें।
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