एमपी में कांग्रेस की वापसी के लिए पीताम्बरा पीठ पर हाजिरी देंगे राहुल गांधी
नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही बीजेपी और कांग्रेस वोटरों को लुभाने की कोशिश में लग गई हैं। किस तरह से वोटरों को अपने पाले में किया जाये इसके लिए कई भावनात्मक मुद्दों को भी भुनाने की कोशिश है। इसी तरह का एक मुद्दा हिंदुत्व का है। जहां बीजेपी खुलकर इसका इस्तेमाल करती है तो वहीं कांग्रेस को भी नरम हिंदुत्व की राह पकड़ने में कोई गुरेज नहीं है। काग्रेस को लग रहा है कि वो ऐसा करके बीजेपी को कुछ हद तक इस मामले में टक्कर दे सकती है। इसी रणनीति का नतीजा है कि राहुल गांधी की छवी भी नरम हिंदुत्व के आधार पर ढाली जा रही है। चुनाव नजदीक हैं और नवरात्र शुरु हो गए हैं तो इसी कड़ी में राहुल गांधी मध्य प्रदेश के दतिया जिले में मशहूर पीताम्बरा देवी के मंदिर जा रहे हैं। राहुल 15 अक्टूबर को मंदिर जाएंगे। ये मंदिर बगलामुखी देवी का है और इसे पीताम्बरा पीठ भी कहा जाता है।

ये मंदिर देश के सबसे शुभ मंदिरों में से एक है और तांत्रिक प्रथाओं के लिए जाना जाता है। यहां होने वाले पूजा संस्कार और अनुष्ठान लोगों की सफलता और उपलब्धि के लिए होते हैं। राहुल गांधी यहां न केवल मंदिर में प्रार्थना करेंगे बल्कि वो यज्ञ में भी भाग लेंगे, हालांकि पार्टी के सूत्रों ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष के लिए किसी विशेष अनुष्ठान करने की योजना बनाई गई है।

ग्वालियर-चंबल में रोड शो
पिछले आठ दिनों में राहुल गांधी की ग्वालियर क्षेत्र में ये दूसरी यात्रा होगी। पिछले शनिवार को भी राहुल गांधी ग्वालियर में थे जो दतिया के करीब है। अपनी यात्रा के दौरान राहुल दतिया पीठ में पूजा अर्चना करने के बाद दो दिनों तक इसी क्षेत्र में रहेंगे। राहुल गांधी का ग्वालियर और चंबल इलाके में आयोजित रोड शो में शामिल होने का कार्यक्रम है। अभी 9 अक्टूबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी ग्वालियर-चंबल इलाके का दौरा किया है। ये इलाका कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाला इलाका है।
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परंपरा का करना होगा पालन
सूत्रों का कहना है कि पीताम्बरा पीठ के कुछ निश्चित नियम और परंपराएं हैं जिनका हर किसी को पालन करना होता है। राहुल गांधी की यात्रा को देखते हुए ये तमाम बातें उनके कार्यक्रम तय करने वालों को बता दी गई हैं। मंदिर में एक खास स्थान में लोग साधना के लिए बैठते हैं और अगर राहुल गांधी को यहां साधना करनी है तो उन्हें कुर्ता और पैजामा या कुर्ता और जीन्स के बजाय धोती पहननी होगी। पहले इस तरह की खबरें आ चुकी हैं कि राहुल गांधी की मंदिरों में यात्रा के दौरान वहां के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाता है। मध्य प्रदेश में 6 अक्टूबर को राहुल गांधी द्वारा की गए नर्मदा आरती पर भी सवाल उठे थे कि उन्होंने शाम होने से पहले ही आरती कर दी।

अभी और होंगी मंदिर यात्राएं
खबर है कि पीताम्बरा पीठ की इस यात्रा के बाद कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई उज्जैन के महाकाल मंदिर में राहुल गांधी की यात्रा के लिए योजना तैयार कर रही है और ये यात्रा 26 अक्टूबर के आसपास हो सकती है। हिंदू वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश में इससे पहले राहुल गांधी चित्रकूट में राम मंदिर भी जा चुके है और पार्टी ने प्रदेश में गोशाला बनाने का भी वादा किया है। राहुल गांधी की ये मंदिर यात्राएं पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनावों से शुरु हुई थीं और इसके बाद कई और मंदिरों से होते हुए मानसरोवर तक भी पहुंची। जिस राह को कांग्रेस ने पकड़ा है उस पर राहुल गांधी की ऐसी और यात्राएं अभी देखने को मिलेंगीं।
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