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SIR Bengal: ममता के गढ़ में वोटर लिस्ट से रिकॉर्ड नाम कटे, ताजा आंकड़ों ने बढ़ाई दीदी की मुश्किलें

SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच नई बहस छेड़ दी है।

आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ( Mamata Banerjee) के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम क्षेत्र की तुलना में लगभग चार गुना अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

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ECI के ताज़ा आंकड़े क्या कहते हैं?

निर्वाचन आयोग ने जनगणना प्रपत्र जमा करने की समयसीमा समाप्त होने के एक दिन बाद विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े सार्वजनिक किए। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि विभिन्न क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में बड़ा अंतर सामने आया है।

दक्षिण कोलकाता स्थित भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,06,295 पंजीकृत मतदाताओं में से 44,787 नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके मुकाबले, नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में 2,78,212 मतदाताओं में से 10,599 नाम हटाए गए। इस तरह भवानीपुर में विलोपन की संख्या नंदीग्राम से करीब चार गुना अधिक रही है।

नाम क्यों हटाए गए? आयोग का स्पष्टीकरण

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया मानक नियमों के तहत की गई है। हटाए गए नामों के पीछे कई वजहें बताई गई हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी या अस्थायी स्थानांतरण, दिए गए पते पर मतदाता का न मिलना और दोहराव प्रविष्टियां शामिल हैं।

अधिकारियों का कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरे राज्य में एक समान मानदंडों के आधार पर लागू की गई है और किसी भी विधानसभा क्षेत्र को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। सिर्फ भवानीपुर ही नहीं, राज्य के कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।

कोलकाता और अन्य इलाकों की स्थिति

उत्तरी कोलकाता का चौरंगी विधानसभा क्षेत्र इस सूची में सबसे ऊपर रहा, जहां से 74,553 नाम हटाए गए। इसके बाद कोलकाता पोर्ट से 63,730 और टॉलीगंज से 35,309 नाम विलोपित किए गए। खास बात यह रही कि भाजपा विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में भी नंदीग्राम से अधिक नाम हटाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर आसनसोल दक्षिण से 39,202 और सिलीगुड़ी से 31,181 नाम हटाए गए।

जिला स्तर पर दक्षिण 24 परगना सबसे आगे

जिला स्तर के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। दक्षिण 24 परगना जिले में सबसे अधिक 8,16,047 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। कुल मिलाकर, SIR प्रक्रिया के पहले चरण में पूरे पश्चिम बंगाल में 58 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: TMC और BJP आमने-सामने

निर्वाचन आयोग ने बताया है कि मंगलवार को राज्य की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें मतदाता अपने नाम जोड़ने या सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने तरीके से आंकड़ों की व्याख्या की है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कृषानु मित्रा ने कहा कि पार्टी इन आंकड़ों की बारीकी से जांच करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम दुर्भावनापूर्ण इरादे से हटाया गया है, तो पार्टी इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।

BJP ने क्या कहा?

वहीं भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने कहा कि बड़े पैमाने पर विलोपन यह साबित करता है कि बंगाल में SIR की आवश्यकता क्यों थी। उनके अनुसार, इससे तृणमूल कांग्रेस की कथित ताकत रहे फर्जी मतदाताओं की वास्तविक संख्या सामने आ रही है।

भवानीपुर और नंदीग्राम के आंकड़ों में सामने आए इस बड़े अंतर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें मसौदा मतदाता सूची, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम दोबारा जुड़ते हैं और SIR अभियान का अंतिम राजनीतिक असर क्या होता है।

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