US Iran War: ईरान के हमलों के आगे बेबस Trump, हटाना पड़ा 100 साल पुराना कानून, अमेरिका में तेल-गैस की किल्लत?
US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने देश के भीतर तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान की ढुलाई को सस्ता और आसान बनाने के लिए एक सदी पुराने शिपिंग कानून को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस फैसले के तहत अगले 60 दिनों के लिए ऐसे जहाजों को अमेरिकी बंदरगाहों के बीच सामान ले जाने की अनुमति मिल गई है जो अमेरिका के नहीं हैं या जिनका मालिक अमेरिकी नहीं है। लेकिन क्यों पड़ी ये जरूरत आइए समझते हैं।
अमेरिका में रुक गई थी तेल-गैस की सप्लाई?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने एक्स (पहले ट्विटर) पर बताया कि यह कदम तेल, नैचुरल गैस, खाद और कोयले जैसे जरूरी संसाधनों को 60 दिनों तक अमेरिकी बंदरगाहों तक आसानी से पहुंचने देगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है। अमेरिका में अभी तक किल्लत नहीं है लेकिन हालात सामान्य नहीं कहे जा सकते।

जोन्स एक्ट क्या है?
जोन्स एक्ट, जिसे आधिकारिक तौर पर Merchant Marine Act of 1920 कहा जाता है, 1920 में बनाया गया था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन यू-बोट्स द्वारा अमेरिकी व्यापारिक जहाजों को भारी नुकसान पहुंचाने के बाद, अमेरिका ने अपने शिपिंग उद्योग को मजबूत करने के लिए यह कानून पास किया था। इसे वाशिंगटन राज्य के सीनेटर Wesley Jones ने प्रस्तावित किया था। उन्ही के नाम पर इसे जोन्स एक्ट कहते हैं।
जोन्स एक्ट के नियम क्या कहते हैं?
इस कानून के तहत, अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक माल या यात्रियों को ले जाने वाला जहाज अमेरिका में बना होना चाहिए, उसका मालिक अमेरिकी नागरिक होना चाहिए और उसका चालक दल भी ज्यादातर अमेरिकी होना चाहिए। इसका मतलब है कि विदेशी जहाजों को घरेलू शिपिंग में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होती।
अभी क्यों हटाया गया यह कानून?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बाद से तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची है। Strait of Hormuz, जो दुनिया का एक अहम तेल मार्ग है, वहां टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे मिडिल-ईस्ट से तेल निर्यात पर असर पड़ा है। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स, कंप्यूटर चिप्स और अन्य जरूरी सामान ले जाने वाले जहाजों में भी देरी हो रही है या उन पर हमले हो रहे हैं।
तेल और पेट्रोल की कीमतों में बड़ा उछाल
इस संकट के कारण तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो युद्ध से पहले करीब 70 डॉलर थी। वहीं अमेरिकी क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 3.84 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो पहले से 86 सेंट (25% से ज्यादा) ज्यादा है।
विदेशी जहाजों के आने से क्या होगा?
अब जब सप्लाई चेन पर दबाव है, तो अमेरिका नए विकल्प तलाश रहा है। विदेशी जहाजों को घरेलू बंदरगाहों के बीच तेल और गैस ले जाने की अनुमति देकर सरकार ट्रांसपोर्ट लागत कम करना और सप्लाई बढ़ाना चाहती है। यह छूट उर्वरकों पर भी लागू होगी, जिनकी इस समय खेती के सीजन में काफी मांग है।
फैसले पर उठे सवाल
हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। American Maritime Partnership, जो अमेरिकी जहाज मालिकों और यूनियनों का प्रतिनिधित्व करता है, ने कहा कि 60 दिनों की यह छूट अमेरिकी कंपनियों और मजदूरों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका कहना है कि इससे ईंधन की कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
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