Harish Rana के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' की अनुमति के बाद मां का बुरा हाल! पिता ने जो कहा सुनकर फट जाएगा कलेजा
Harish Rana Father on SC Verdict: करीब 13 साल से बिस्तर पर पड़े युवक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। 31 साल के हरीश राणा (Harish Rana), जो एक हादसे के बाद से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे, अब उनके जीवन को बनाए रखने वाली मेडिकल सपोर्ट हटाने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला उनके परिवार की लंबे समय से चली आ रही कानूनी और भावनात्मक लड़ाई के बाद आया है।
हरीश के माता-पिता पिछले कई सालों से उनके इलाज और देखभाल में जुटे थे, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। भारी खर्च, मानसिक तनाव और डॉक्टरों की राय के बाद परिवार ने अदालत से पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति मांगी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दे दी।

Harish Rana Case: पिता ने कहा- मानवता के आधार पर आया फैसला
फैसले के बाद हरीश के पिता ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया। पिछले चार साल से वे कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे थे। उन्होंने कहा, "आज माननीय न्यायाधीश ने मानवता के नाते जो फैसला दिया है, वह बहुत अच्छा फैसला है। इससे हमारा कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं है। एक पिता होने के नाते मैं बहुत दुखी हूं, लेकिन यह फैसला जरूरी था।"
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पिता ने यह भी बताया कि अदालत के निर्देश के बाद देश के सभी राज्यों और जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को भी ऐसे मामलों में तय प्रक्रिया पर ध्यान देने के लिए कहा गया है, ताकि इसी तरह की स्थिति में पड़े दूसरे मरीजों के मामलों में भी सही कदम उठाए जा सकें।
Harish Rana Father: 'यूथेनेशिया' शब्द के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
हरीश के पिता ने कहा कि कई लोग इस मामले को यूथेनेशिया (Euthanasia) कह रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार यह पूरी तरह सही शब्द नहीं है। उन्होंने समझाया कि यूथेनेशिया उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी मरीज को इंजेक्शन देकर उसकी मौत कर दी जाती है। हरीश के मामले में ऐसा कुछ नहीं होगा।
पिता के मुताबिक, सिर्फ उसकी फूड पाइप हटाई जाएगी। उसे मुंह से पानी दिया जाएगा और पूरी प्रक्रिया अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में तय नियमों के अनुसार की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह ऐसा है जैसे किसी को प्रकृति या भगवान की गोद में छोड़ दिया जाए।
Harish Rana: इंजीनियरिंग के आखिरी सेमेस्टर में हुआ था हादसा
हरीश राणा साल 2013 में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। वह सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे और अपने कॉलेज के आखिरी सेमेस्टर में थे। उनके पिता ने बताया कि हरीश पढ़ाई में काफी अच्छे थे और दो प्रतियोगिताएं जीत चुके थे। उन्हें एक और प्रतियोगिता जीतनी थी। लेकिन इसी दौरान एक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
Harish Rana: चौथी मंजिल से गिरने के बाद बदल गई जिंदगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013 में हरीश अपने पीजी आवास की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट लगी। इस चोट के कारण उन्हें गहरी दिमागी चोट लगी और वे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में चले गए। तब से वे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं और उन्हें पीईजी ट्यूब (PEG Tube) के जरिए खाना दिया जाता रहा है।
करीब 13 साल तक इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कई बार जांच की। लेकिन डॉक्टरों का कहना था कि हरीश के ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। लगातार इलाज और देखभाल के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
Harish Rana: परिवार ने इलाज के लिए घर तक बेच दिया
हरीश की देखभाल में उनके माता-पिता ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। कई सालों तक अस्पतालों में इलाज, दवाइयों और देखभाल पर भारी खर्च हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद बेटे की हालत में कोई बदलाव नहीं आया।
Harish Rana Mother: मां की हालत बेहद खराब
हरीश के पिता ने Oneindia Hindi से बातचीत करते हुए बताया कि उनकी मां इस फैसले से बहुत दुखी हैं। एक मां होने के कारण वह बार-बार रो पड़ती हैं और इस स्थिति को स्वीकार करना उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के फैसले से पहले की रात उन्हें बिल्कुल नींद नहीं आई, क्योंकि आज क्या फैसला आएगा, यह चिंता लगातार बनी हुई थी।
हरीश के पिता ने बताया कि अभी शाम तक उनका बेटा घर आएगा। फिलहाल उसे आज AIIMS नहीं ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य मिलकर आगे की प्रक्रिया पर फैसला करेंगे और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार तय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
With AI Inputs
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