कैसे काम करती है प्रश्न कुंडली, किस भाव से क्या देखा जाना चाहिए
नई दिल्ली, 27 जुलाई। ज्योतिष शास्त्र में प्रश्न कुंडली का भी बड़ा महत्व होता है। कई जातकों को अपनी जन्मतिथि, जन्म समय या जन्म स्थान सही-सही ज्ञात नहीं होता है, ऐसे में उनके प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रश्न कुंडली ही एकमात्र साधन होता है। प्रश्न कुंडली का मुख्यत: उपयोग किसी तात्कालिक प्रश्न का उत्तर जानने के लिए किया जाता है। जिस समय किसी कार्य के लाभालाभ, शुभाशुभ जानने की इच्छा हो उस समय की प्रश्न कुंडली बनाकर ग्रहस्पष्ट, भाव स्पष्ट, नवमांश कुंडली और चलित कुंडली बनाकर प्रश्न का उत्तर खोजा जाता है।

ये हैं तीन स्थितियां
- प्रश्न लग्न में चरराशि, बलवान लग्नेश, कार्येश शुभग्रहों से युत या दृष्ट हो तथा वे 1, 4, 5, 7, 9, 10वें स्थानों में हों तो प्रश्नकर्ता जिस कार्य के संबंध में पूछ रहा हो वह शीघ्र पूरा होगा ऐसा जानना चाहिए।
- यदि स्थिर लग्न हो, लग्नेश और कार्येश बलवान हों तो कार्य में विलंब होता है।
- द्विस्वभाव राशि लग्न में हो तथा 1, 4, 5, 7, 9, 10वें स्थानों में बलवान पापग्रह हों, लग्नेश, कार्येश बलहीन, नीच, अस्तगत या शत्रुक्षेत्री हों तो कार्य सफल नहीं होता।
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किस भाव से क्या विचार
- धन प्राप्ति के प्रश्न में लग्न-लग्नेश, धन-धनेश और चंद्र से।
- यश प्राप्ति के लिए लग्न, तृतीय, दशम और इसके स्वामी तथा चंद्र से।
- सुख, शांति, गृह, भूमि आदि की प्राप्ति के प्रश्न में लग्न, चतुर्थ, दशम, इनके स्वामी और चंद्र से।
- परीक्षा में सफलता के लिए लग्न, पंचम, नवम, दशम स्थान, इनके स्वामी और चंद्र से।
- विवाह संबंधी प्रश्न के लिए लग्न, द्वितीय, सप्तम और इनके स्वामी तथा चंद्र से।
- नौकरी-व्यवसाय, मुकदमा संबंधी प्रश्न के लिए लग्न-लग्नेश, दशम-दशमेश, एकादश-एकादशेश और चंद्र से।
- बड़े व्यापार के लिए लग्न-लग्नेश, द्वितीय-द्वितीयशेश, सप्तम-सप्तमेश, दशम-दशमेश, एकादश-एकादशेश और चंद्र से।
- लाभ के लिए लग्न-लग्नेश, एकादश-एकादशेश और चंद्र से।
- संतान प्राप्ति के लिए लग्न-लग्नेश, द्वितीय-द्वितीयशेश, पंचम-पंचमेश और गुरु से विचार किया जाता है।












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