US India Relation: दिग्गी राजा ने भारत और अमेरिका संबंधों पर उठाए ये 4 सवाल, मोदी सरकार पर बोला तीखा वार
US India Relation: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस हमलावर रही है। अब हालिया रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट के बाद पार्टी के सीनियर लीडर्स मोदी सरकार पर हमलावर हैं। सांसद दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पोस्ट में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों और हाल के कुछ अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर सवाल उठाया है।
कांग्रेस के सीनियर लीडर ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर निशाना साधा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा कि हाल के दिनों में अमेरिका के कुछ बयान और कदम भारत की संप्रभुता और रणनीतिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लेंडौ के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ वही गलती नहीं करेगा, जो उसने दो दशक पहले चीन के साथ की थीं।

US India Relation: अमेरिका के ऐलान पर मांगा सरकार से जवाब
सिंह ने इस बयान को भारत की संप्रभुता पर खतरा बताते हुए कहा कि इससे ऐसा संदेश जाता है मानो अमेरिका भारत के आर्थिक और रणनीतिक उभार को सीमित रखना चाहता है। कांग्रेस नेता ने अमेरिका के आर्थिक सचिव स्कॉट बेसेंट के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे रहा है। सिंह ने इस भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत जैसे बड़े देश को किसी अन्य देश से अनुमति लेने की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए। उन्होंने इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति से जुड़ा मुद्दा बताया।
इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें भारतीय जलक्षेत्र के पास एक ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा निशाना बनाए जाने का दावा किया गया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है और भारत को इसकी जानकारी नहीं दी गई, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।
Digvijay Singh ने मोदी सरकार पर लगाया राष्ट्रहित से समझौते का आरोप
दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में भारत को अपनी संप्रभुता और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख और जवाब देने की मांग की। हालांकि, सरकार या अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस पोस्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान भारत-अमेरिका संबंधों और विदेश नीति पर घरेलू राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।












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