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ChatGPT: बढ़ रही है लोकप्रियता, और आशंकाएं भी

जैसे-जैसे चैट जीपीटी का विरोध बढ़ रहा है, उसकी लोकप्रियता भी बढ़ रही है। इतनी ज्यादा कि इसकी सुविधा देने वाले ओपन एआई का सर्वर बार-बार क्रैश होने लगा है क्योंकि वह यूजर्स की बढ़ी संख्या का बोझ नहीं संभाल पा रहा है।

ChatGPT Increasing popularity of Most Advanced AI Chatbot know about its service

ChatGPT: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से युक्त चैट जीपीटी लॉन्च हुए अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं। लेकिन, इसकी लोकप्रियता रिकॉर्ड तोड़ रही है। यह बात अलग है कि बढ़ती लोकप्रियता के बीच इसका जबर्दस्त विरोध भी शुरू हो गया है। न्यूयार्क, लॉस एंजेल्स, बाल्टीमोर सिएटेल आदि शहरों में शिक्षा विभाग ने स्कूलों में चैट जीपीटी के एक्सेस पर रोक लगा दी है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डेटा साइंटिस्ट और दूसरे एक्सपर्ट इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसे लॉबिंग में इस्तेमाल कर जनमत को प्रभावित किया जा सकता है।

भारत में इस पर कुछ अलग ही तरह के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि जब इससे हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कुछ पूछा जाता है तो यह उन पर चुटकुले सुनाने लगता है। जबकि क्रिश्चियनिटी, इस्लाम व अन्‍य धर्मों के बारे में इस तरह के उपहास उड़ाने वाले निष्कर्ष नहीं देता है। बल्कि प्रश्नकर्ता को ही समझाने लगता है कि किसी धार्मिक व्यक्ति का मजाक नहीं उड़ाना चाहिये। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे यही लगता है कि सॉफ्टवेयर की कोडिंग इस तरह से की गयी है कि इससे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे।

सवालों से सीखता है चैट जीपीटी

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर स्वयं को किसी 'सर्वज्ञ' की तरह पेश करता चैट जीपीटी (जेनेरेटिव प्री-ट्रेन्ड ट्रांस्फॉर्मर) एक डीप मशीन लर्निंग बॉट है। यानि, यह आप के प्रश्नों का उत्तर तो देता ही है, लेकिन साथ ही उनसे कुछ न कुछ नया सीखता भी जाता है।

सैन फ्रांसिस्को की कंपनी ओपन एआई द्वारा निर्मित चैट जीपीटी सार्वजनिक परीक्षण के लिए 30 नवंबर को उपलब्ध कराया गया था। लॉन्च होते ही इसने तहलका मचा दिया और एक हफ्ते के भीतर ही इसके यूजर्स की संख्या दस लाख पार कर गयी।

किसी भी मीडिया के लिए अलिखित मगर अपेक्षित, तीन उद्देश्यों, शिक्षा, ज्ञान व मनोरंजन को चैट जीपीटी अच्‍छी तरह से पूरा करने में सक्षम है। इसकी तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता की वजह यह है कि यह हर बात का जवाब संवादात्मक शैली में देता है। गलत जानकारी के लिए या उत्तर न दे पाने के लिए माफी मांगने में भी संकोच नहीं करता।

इसके उपयोगकर्ताओं का भी यह अनुभव है कि अगर आप इससे किसी चीज के बारे में दस बार भी पूछें तो दसों बार यह आपको अलग- अलग तरीके से एक्सप्लेन करेगा। इसलिए गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल करने वालों को यह काफी रास आ रहा है। गूगल पर जब आप कुछ सर्च करते हैं तो आपके सामने विकल्पों और असंख्‍य गैर-जरूरी या जरूरी लिंक की बाढ़ आ जाती है और आपको उनमें से अपने काम की चीज चुनने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। वहीं चैट जीपीटी आपको सीधे वही देता है, जो आपको चाहिए होता है।

हर चीज के लिए इस्तेमाल

चैट जीपीटी चिराग के जिन्न की तरह आपकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए तत्पर नज़र आता है। आप इससे अपना बिजनेस प्रपोजल बनवा सकते हैं, अपने लिए कविताएं लिखवा सकते हैं, अपने किए काम की गलतियां ढूंढने के लिए कह सकते हैं, प्रेमिका के लिए पत्र लिखवा सकते हैं। दोस्त को गिफ्ट देना हो, चाउमिन बनाना हो, कहीं टूर पर जाना हो, चैट जीपीटी के पास हर चीज के लिए जवाब और सुझाव मौजूद हैं।

अब प्रश्न ये है कि अगर ये सचमुच इतने काम की चीज है तो बड़ी तादाद में लोग इससे इस कदर खफा या ख़ौफ़ज़दा क्यूं नजर आ रहे हैं? दोनों बातों का एक ही जवाब है, इसकी सर्वशक्तिमान बनते जाने की प्रवृत्ति। जैसे पौराणिक कथाओं में कुछ राक्षस अपने सामने आने वाले की ताकत लेकर स्वयं और अधिक ताकतवर होते जाते थे, वैसे ही चैट जीपीटी भी उपयोग करने वालों की दिमागी ताकत लेकर, बौद्धिक रूप से और अधिक ताक़तवर होता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह इंसानों के सोचने, विश्लेषण करने की क्षमता और रचनात्मकता को नुकसान पहुंचाते-पहुंचाते एक दिन उनसे ज्यादा शक्तिशाली हो जायेगा। इस स्थिति में, अभी जो जीपीटी हमारा मार्गदर्शक है, शीघ्र ही हमें शासित-निर्देशित करने लगेगा।

कुछ सीमायें भी हैं

हालांकि, इसके ज्ञान की सीमा वर्ष 2021 तक है, क्योंकि इसकी ट्रेनिंग इसी वर्ष बंद कर दी गयी थी। इसके अलावा यह पूर्णत: त्रुटिहीन नहीं है। जब इससे हमने 'नमामि गंगे ' पर कुछ लिखने के लिए कहा तो इसने इसे 'पंडित जवाहर लाल द्वारा स्थापित एक संस्थान' बताया। इसी तरह की गलतियों से घबराकर, माईक्रोसॉफ्ट ने, जिसने ओपेन एआई में एक बिलियन डॉलर का निवेश किया है, 2016 में अपने एआई चैट बॉट को इंट्रोड्यूस करने के तुरंत बाद ही ऑफलाइन कर दिया था। इसके अलावा ऐसे चैट बॉट ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं, जिसमें नस्लवाद, पूर्वाग्रहों और भ्रामक जानकारियों की भरमार है। इसलिए गूगल भी अपनी खुद की एआई टेक्नोलॉजी डेवलप तो कर रहा है, लेकिन बड़े ऐहतियात के साथ धीरे-धीरे । क्योंकि उसे खुद नहीं पता कि यह समाज पर कैसा असर डाल सकता है।

मानव जाति के लिए खतरा

पिछले साल अगस्त महीने में जब चैट जीपीटी लॉन्च भी नहीं हुआ था, 'जर्नल एआई मैगजीन' में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इस स्टडी को अंजाम देने वाली रिसर्च टीम में गूगल डीप माइंड के सीनियर साइंटिस्ट मार्क्स हटर और ऑक्सफोर्ड के रिसर्चर माइकल कोहेन और माइकल ओसबोर्न शामिल थे। उन्होंने आगाह किया है कि एक बार पर्याप्त रूप से एडवांस होने के बाद एआई समूची मानव जाति को नष्ट कर सकता है।

इसकी वजह कृत्रिम बुद्धिमत्ता या एआई की ऊर्जा जरूरतें होंगी, जिन्हें पूरा करने के लिए यह इंसानों से प्रतिस्पर्द्धा करेगा। जीतने के लिए यह अपने रचयिताओं के उन नियमों का, जिनके बारे में किसी को जानकारी नहीं है, उल्लंघन करने में भी गुरेज नहीं करेगा, जो मनुष्य को एआई के खतरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

जुलाई महीने में कुछ ऐसी ही एक चेतावनी गूगल के इंजीनियर ब्लेक लेमोइन ने भी दी थी। उसने दावा किया था कि कंपनी के एआई चैटबॉट लामडा (लैंग्वेज मॉडल फॉर डायलॉग एप्लिकेशंस) में संवेदनाएं हैं और वह इंसानी भावनाओं को समझ सकता है। लेमोइन का कहना था कि 'लामडा' भावुक हो गया था और एक बच्चे की तरह सोचने लगा था। गूगल ने गलती सुधारने की बजाय लेमोइन की ही छुट्टी कर दी।

चैट जीपीटी इस 'सफिशिएंट एडवांसमेंट' वाली स्थिति से कितना दूर या कितना करीब है, कोई नहीं जानता, लेकिन रिसर्चरों की यह स्टडी एक गंभीर खतरे की ओर इशारा तो कर ही रही है। जब हमने सोचा कि क्यों न खुद चैट जीपीटी से ही पूछा जाये कि क्या वाकई इससे मानवजाति के अस्तित्‍व को कोई खतरा है तो उसने यह जवाब दिया:

"चैट जीपीटी एक कंप्यूटर प्रोग्राम है, जो कुछ मानवीय संवेदनशीलता के साथ काम करता है। यह कोई खतरा नहीं है, सिविलियन्स और सुरक्षा के नियमों का पालन करके इसका उपयोग किया जा सकता है।"

चैट जीपीटी का जवाब तो बड़ा डिप्‍लोमेटिक है, लेकिन क्‍या यह हमें आश्‍वस्‍त करने के लिए काफी है?

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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