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बिहार में अब तटबंध घोटाला, लगभग 3600 करोड़ के प्रोजेक्ट में हेराफेरी करने वाले ही बने जांच अधिकारी!

By Gaurav Dwivedi
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    पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा बिहार की छवि सुधारने की कोशिश की जा रही है लेकिन दिन पे दिन बिहार घोटालेबाजों का अखाड़ा बनता जा रहा है। एक पर एक ऐसे मामले सामने आए हैं जिसने मौजूदा सरकार की नींद उड़ा दी है। हाल-फिलहाल बिहार में सामने आया चर्चित सृजन घोटाला, शौचालय घोटाले का मामला अभी तक ठंडा नहीं पड़ा की उसी तरह एक और करोड़ों का घोटाला सामने आ रहा है। घोटाला तटबंध निर्माण कार्य से संबंधित है, जिसमें 3608 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी तटबंधों की हालत बेहद खराब है। इस मामले को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में मामला दर्ज किया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि लगातार पैसे खर्च करने के बाद भी तटबंधों की हालत क्यों खराब है। जिसकी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने का आदेश दिया। फिलहाल इस मामले में 72 अधिकारी जांच कर रहे हैं।

    मामले की 72 अधिकारी कर रहे हैं जांच

    मामले की 72 अधिकारी कर रहे हैं जांच

    मामला बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर जिले का है, जहां के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवेश भारती ने पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए गए है। जिसके बाद जल संसाधन विभाग की कुल 7 टीम के 72 अधिकारी सीतामढ़ी जिले और शिवहर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच में लगे हुए हैं।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने उजागर किया मामला

    सामाजिक कार्यकर्ता ने उजागर किया मामला

    जानकारी के मुताबिक पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने एचएससीएल कंपनी पर ये आरोप लगाया था कि तटबंध निर्माण कार्य में विभागीय दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया गया है और मनमानी तरीके से तटबंध का निर्माण करवाया गया है। जिसमें तकरीबन एक हजार करोड़ के घोटाले की संभावना है। तटबंध निर्माण कार्य का निविदा वर्ष 2002 में प्रकाशित किया गया था। जिसमें 793 करोड़ रुपए की लागत से तटबंध का निर्माण पूरा किया जाना था लेकिन फिर से 2012 में उसी निर्माण कार्य की निविदा द्वारा प्रकाशित की गई और पून: निविदा कर उसकी लागत 3608 करोड़ रुपए कर दिया गया।

    जल संसाधन विभाग पर है आरोप, वहीं है जांचकर्ता

    जल संसाधन विभाग पर है आरोप, वहीं है जांचकर्ता

    हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवेश भारती ने आरोप लगाते हुए कहां की इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराना चाहिए क्योंकि जल संसाधन विभाग के अधिकारी ही मामले की जांच कमेटी में हैं और जांच के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है। हकीकत तो ये है कि अब तक स्पॉट वेरिफिकेशन भी नहीं किया गया है।

    बाढ़ की तबाही पर राहत का था रास्ता

    बाढ़ की तबाही पर राहत का था रास्ता

    आपको बता दें कि इस बार बिहार में आई प्रलयकारी बाढ़ ने बिहार के सीतामढ़ी जिले में जमकर तबाही मचाई थी। जिसके कारण पांच जगहों पर तटबंध टूट गया था और जान माल को काफी नुकसान हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ कि यहां गलत निर्माण कार्य कराया गया था। कई जगहों पर तटबंध बालू की रेत की तरह ढह गया, जिसे लोगों ने अपनी आंखों से देखा था।

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    English summary
    Bihar scam in Coast construction, 3600 crores project been investigated

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