अमेरिका ने कहा-चीन ने किया अंडरग्राउंड परमाणु परीक्षण, जिनपिंग सरकार बोली, गलत बातों से बचें
बीजिंग। कोरोना वायरस महामारी के बीच ही चीन और अमेरिका के बीच एक नई जंग शुरू हो गई है। अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने एक कम क्षमता वाले परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से आई रिपोर्ट में यह बात कही गई है और चीन ने इस दावे को मानने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के रिश्ते जो पहले ट्रेड वॉर और फिर कोविड-19 की वजह से प्रभावित थे, अब इस नए घटनाक्रम के बाद और बिगड़ सकते हैं।

वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल ने सबसे पहले इस बात के बारे में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके बाद विदेश विभाग की तरफ से बयान दिया गया कि चीन गोपनीय तरीके से अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट की तैयारी कर रहा है। विदेश विभाग के मुताबिक चीन दावा करता है कि ऐसे ब्लास्ट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध समझौते को मानता है। हांगकांग से निकलने वाले साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जनरल के हवाले से लिखा, 'अमेरिका चिंतित है कि चीन, न्यूक्लियर ब्लास्ट के लिए निर्धारित 'जीरो यील्ड' स्टैंडर्ड का उल्लंघन कर सकता है। साल 2019 में पूरे साल चीन के लोप नुर परमाणु परीक्षण स्थल पर होने वाली गतिविधि से उत्पन्न हुई है। जीरो यील्ड यानी ऐसा न्यूक्लियर टेस्ट जिसमें परमाणु हथियारों की चेन रिएक्शन से एक के बाद एक ब्लास्ट नहीं होता है।
चीन ने कहा गैर-जिम्मेदाराना है बयान
अमेरिका के आरोप पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने कहा कि चीन ऐसे पहले देशों की लिस्ट में है जिसने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर किए और हमेशा इसके उद्देश्य और लक्ष्यों का समर्थन करता है। झाओ के मुताबिक अमेरिका ने सभी तथ्यों को नजरअंदाज किया और चीन के खिलाफ बेवजह आरोप लगाऐ हैं। यह गैर जिम्मेदाराना और गलत इरादे से की गई टिप्पणी है। उन्होंने इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि अमेरिका ने परमाणु नीति की समीक्षा में कहा कि वह जरूरत पड़ने पर भूमिगत परीक्षण को दोबारा शुरू करेगा।












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