तीन राज्यों में बीजेपी की हार पर पहली बार बोले अमित शाह, कहा- जनादेश स्वीकार लेकिन 2019 से जोड़कर देखना सही नहीं
नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने और फाइनल नतीजे आने के करीब एक हफ्ते बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नतीजे पार्टी के हक में नहीं आए, लेकिन उन्हें ये जनादेश स्वीकार है। उन्होंने आगे कहा कि इन नतीजों को 2019 लोकसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। बीजेपी अगले लोकसभा चुनाव में हिंदी भाषी क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य इलाकों में शानदार जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव से नहीं जोड़ा जा सकता है, ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों चुनाव अलग-अलग मुद्दों पर लड़े जाते हैं।

एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार पर बोले अमित शाह
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ये बातें मुंबई में रिपब्लिक समिट के दौरान कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नतीजे बिल्कुल भी बीजेपी के पक्ष में नहीं रहे, लेकिन इसे 2019 लोकसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लोगों के जनादेश को स्वीकर करते हैं, हम चुनाव नतीजों पर आत्ममंथन करेंगे। अमित शाह ने कहा कि यह केवल बीजेपी के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी जरूरी है कि बीजेपी हिंदी भाषी राज्यों के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी अगला चुनाव जीते।

चुनाव नतीजों को 2019 से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए: शाह
अमित शाह ने बताया कि 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता में फिर से आएगी। उन्होंने कहा कि हम इस बात से आश्वस्त हैं कि शिवसेना अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ ही रहेगी। दोनों पार्टियों के बीच बातचीत जारी है। विपक्ष पार्टियों के 'महागठबंधन' की कोशिशों पर टिप्पणी करते हुए अमित शाह ने कहा कि गठबंधन की वास्तविकता अलग है। इसका कोई अस्तित्व नहीं है और यह एक भ्रान्ति है।

विपक्षी दलों के 'महागठबंधन' पर क्या बोले अमित शाह
बता दें कि 17 दिसंबर को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस के नेतृत्व में नई सरकार बनी। मध्य प्रदेश में कमलनाथ, राजस्थान में अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने सोमवार को सीएम पद की शपथ ली। इस शपथ समारोह में राहुल गांधी ने विपक्षी एकता की झलक पेश करने की कोशिश की थी। खुद राहुल गांधी अलग-अलग पार्टी के नेताओं के साथ शपथ समारोह में शामिल हुए और 'महागठबंधन' की एकता को दिखाने की कोशिश की।

शपथ ग्रहण समारोह में दिखी थी 'महागठबंधन' की तस्वीर
हालांकि इस शपथ समारोह में बीएसपी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने खुद को शपथ समारोह कार्यक्रम से खुद को अलग रखा था। शपथ ग्रहण में दोनों नेता क्यों शामिल नहीं हुए इसका भी स्पष्ट कारण पता नहीं चला था। दोनों बड़े नेताओं इस तरह से दूरी बनाने की वजह से 'महागठबंधन' की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल अभी लोकसभा चुनाव दूर हैं इसलिए इस पर सीधे तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।












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