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Neobanks: देश में बढ़ने लगा है नियो बैंक का चलन

भारत में नियो बैंक का चलन बढ़ता जा रहा है। यही नहीं देश का 100वां यूनिकॉर्न भी एक नियो बैंक ही था जिसका नाम ‘ओपन’ है। इन नियो बैंक्स को लेकर युवाओं में बहुत ज्यादा उत्साह है।

What is a Neobank know about its features work process and rbi guidelines

नियो बैंक को डिजिटल बैंक या ऑनलाइन बैंक के रूप में भी जाना जाता है। यह एक प्रकार से वित्तीय संस्थान हैं जो मोबाइल ऐप माध्यम से काम करते है। दुनिया में नियो बैंक की शुरुआत यूरोप में 2010 के आसपास हुई थी। यह नियो यानि नया और बैंक शब्द से मिलकर बना है। इस प्रकार इसका अर्थ हुआ एक नए प्रकार का बैंक।

भारत में नियो बैंक्स की शुरुआत लगभग वर्ष 2013 के आसपास हुई थी। देश का पहला नियो बैंक 'नियो सॉल्यूशंस' था। आज के समय में भारत में दर्जनों नियो बैंक हैं जिसमें पेटीएम पेमेंट्स बैंक, जुपिटर, फाई मनी, स्लाइस, फैमपे, और रेजरपे शामिल हैं। गौरतलब है कि 2027 तक भारत में नियो बैंक यूजर्स की संख्या 2.1 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।

यूरोप में नियो बैंक्स की क्या है स्थिति

यूरोप में नियो बैंक्स ट्रेडिशनल बैंकिंग का एक लोकप्रिय विकल्प बन गए हैं। हालांकि वे अभी भी रूल्स और रेगुलेशंस सहित ग्राहक सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। साथ ही वे वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नये नियम विकसित करने पर काम कर रहे हैं। बावजूद इसके, यूरोप में नियो बैंक्स बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करने में सफल रहे हैं जो पारंपरिक बैंकों के विकल्प की तलाश कर रहे थे। यूरोप के कुछ सबसे प्रसिद्ध नियो बैंक्स में मोन्जो, N26 और रिवॉल्ट हैं। साल 2027 तक वहां नियो बैंक यूजर्स की संख्या 124.8 मिलीयन तक पहुंचने की संभावना है।

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कैसे काम करते है नियो बैंक्स

नियो बैंक्स वैसे तो ट्रेडिशनल बैंक्स के समान कई सेवाएं देते है, जैसे कि बचत खाते, डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग। इसके अलावा, यह बैंक्स तकनीक एवं डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर ग्राहकों को पर्सनलाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स जैसी सेवाएं भी प्रदान करते हैं। इसमें उच्च ब्याज दरों पर छोटे-छोटे लोन शामिल होते है। खास बात यह है कि इसके लिए पूरी प्रोसेस डिजिटल होती है यानि घर बैठे कुछ ही मिनटों में लोन की राशि आपके एकाउंट में आ जाएगी। यह बैंक्स आमतौर पर ग्राहकों के लिए 24/7 उपलब्ध होते हैं।

नियो बैंक्स को लेकर RBI की गाइडलाइंस

नियो बैंक 100% ऑनलाइन बैंक हैं जिनकी कोई फिजिकल ब्रांच नहीं होती है। हालांकि, ये डिजिटल बैंक्स से बिल्कुल अलग है क्योंकि डिजिटल बैंक्स किसी भी ट्रेडिशनल या RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) से लाइसेंस्ड प्राप्त बैंक का डिजिटल प्लेटफॉर्म होते है। RBI ने डिजिटल बैंक्स के लिए गाइडलाइंस बनाई है जबकि नियो बैंक्स के लिए ऐसा नहीं है।

RBI नियो बैंक्स को पूरी तरह रेग्यूलेट नहीं करता, फिर भी नियो बैंक्स अपने ऑपरेशंस के लिए RBI को जवाबदेही रखते हैं। दरअसल, RBI की गाइडलाइंस नियो बैंक्स पर नहीं बल्कि उनके मूल बैंक पर लागू होती है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI नियो बैंक्स के लिए सीधे गाइडलाइंस बनाने की तैयारी कर रहा है।

क्या नियो बैंक होते है 'बैंक'

फिलहाल RBI नियो बैंक्स को 'बैंक' भी नहीं मानती और अभी तक नियो बैंक्स के पास बैंकिंग लाइसेंस के लिए RBI से परमिशन भी नहीं है। RBI यह भी नहीं चाहता कि नियो बैंक्स खुद को वर्णित करने के लिए 'बैंक' शब्द का उपयोग करें। भले ही नियो बैंक्स भी ट्रेडिशनल बैंक्स की तरह लगभग सब सुविधाएं उपलब्ध कराते हो लेकिन उन्हें अभी बैंक नहीं माना जाता है।

RBI भले ही नियो बैंक को 'बैंक' न मानता हो लेकिन RBI के पास नियो बैंक के खातों और लेन-देन के रिकॉर्ड को एक्सेस करने का पूरा अधिकार है। नवंबर 2021 में, RBI ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें यह सुझाव दिया गया कि RBI नियो बैंक्स को रेगूलेट करने की योजना बना रहा है। नीति आयोग ने भी एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त नियो बैंक बनने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव है।

भारत में नियो बैंक्स के कुछ आंकड़े

● Ernst & Young के अनुसार भारत में नियो बैंक इंडस्ट्री $40 बिलियन की है जोकि भारतीय बैंक मार्केट का लगभग 2.2 प्रतिशत है।

● 2021 के मुकाबले 2022 में भारतीय नियो बैंकिंग सेक्टर की फंडिंग में 5 गुना वृद्धि हुई है।

● 2027 तक भारतीय नियो बैंक सेक्टर के $131.8 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।

● EY के आंकड़े यह भी बताते हैं कि 63% भारतीय वर्चुअल एसिस्टेंस की मदद से अपने फाइनेंस को मैनेज करने में कंफर्टेबल महसूस करते है।

● EY की रिपोर्ट के मुताबिक 45% भारतीयों को रिवार्ड्स के लिए अपना डाटा शेयर करने में कोई हर्ज नहीं है।

● भारत में फिलहाल 70% नियो बैंक यूजर्स 35 वर्ष की आयु के नीचे है, जिसका मतलब 70% नियो बैंक यूजर्स युवा हैं।

क्यों नियो बैंक्स युवाओं की पहली पसंद

नियो बैंक कई कारणों से भारत में युवाओं के बीच लोकप्रिय बन गए हैं। एक कारण यह है कि वे ट्रेडिशनल बैंक्स की तुलना में अधिक आधुनिक और यूजर फ्रेंडली हैं। उनके पास अक्सर ऐप-बेस्ड इंटरफेस होता है जो उपयोग करने और नेविगेट करने में आसान होते हैं। इसके अलावा, नियो बैंक अक्सर डिजिटल वॉलेट और क्रेडिट कार्ड जैसी वित्तीय सेवाओं और उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करते हैं, जो युवा पीढ़ी को आकर्षित करता है।

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    नियो बैंक पर्सनलाइज्ड और कस्टमाइज्ड सेवाएं भी प्रदान करते हैं, क्योंकि वे अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को समझने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करते हैं। साथी ही, नियो बैंक्स में खाता खोलने में कोई कागजी कार्रवाई नहीं होती है तो वे और अधिक सुविधाजनक हो जाते हैं। युवाओं का नियो बैंक्स की तरफ आकर्षण इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि नियो बैंक्स ज्यादा अच्छे रिवार्ड देते हैं।

    यह भी पढ़ें: Middle Class and Budget: बजट में अपनी जगह तलाशता मध्यवर्ग

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