'दीवान दा' का निधन, जानिए कौन थे कुमाऊनी लोकगायक दीवान कनवाल, 65 वर्ष में ली अंतिम सांस
'Diwan Da' passes away कुमाऊनी लोकगीतों के गायक और सांस्कृतिक कर्मी दीवान कनवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह करीब 65 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से अल्मोड़ा सहित पूरे प्रदेश शोक की लहर दौड़ गई है।
खत्याड़ी गांव निवासी दीवान कनवाल, जिन्हें लोग स्नेह से 'दीवान दा' के नाम से जानते थे, पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हाल ही में उनका ऑपरेशन भी हुआ था।

उपचार के बाद वह कुछ दिन पहले ही अपने घर लौटे थे, लेकिन बुधवार सुबह अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। दीवान कनवाल कुमाऊनी लोकसंगीत की दुनिया का जाना-पहचाना नाम थे। उनकी मधुर और कर्णप्रिय आवाज ने लंबे समय तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया।
उनके लोकप्रिय गीतों में 'दाज्यु हमार जवाई रिषे ग्ये', 'आज कुछे मैत जा', 'कस भिड़े कुनई पंडित ज्यू कस करछा ब्या' और 'ह्यू भरी डाना' जैसे कई गीत शामिल हैं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा और आज भी गुनगुनाया जाता है। करीब 35 वर्षों से अधिक समय तक उन्होंने कुमाऊनी लोकसंस्कृति की सेवा की और अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनके निधन से कुमाऊँनी लोकसंगीत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
दीवान दा व लोकगायक अजय ढौडिंयाल की जोड़ी सदाबहार थी। उन्होंने कई हिट गीत एक साथ गाये। उनकी जोड़ी को अजय दीवान के नाम से पसंद किया जा रहा था। लोकगायक अजय ढौडिंयाल ने कहा कि दीवान कनवाल का निधन उत्तराखण्ड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
दीवान कनवाल अपने पीछे वृद्ध माता, दो विवाहित पुत्रों और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर बाद बेतालेश्वर घाट में किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान कनवाल ने उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।












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