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'जब बोलना होता है तो विदेश में होते हैं', अमित शाह ने सदन में पढ़ा राहुल गांधी का अटेंडेंस चार्ट

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण एक नाटकीय बहस का गवाह बना, जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने सदन का माहौल गरमा दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी जुबानी जंग हुई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला।

सदन में बोलने नहीं दिया जाता राहुल गांधी के दावे पर अमित शाह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सदस्य खुद तय करते हैं कि उन्हें बहस में कब शामिल होना है। शाह ने आरोप लगाया कि जब सदन में बोलने के अवसर मिलते हैं, तो गांधी अक्सर विदेश जैसे जर्मनी और इंग्लैंड में होते हैं।

Amit Shah read Rahul Gandhi s attendance chart in Parliament

अमित शाह ने सदन में पढ़ा राहुल गांधी का अटेंडेंस चार्ट

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की लोकसभा में उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि Lok Sabha की 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 66 प्रतिशत रहा। इसी तरह 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत था। 15वीं लोकसभा में भी उनकी उपस्थिति 43 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 76 प्रतिशत रहा था।

लोकसभा में बोलने के समय पर उठाए सवाल

गृह मंत्री ने सदन को बताया कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों ने कुल 157 घंटे 55 मिनट तक बात की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता ने इनमें से कितना समय बोला। शाह ने कहा, "कौन से स्पीकर ने गांधी को बोलने से रोका है और ऐसा कोई नहीं कर सकता", उन्होंने दावा किया कि लोकसभा को बदनाम करने के लिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

अमित शाह ने नेहरू और इंदिरा गांधी का किया जिक्र

गृह मंत्री ने राहुल गांधी द्वारा अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस की मांग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकसभा कोई बाजार नहीं है जहां इस तरह की चर्चाएं आयोजित की जा सकें। उन्होंने कहा, "लोकसभा कोई बाजार नहीं है जहां ऐसी चर्चाएं आयोजित की जा सकें।" शाह ने याद दिलाया कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे प्रमुख नेताओं के समय में भी किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में कभी बहस नहीं हुई थी। अमित शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस "झूठे दावों" पर आधारित थी।

स्पीकर ओम बिरला का बचाव

उन्होंने Om Birla का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने सदन के मानकों को गिरने नहीं दिया बल्कि उसकी गरिमा बनाए रखी। शाह ने कहा कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस की अनुमति न देकर ओम बिरला ने सदन पर एक एहसान किया है।

माइक्रोफोन बंद किए जाने के मुद्दे पर सफाई

गृह मंत्री ने विपक्षी सदस्यों के माइक्रोफोन बंद किए जाने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो सदस्य नियमों का पालन नहीं करते या सदन में अनुशासन बनाए नहीं रखते, उनके माइक्रोफोन बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम सभी पर लागू होते हैं और यदि कोई केंद्रीय मंत्री भी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करता, तो उसका माइक्रोफोन भी बंद किया जा सकता है।

अविश्वास प्रस्ताव को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए स्पीकर ओम बिरला का समर्थन किया। उन्होंने इस प्रस्ताव को संसदीय राजनीति के लिए "दुर्भाग्यपूर्ण कदम" बताया और कहा कि लगभग चार दशकों बाद किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है, जो सदन के कामकाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

स्पीकर पद की गरिमा पर जोर

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष केवल सदन के पीठासीन अधिकारी नहीं होते, बल्कि वे भारत के लोकतंत्र की विधायी चेतना और गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा पर सवाल उठाने के समान है।

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