MP: खुरई को जिले की सुगबुगाहट से तिलमिला उठा बीना, नेता बोले-1982 से आंदोलन कर रहे
Madhya Pradesh के कद्दावर मंत्री भूपेंद्र सिंह द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र खुरई को जिला बनाने के बयान देने के बाद पड़ोसी तहसील बीना की राजनीति में उबाल आ गया है। बीना को जिला बनाने के लिए करीब 39 साल से दस्तावेजी प्रक्रिया और मांग उठती रही है। बीना में 1982 से कांग्रेस और भाजपा एक मंच पर आकर बीना को जिला बनाने की मांग करते रहे हैं। यहां पहुंचे प्रदेश के तत्कालीन पांच-पांच मुख्यमंत्री बीना को जिला बनाने का आश्वासन दे चुके हैं। मंत्री के बयान के बाद नए जिले के निर्माण को लेकर अब दोनों पड़ोसी तहसीलों में सोशल मीडिया पर बयानों का दौर शुरु हो गया है।

1982 से आंदोलन, 1984 में विधानसभा में लगा था सवाल
मप्र विधानसभा प्रश्नोत्तर 26 मार्च 1984 के लेटर के अनुसार प्रदेश में नवीन जिला बनाने के लिए शासन को प्राप्त मांगों पर कार्रवाई की जो जानकारी प्रस्तुत की गई थी। उसमें तत्कालीन राजस्व मंत्री मुनिप्रसाद शुक्ल ने बताया था कि मप्र में जिला सीमा पुनगर्ठन आयोग की स्थापना की गई थी, चूंकी आयोग द्वारा अभी सिफारिशें शासन के समझ प्रस्तुत नहीं की गई हैं। उस दौरान विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार सागर और रायगढ़ जिलों को तोड़कर सारंगढ़, जसपुर तथा सागर जिले से बीना को अलग कर जिला बनाने के प्रस्ताव की जानकारी दी गई थी।

बीना में भाजपा और कांग्रेस दोनों चाहते हैं जिला बने
बीना को जिला बनाने के लिए सत्तारुढ़ भाजपा के वर्तमान विधायक महेश राय से लेकर भाजपा के तमाम नेता और पदाधिकारी, कांग्रेस से पूर्व मंत्री प्रभुसिंह ठाकुर सहित तमाम पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि बीना को जिला बनवाने के पक्ष में नजर आ रहे हैं। हालांकि कोई भी खुलकर इस मसले पर स्पष्ट रुप से बोलने से कतरा रहे हैं। इधर शहर के लोगों के बीच बीते पांच दिन से सोशल मीडिया पर बीना का हक मारे जाने को लेकर भाजपा की किरकिरी हो रही है। कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री प्रभुसिंह ने मीडिया को बताया कि वे लोग 1982 से बीना को जिला बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। खुरई से उनका बैर नहीं है।












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