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Strait of Hormuz पूरी तरह खुला है! सिर्फ इन शर्तों को मानने वाले देशों को मिलेगी एंट्री, ईरान का ऐलान

Strait of Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक खतरनाक मोड़ पर है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर पाबंदियां लगाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें तेज कर दी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पूरी तरह बंद नहीं है। अराघची के अनुसार, यह रास्ता केवल अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों और तेल टैंकरों के लिए बंद किया गया है। लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं और सैकड़ों जहाज वहां फंसे हुए हैं।

इस तनाव के बीच अब एक नया 'आर्थिक युद्ध' शुरू हो गया है। खबरें हैं कि ईरान इस रास्ते से तेल निकालने के बदले डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा 'युआन' में व्यापार की शर्त रख सकता है। यह कदम न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित करेगा, बल्कि दशकों पुराने 'पेट्रो-डॉलर' सिस्टम के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।

Strait of Hormuz crisis

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ईरान ने इस समुद्री रास्ते को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो देश ईरान पर हमला कर रहे हैं या दुश्मनों का साथ दे रहे हैं, उनके टैंकरों को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह सीधे तौर पर इजराइल और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश है। ईरान यह जताना चाहता है कि खाड़ी के इस महत्वपूर्ण इलाके की चाबी उसके पास है और वह तय करेगा कि यहां से कौन गुजरेगा और कौन नहीं।

World News Hindi: जमीनी हकीकत काफी अलग

अब्बास अराघची के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत काफी चुनौतीपूर्ण है। 'यरूशलम पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय जहाज भी शामिल हैं। हालांकि ईरान कह रहा है कि रास्ता खुला है, लेकिन कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों और ऊंचे बीमा प्रीमियम की वजह से वहां से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रही हैं। ईरान का कहना है कि यह कंपनियों का अपना फैसला है, इसमें उसका कोई हाथ नहीं है।

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पेट्रो-युआन: डॉलर के वर्चस्व को सीधी चुनौती

दूसरी ओर ईरान अब तेल व्यापार में 'गेम थ्योरी' का इस्तेमाल कर रहा है। चर्चा है कि ईरान ने शर्त रखी है कि होर्मुज के रास्ते तेल ले जाने वाले टैंकरों को अपना भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा 'युआन' में करना होगा। यह कदम दशकों पुराने 'पेट्रो-डॉलर' सिस्टम को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रहार है। यदि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल के लिए युआन का उपयोग करने लगता है, तो वैश्विक बाजार में डॉलर की मांग और अमेरिकी वित्तीय प्रभाव काफी कम हो सकता है।

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Middle East conflict updates Hindi: चीन की चुप्पी और 'साइलेंट' स्ट्रैटेजी

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका सबसे रहस्यमयी है। चीन ने आधिकारिक तौर पर कोई बड़ा बयान नहीं दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे वह ईरान का समर्थन कर रहा है ताकि उसकी अपनी मुद्रा 'युआन' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिले। ईरान के माध्यम से चीन डॉलर के विकल्प के रूप में एक समानांतर भुगतान प्रणाली तैयार करना चाहता है। यह 'साइलेंट गेम' चीन को भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था का नया केंद्र बनाने की उसकी लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

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