'खालिस्तान' समर्थक पत्रिका के कवर पेज पर आतंकी बुरहान वानी की तस्वीर, बताया गया 'कश्मीर की आजादी का हीरो'
श्रीनगर। हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर आतंकी बुरहान वानी को पाकिस्तान में हीरो और 'कश्मीर का पोस्टर ब्वाय' बताया गया था, इसके एनकाउंटर के बाद घाटी में काफी अशांति फैली थी, कश्मीरियों के एक समूह ने तो वानी की मौत के लिए भारतीय सुरक्षाबलों को जिम्मेदार ठहराते हुए मोर्चा खोल दिया था, हालांकि हालात अभी तो काबू में हैं लेकिन इसी बीच एक और चौंकाने वाली खबर ने लोगों की पेशानी पर बल डाल दिया है। दरअसल आतंकी बुरहान वानी कट्टरपंथी सिख संगठनों के लिए भी हीरो बन गया है क्योंकि एक पत्रिका में कश्मीर में मारे गए आतंकी को कवर पेज पर स्थान दिया गया है और उसे 'कश्मीर की आजादी का नायक' बताया गया है।

'वंगार' के कवर पेज पर बुरहान वानी
ये पत्रिका फतेहगढ़ साहिब के प्रसिद्ध 'शहीदी जोर मेला' में खुलेआम बेची जा रही है, ये पत्रिका खालिस्तान का समर्थन करती है और इसका नाम 'वंगार' है, इसके अगस्त 2016 अंक के कवर पेज पर वानी को हीरो बताया गया है। आपको बता दें कि वानी जुलाई 2016 में एनकाउंटर में मारा गया था। उसकी मौत के 18 महीने बाद किताब के इस अंक को बेचा जा रहा है, इस किताब की कीमत मात्र 30 रुपए है।

किताब में वानी पर दो लेख
42 पृष्ठों वाली इस किताब में वानी पर दो लेख छपे हैं, जिसमें से एक लेख दल खालसा के गजिंदर सिंह ने लिखा है, जो कि इस वक्त पाकिस्तान में है। जबकि दूसरा लेख खालिस्तान समर्थक बलजीत सिंह खालसा ने लिखा है।

'आजादी पर विशेष संदेश'
इस किताब में एक 'आजादी पर विशेष संदेश' नाम का भी आर्टिकल है, जिसे कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में दोषी करार जगतार सिंह हावरा ने लिखा है, जो कि इस वक्त तिहाड़ जेल में बंद है।

खलिस्तान आतंकियों से जुड़े पोस्टर
इस किताब को जोरा मेले में बेचने वाले वेंडर ने कहा कि हम तो सिर्फ किताब बेच रहे हैं, किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं इसलिए पुलिस भी हमें कुछ नहीं कह रही है। मेले में खलिस्तान आतंकियों से जुड़े पोस्टर भी बेचे जा रहे हैं।

'शहीदी जोर मेला'
गौरतलब है कि 'शहीदी जोर मेला' आयोजन गुरु गोबिंद सिंह (दसवें सिख गुरु) के बेटों साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में किया जाता है। ये मेला 27 दिसंबर तक चलेगा। इस बारे में पुलिस को कुछ भी नहीं पता क्योंकि पुलिस उपायुक्त कंवलप्रीत कौर बरार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलका मीणा ने जोर मेला में इस तरह की पत्रिकाओं के बेचे जाने के प्रति अनभिज्ञता जाहिर की है।

सुलग गई थी घाटी
आपको बता दें कि 8 जुलाई 2016 को मुठभेड़ में बुरहान के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर सूबे में भारत-विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए थे और चार महीने से ज्यादा समय तक लगातार हिंसा और विरोध प्रदर्शन होते रहे। इसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हुई और एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए। पैलेट गन की गोलियां लगने से हजारों लोगों के आंखों की रोशनी चले जाने के मामले भी इस दौरान सामने आए। चार महीने तक घाटी में कर्फ्यू लगा रहा था।
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