गोवा में बार-बार क्यों टूट जाती है कांग्रेस?
एक बार फिर कांग्रेस में बगावत हुई है। खबर है कि गोवा में कांग्रेस के 11 विधायकों में से सात या आठ विधायक भाजपा के पाले में जाने के लिए तैयार हैं। 2014 में भाजपा के केंद्र में सत्ता में आने के बाद से पूरे देश में कांग्रेस के विधायक और सांसद अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ समय-समय पर बगावत करते रहे हैं, लेकिन गोवा कांग्रेस का एक ऐसा राज्य बन गया है जहां बार-बार कांग्रेस के विधायक अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लेते हैं।

गोवा में मनोहर पर्रीकर भाजपा के सबसे बड़े नेता थे। जब तक मनोहर पर्रीकर रहे, भाजपा गोवा को लेकर निश्चिंत थी। मोदी सरकार में रक्षा मंत्री बनकर जब पर्रीकर दिल्ली आ गये तब गोवा में भाजपा की रक्षा करने वाला कोई नेता नहीं बचा। पर्रीकर का मन दिल्ली में कम और गोवा में ज्यादा लगता था। गोवा के लोग भी अपने मनोहर को दिल्ली में नहीं बल्कि पणजी में देखना चाहते थे।
इस कारण मोदी और शाह को गोवा की रक्षा करने के लिए मनोहर पर्रीकर को वापस भेजने का निर्णय लेना पड़ा। लेकिन 17 मार्च 2019 को मनोहर पर्रीकर के असामयिक निधन के बाद गोवा भाजपा आपसी खींचतान में बुरी तरह बंट गई। भाजपा के लिए गोवा संभालना कितना मुश्किल था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पर्रीकर के निधन के अगले ही दिन 19 मार्च की आधी रात को प्रमोद सांवत को नए मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी गई।
सरकार बचाने के लिए भाजपा ने उपमुख्यमंत्री के दो पद भी बनाये, ताकि एमजीएम के सुदिन धवलीकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई सरकार को गिराने की कोशिश ना करें। पर्रीकर के निधन के बाद भाजपा के कई विधायक मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन भाजपा हाईकमान ने नीलेश कबराल और विश्वजीत राणे सरीखे तपे तपाए नेताओं को दरकिनार कर प्रमोद सावंत को मुख्यमंत्री बनाया।
पर्रीकर की मौत के बाद भाजपा को इस बात का डर था कि गोवा की भाजपा सरकार कभी भी गिर सकती है, क्योकि सरकार सहयोगियों के सहारे चल रही थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 18 सीटें जीती थी और भाजपा को 13 सीटें मिली थी। उस समय कांग्रेस 3 अन्य विधायकों का समर्थन नहीं जुटा सकी और बहुमत से काफी पीछे रहने के बाद भी भाजपा ने छोटे दलों के सहारे बहुमत जुटाकर सरकार बना ली थी।
महाराष्ट्र से सटे गोवा जैसे छोटे राज्य में भाजपा को मजबूत करने के लिए अमित शाह ने कांग्रेस को तोड़ने और भाजपा से जोड़ने की रणनीति बनाई। कांग्रेस आलाकमान का गोवा पर आंखे मूद लेने और शाह का गोवा में आंखे गड़ा देने का परिणाम यह हुआ कि 2019 में विपक्ष के तत्कालीन नेता चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में कांग्रेस के 10 विधायकों का एक समूह पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गया जिसके कारण भाजपा की सरकार को मजबूत आधार मिल गया और सहयोगी दलों पर निर्भरता कम हो गई।
गौरतलब है कि गोवा में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 40 सदस्यीय सदन में 18 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद सरकार बनाना तो दूर 2019 में कांग्रेस अपने विधायकों को नहीं बचा सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि 2022 आते-आते कांग्रेस में केवल प्रताप सिंह राणे और दिगम्बर कामत दो विधायक बचे थे। ये दोनों भी शायद इसलिए बचे क्योंकि दोनों कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।
विधायकों के लगातार पलायन करने के कारण गोवा कांग्रेस की कमर टूट गई। इस कारण 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा मनोहर पर्रीकर के न होने के बाद भी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही। भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव मे 40 में से 20 सीटें जीत ली। भाजपा की इस जीत में दूसरे दलों से, खासकर कांग्रेस से आए नेताओं का योगदान ज्यादा था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा ने 40 मे से 33 सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतारे जो बीते पांच साल के अंदर भाजपा में शामिल हुए थे।
विधायकों के लगातार पलायन करने के बाद भी कांग्रेस ने 2022 के चुनाव में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। जिस कांग्रेस के 17 में से सिर्फ 2 विधायक पार्टी मे बचे थे, उस कांग्रेस ने 2022 के चुनाव में 11 सीटें जीत कर बता दिया कि गोवा को कांग्रेस मुक्त करना आसान नहीं है। लेकिन 11 सीटें जीतने के बाद भी गोवा में कांग्रेस के विधायक कांग्रेस के साथ क्यो नहीं रहना चाहते, यह कांग्रेस हाईकमान के लिए एक रहस्य है। पूरे देश में कांग्रेस के विधायक इतने जल्दी और बार बार नहीं टूटे जितने गोवा में।
गोवा कांग्रेस विधायकों में ताजा बगावत बताती है कि गोवा में भाजपा के लिए कांग्रेस एक चुनौती बनी हुई है और बिना कांग्रेस को तोड़े भाजपा के लिए गोवा में अपनी सरकार सुरक्षित करना संभव नहीं है। ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि गोवा में कांग्रेस कब तक टूटती रहेगी और भाजपा कब तक कांग्रेस को तोड़कर गोवा में राज करती रहेगी?
एक दल अपने विधायकों को बचा नहीं पा रहा है और दूसरा दल अपने दम पर सरकार बना नहीं पा रहा है। गोवा जैसे छोटे राज्य की राजनीति में दोनों दलों के लिए बड़े संकेत छिपे हैं। फिलहाल गोवा की राजनीति देखकर लगता है कि गोवा की जनता कांग्रेस को चुनाव में मरने नहीं देगी और भाजपा चुनाव के बाद कांग्रेस को जीने नहीं देगी।
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(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)
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