Hariyali Teej 2022: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री
नई दिल्ली, 31 जुलाई। सावन का महीना व्रत, त्योहारों का पर्व होता है इसलिए इस महीने का लोग बेताबी से इंतजार भी करते हैं। यूं तो सावन के हर पर्व का अपना महत्व होता है लेकिन 'हरियाली तीज' के खास मायने होते हैं। सेवा, समर्पण, प्रेम और त्याग का प्रतीक ये व्रत आज है। कहते हैं कि इसी दिन लंबे तप और व्रत के बाद मां पार्वती का मिलन दोबोरा से प्रभु भोलेनाथ से हुआ था। इसलिए माना जाता है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी हमेशा एक बंधन में बंधे रहते हैं और कोई भी ताकत उन्हें अलग नहीं कर सकती है।
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वैसे ये व्रत पति की लंबी उम्र के लिए भी रखा जाता है। मालूम हो कि सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'हरियाली तीज' का पर्व मनाया जाता है। सावन पर्व में चारों और हरियाली ही हरियाली रहती है इसलिए इसका नाम 'हरियाली तीज' है। इसे 'सावन की तीज' या 'कजली तीज' या 'सिंजारा तीज' भी कहते हैं। ये मूल रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और हरियाणा में मनाई जाती है।
हरियाली तीज 2022 शुभ मुहूर्त-
- तृतीया तिथि प्रारम्भ - जुलाई 31, 2022 को 02:59 ए एम बजे
- तृतीया तिथि समाप्त - अगस्त 01, 2022 को 04:18 ए एम बजे।
तीज का पर्व तो पूरे दिन ही रहेगा इसलिए अगर आप विशेष समय में व्रत नहीं कर पाए तो 31 जुलाई को 2:59 am के बाद कभी भी पूजा कर सकते हैं।
पूजा सामग्री
भगवान शिव, माता पार्वती की मूर्ति के लिए मिट्टी, चौकी, आम का पल्लव, पीला या लाल वस्त्र , शृंगार का सामान , चंदन, गाय का दूध, गंगाजल, दही, चीनी, शहद, पंचामृत
पूजाविधि
ये व्रत काफी कठिन माना जाता है। इसमें महिलाएं सुबह से शाम तक बिना पानी के व्रत रहती हैं और शाम को शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करने और चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। इस पूजा में विशेष रूप से सत्तू का प्रयोग किया जाता है। सत्तू के ही गोल-गोल लड्डू बनते हैं, जिनका भोग लगाया जाता है और इसी भोग से व्रत खोला जाता है। महिलाएं 16 शृंगार करके अपने पति के लिए व्रत रखती हैं, फिर शाम को पूजा करके चांद को अर्ध्य देती हैं और उसके बाद पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।












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