Air India Express की फ्लाइट में आई खराबी, 133 यात्रियों की सांसे अटकी, याद आया 158 मौतों वाला पल!
Air India Express Flight Hard Landing In Phuket: थाईलैंड के फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आज (11 मार्च 2026) की सुबह एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX938 की हार्ड लैंडिंग हुई, जिससे विमान का नोज व्हील क्षतिग्रस्त हो गया। हैदराबाद से उड़ान भरने वाली इस बोइंग 737 मैक्स 8 में 133 यात्री सवार थे, लेकिन सभी सुरक्षित हैं।
घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, और लोगों को 2010 के मंगलौर हादसे की याद दिला दी, जहां 158 लोगों की मौत हुई थी। आइए, इस घटना को विस्तार से समझते हैं...

क्या हुआ घटना में?
फ्लाइट IX938 हैदराबाद से सुबह 6:42 बजे रवाना हुई (शेड्यूल 6:20 बजे था) और स्थानीय समयानुसार सुबह 11:40 बजे फुकेत के रनवे 09 पर उतरी। लैंडिंग के दौरान विमान तेजी से जमीन से टकराया, जिसे 'हार्ड लैंडिंग' कहा जाता है। विमान का आगे का लैंडिंग गियर (नोज गियर) टूट गया, और दोनों नोज व्हील अलग हो गए। विमान रनवे पर फंस गया, जिससे एयरपोर्ट का संचालन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। अधिकारियों ने NOTAM जारी कर रनवे को शाम 6 बजे तक बंद रखा।
सभी 133 यात्रियों और क्रू को सुरक्षित उतार लिया गया। किसी को चोट नहीं आई। उन्हें टर्मिनल में ले जाया गया, और एयरलाइन ने वैकल्पिक व्यवस्था की। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैंडिंग के समय विमान की ऊर्ध्वाधर गति (डिसेंट रेट) ज्यादा थी - सामान्य से ज्यादा 600 फीट प्रति मिनट। DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विमान के नोज व्हील 8 मार्च को ही मेंटेनेंस में बदले गए थे। थाईलैंड के विमानन अधिकारियों के साथ जांच शुरू हो गई है। एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा, 'चालक दल ने सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल फॉलो किए। हम यात्रियों और अधिकारियों का सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं।'
What Is Flight Hard Landing: क्या होती है 'हार्ड लैंडिंग'?
विमानन में हार्ड लैंडिंग एक अनियोजित लैंडिंग होती है, जहां विमान तेज ऊर्ध्वाधर बल के साथ रनवे से टकराता है। सामान्य लैंडिंग में डिसेंट रेट 100-300 फीट प्रति मिनट होती है, लेकिन हार्ड लैंडिंग में यह 600 फीट से ज्यादा हो जाती है। इससे लैंडिंग गियर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो टूट सकता है। कारण हो सकते हैं:-
- मौसम की खराबी (जैसे तेज हवा या टर्बुलेंस)
- पायलट एरर या तकनीकी गड़बड़ी
- विमान का वजन या स्पीड मिसकैलकुलेशन
इस घटना में विमान रनवे पर फिसला, लेकिन क्रू की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।
What Is Flight Nose Wheel: नोज व्हील क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
नोज व्हील विमान के लैंडिंग गियर का आगे वाला हिस्सा है, जो विमान की 'नाक' के नीचे लगा होता है। आधुनिक विमानों में ट्राइसाइकिल सिस्टम होता है:- 1 नोज व्हील और 2 मेन गियर (पंखों के नीचे)। मुख्य काम क्या है?
- दिशा नियंत्रण: रनवे पर चलते समय पायलट रडर पैडल से इसे मोड़कर विमान को घुमाते हैं।
- संतुलन और शॉक अब्जॉर्ब: लैंडिंग के झटके को सहता है और विमान को स्थिर रखता है।
- टेकऑफ में मदद: उड़ान भरते समय नाक ऊपर उठाने में सहायता।
- टैक्सीइंग: एयरपोर्ट पर धीरे चलने में जरूरी।
अगर खराब हो जाए तो?
- विमान मुड़ नहीं पाता, रनवे से फिसल सकता है।
- लैंडिंग में नाक रगड़ सकती है, आग लगने का खतरा।
- इमरजेंसी में पायलट पहले मेन गियर उतारते हैं, फिर धीरे से नोज।
इस हादसे में नोज गियर टूटने से विमान फंस गया, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
याद आया पुराना हादसा
यह घटना 2010 के मंगलौर हादसे की याद दिलाती है, जहां एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX812 की हार्ड लैंडिंग से 158 मौतें हुईं। उस समय रनवे से बाहर गिरने से आग लगी थी। आज की घटना में सौभाग्य से सब सुरक्षित रहे, लेकिन यह विमानन सुरक्षा की याद दिलाती है।
एयरलाइन और DGCA जांच कर रहे हैं। यात्रियों को सलाह है कि फ्लाइट स्टेटस चेक करें। अगर आप विमानन से जुड़े हैं, तो क्या लगता है - क्या कारण हो सकता है? कमेंट में बताएं।












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