क्या जिंदा है खामेनेई? दुनिया को दिया गया धोखा? पूर्व जासूस का दावा- 2-3 लोगों को पता है सुप्रीम लीडर कहां हैं
Ayatollah Ali Khamenei Is Alive and Safe: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच अब एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। पूर्व भारतीय जासूस लकी बिष्ट ने कहा है कि खामेनेई के मारे जाने की खबरें पूरी तरह सही नहीं भी हो सकती हैं और संभव है कि वे अभी भी जिंदा और सुरक्षित हों। उनका दावा है कि ईरान में शायद सिर्फ दो या तीन लोगों को ही पता होगा कि खामेनेई इस समय कहां हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध अपने नौवें दिन में पहुंच चुका है और पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 फरवरी को ये खबर आई थी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। खुद ईरान ने भी उनकी मौत पर 40 दिन के शोक का ऐलान किया है।

"कोई तो है जो ईरान को कमांड कर रहा है"
एक टीवी इंटरव्यू में लकी बिष्ट ने कहा कि मौजूदा हालात को देखकर यह मानना मुश्किल है कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर खामेनेई मारे जा चुके हैं तो फिर ईरान की सेना को लगातार निर्देश कौन दे रहा है।
उनके मुताबिक ईरान की सैन्य कार्रवाई बेहद संगठित तरीके से जारी है और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए सटीक जानकारी मिल रही है। बिष्ट ने कहा कि यह तभी संभव है जब कोई मजबूत नेतृत्व या खुफिया नेटवर्क लगातार कमांड दे रहा हो।
उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने दुबई के एक होटल में कथित तौर पर कमांड बेस बनाया था, जिसे ईरान ने निशाना बनाया। उनका कहना है कि इतने सटीक हमले तभी हो सकते हैं जब किसी एजेंसी के पास बेहद सटीक खुफिया जानकारी हो।
"खामेनेई की मौत की खबर भी एक गेम हो सकती है"
लकी बिष्ट ने अपने तर्क को समझाने के लिए एक काल्पनिक लेकिन संभावित खुफिया ऑपरेशन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बड़ी एजेंसियां दुश्मन को भ्रमित करने के लिए फर्जी जानकारी भी फैलाती हैं। उनके मुताबिक संभव है कि रूस जैसी किसी शक्तिशाली एजेंसी को पहले से सूचना मिली हो कि CIA या मोसाद खामेनेई को निशाना बना सकते हैं। इसके बाद एक रणनीति के तहत गलत सूचना फैलाकर एक मीटिंग की लोकेशन लीक की गई हो।
बिष्ट के मुताबिक जब उस जगह पर मिसाइल हमला हुआ तो वहां मौजूद सभी लोग मारे गए और दुनिया को यह संदेश दिया गया कि खामेनेई भी उसी हमले में मारे गए। इसके बाद अमेरिकी नेताओं और पश्चिमी मीडिया ने भी यही खबर दोहरा दी।
"अगर खामेनेई मारे गए तो युद्ध कौन चला रहा है?"
लकी बिष्ट का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर 28 फरवरी को खामेनेई मारे जा चुके हैं तो फिर युद्ध क्यों जारी है। उनका कहना है कि अमेरिका खुद कहता रहा है कि उसका मुख्य निशाना खामेनेई हैं।
बिष्ट ने कहा कि अगर लक्ष्य पूरा हो गया था तो युद्ध उसी समय रुक जाना चाहिए था। लेकिन जंग लगातार जारी है और ईरान जवाबी हमले कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस पूरी सैन्य रणनीति का नेतृत्व कौन कर रहा है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले दो दशकों में कई बार खामेनेई के मरने की अफवाहें फैल चुकी हैं। कुछ समय बाद वे फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ जाते थे। इसी तरह कुछ समय पहले उत्तर कोरिया के नेता की मौत की खबरें भी आई थीं, लेकिन बाद में वे जिंदा पाए गए।
क्या आपको लगता है कि अयातुल्ला अली खामेनेई अभी जिंदा है? लकी बिष्ट जवाब देते हुए कहते हैं,
"एक कहानी सुनाता हूं, आप इसे कहानी के तौर पर ही लीजिए। कहानी यह है कि 'एसआर' को एक सूचना मिलती है। एसआर यानी रूस की खुफिया एजेंसी, जिसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली एजेंसियों में गिना जाता है। उसे जानकारी मिलती है कि अली खामेनेई को CIA या मोसाद लगातार टारगेट कर रहे हैं और उन्हें ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। यह सूचना कहां से लीक हो रही है? खुद ईरान की धरती से, जहां मोसाद ने अपने कई एसेट और नेटवर्क बना रखे हैं। ऐसे में एसआर भी सोचता है कि क्यों न एक खेल खेला जाए। फिर एक योजना के तहत यह सूचना बाहर जाने दी जाती है कि अली खामेनेई एक खास लोकेशन पर मीटिंग के लिए पहुंचे हैं। यह जानकारी डबल एजेंट के जरिए CIA तक पहुंचती है। अब CIA को खबर मिलती है कि खामेनेई किसी घर या अपने ऑफिस में मीटिंग कर रहे हैं। इसके बाद वहां मिसाइल हमला होता है। करीब 25 से 30 मिसाइलें गिरती हैं और वहां मौजूद सभी लोग मारे जाते हैं। जाहिर है, इतने बड़े हमले में किसी के बचने की संभावना बेहद कम होती है। इसके बाद क्या होता है? उसी समय एक और सूचना डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंचती है कि मीटिंग में मौजूद सभी लोग मारे गए हैं। बिना पुख्ता सबूत देखे ट्रंप घोषणा कर देते हैं कि मिसाइल हमले में अली खामेनेई मारे गए। जैसे ही ट्रंप यह बयान देते हैं, इजराइल भी वही बात दोहराता है और पश्चिमी मीडिया भी कहने लगता है कि खामेनेई की मौत हो गई। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के बयान के तुरंत बाद ईरान भी इसे स्वीकार कर लेता है। ईरान कहता है कि हमारे नेता अली खामेनेई मारे गए और 40 दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित कर देता है। इससे ईरान का क्या नुकसान हुआ? कुछ भी नहीं। अमेरिका लगातार कहता रहा है कि उसका मुख्य लक्ष्य सिर्फ अली खामेनेई हैं। वह कहता है कि उसे ईरान की जनता से कोई मतलब नहीं, वह सिर्फ तानाशाह को खत्म करना चाहता है। तो मैं आज यही सवाल पूछता हूं कि अगर 28 तारीख को अली खामेनेई को मार दिया गया था, तो फिर आज भी यह युद्ध क्यों जारी है? इस पूरे युद्ध को आखिर कमांड कौन कर रहा है?"
"अगर खामेनेई मारे गए तो युद्ध कौन चला रहा है?"
लकी बिष्ट का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर 28 फरवरी को खामेनेई मारे जा चुके हैं तो फिर युद्ध क्यों जारी है। उनका कहना है कि अमेरिका खुद कहता रहा है कि उसका मुख्य निशाना खामेनेई हैं।
बिष्ट ने कहा कि अगर लक्ष्य पूरा हो गया था तो युद्ध उसी समय रुक जाना चाहिए था। लेकिन जंग लगातार जारी है और ईरान जवाबी हमले कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस पूरी सैन्य रणनीति का नेतृत्व कौन कर रहा है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले दो दशकों में कई बार खामेनेई के मरने की अफवाहें फैल चुकी हैं। कुछ समय बाद वे फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ जाते थे। इसी तरह कुछ समय पहले उत्तर कोरिया के नेता की मौत की खबरें भी आई थीं, लेकिन बाद में वे जिंदा पाए गए।
28 फरवरी को हुआ था ईरान पर बड़ा हमला
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया था। इसी दिन तेहरान स्थित ईरानी नेतृत्व परिसर को निशाना बनाया गया।
इजराइल डिफेंस फोर्स के मुताबिक इस ऑपरेशन में करीब 50 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया था। दावा किया गया कि इस हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेता भी मारे गए। हालांकि इन दावों के बीच अब खामेनेई के जिंदा होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
जंग का असर और बढ़ता नुकसान
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में अब तक भारी तबाही हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में करीब 6,668 नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में 5,535 घर और 1,041 दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
इसके अलावा 14 मेडिकल सेंटर और 65 स्कूल भी हमलों की चपेट में आए हैं। रेड क्रिसेंट के 13 केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा है। अब तक इस संघर्ष में लगभग 1,483 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजराइल में 1,765 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पररहस्य अभी भी बरकरार
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ अमेरिका और इजराइल का दावा है कि वे मारे जा चुके हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ और पूर्व खुफिया अधिकारी इस पर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खामेनेई सच में मारे गए हैं या फिर यह किसी बड़े खुफिया खेल का हिस्सा है। फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि मिडिल ईस्ट की यह जंग जितनी जमीन पर लड़ी जा रही है, उतनी ही खुफिया दुनिया के रहस्यों में भी छिपी हुई है।
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