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राम रहीम को जेल पहुचाने में मनमोहन सिंह की भी बड़ी भूमिका, हुआ खुलासा

राम रहीम के खिलाफ रेप मामले में जांच के पीछे चट्टान की तरह खड़े थे मनमोहन सिंह, सीबीआई का हमेशा दिया साथ, जांच में नहीं आने दिया किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव

नई दिल्ली। डेरा सच्चा के चीफ राम रहीम के खिलाफ रेप मामले की जांच कर रहे सीबीआई के मुख्य अधिकारी ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राम रहीम के मामले में तमाम राजनीतिक दबावों को दरकिनार करते हुए सीबीआई को इस मामले की खुली जांच करने की आजादी दी थी। मामले के मुख्य जांचकर्ता और सीबीआई के रिटायर्ड डीआईजी एम नाराणन ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हमेशा सीबीआई का साथ दिया और उन्होंने हमें कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया।

पंजाब और हरियाणा के सांसदों का था दबाव

पंजाब और हरियाणा के सांसदों का था दबाव

नारायणन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने पंजाब और हरियाणा के सांसदों की ओर से दो साध्वियों के साथ रेप के मामले किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव को नजरअंदाज करते हुए सीबीआई को मामले की जांच की खुली छूट दी। इन सांसदों की ओर से भारी दबाव के बाद मनमोहन सिंह ने सीबीआई के तत्कालीन चीफ विजय शंकर को अपने कार्यालय में मुलाकात करने के लिए बुलाया था। इस दौरान पीड़िता का जज के सामने दिए गए बयान को देखने के बाद मनमोहन सिंह ने हमें पूरी तरह से अपना समर्थन दिया।

तमाम दबावों के बाद भी हमने मामला बंद करने से इनकार किया

तमाम दबावों के बाद भी हमने मामला बंद करने से इनकार किया

राम रहीम के खिलाफ रेप मामले की जांच कर रहे नारायणन ने अपने तत्कालीन बॉस विजय शंकर की भी काफी तारीफ की, उन्होंने बताया कि वह हमेशा हमारे साथ खड़े रहे। न्यूज 18 चैनल से बात करते हुए नारायण ने बताया कि जब ताकतवर सांसदों ने राम रहीम के खिलाफ मामले को खत्म करने को कहा तो विजय शंकर ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया, उन्होंने पूरी तरह से हमारा साथ दिया। जिस दिन राम रहीम को 20 साल की सजा हुई उस दिन नारायणन मैसूर में थे। कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने इस फैसले से संतोष जताया और कहा कि राम रहीम अन्य मामलों में भी दोषी करार होगा, वह दो लोगों की हत्या के मामले में भी आरोपी है।

कोर्ट ने खुद सौंपा था मामला

कोर्ट ने खुद सौंपा था मामला

डेरा चीफ के मामले में जांच के बारे में बात करते हुए नारायणन ने बताया कि यह शिकायत 2002 में दर्ज की गई थी, लेकिन 2007 तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ था। इस मामले को कोर्ट में पहुंचने के बाद पंजाब और हरियाणा कोर्ट ने इसकी गंभीरता को देखते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई चीफ विजय शंकर को इस मामले में सफाई देने के लिए भी समन किया था। जिसके बाद कोर्ट ने हमें साध्वी का पत्र दिया था और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति व डेरा के कार्यकर्ता रंजीत सिंह की हत्या के मामले की फाइल सौंपी थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस मामले की जांच को 57 दिन के भीतर पूरा किया जाए।

56 दिन के भीतर दायर की थी चार्जशीट

56 दिन के भीतर दायर की थी चार्जशीट

नारायणन ने बताया कि हमारे पास जो सबसे बड़ी चुनौती थी वह यह कि जो पत्र साध्वी की ओर से लिखा गया था, वह अज्ञात था, इसमें यह नहीं बताया गया था कि इस पत्र को किसने लिखा है। बाद में हमें इस बात का जानकारी मिली की 1999-2002 तक 200 साध्वियों ने यौन शोषण की वजह से डेरा छोड़ दिया था। जिसके बाद आखिरकार हम 10 महिलाओं को ढूंढ सके जिनका यौन शोषण हुआ था। लेकिन ये सभी लोग विवाहिता थीं औ किसी भी तरह का बयान देने के लिए तैयार नहीं थीं। जिसके बाद हम सिर्फ दो महिलाओं को बयान देने के लिए राजी कर सके और उसके आधार पर हमने 56 दिन के भीतर अंबाला कोर्ट में चार्जशीट दायर की।

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