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27 साल पहले जिन मांगों के लिए पिता लड़े थे, आज उसके खिलाफ खड़े हैं BKU नेता राकेश सिंह टिकैत

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नई दिल्ली। कृषि कानून 2020 के खिलाफ आंदोलनरत हरियाणा और पंजाब के किसानों का एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) खत्म होने की निर्मूल आशंकाओं के खिलाफ धरना 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। हालांकि सरकार लगातार किसानों को सुन रही है और भरोसा दे रही है। महत्वपूर्ण यह है किसानों का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश सिंह टिकैत कृषि कानून में नए प्रावधानों विरोध करके अपने पिता महेंद्र सिंह टिकैत का भी विरोध कर रहे हैं, जिन्होंने 27 साल पहले इसकी मांग सरकार से कर चुके हैं। यह मांग 2019 के मेनिफिस्टो में बीकेयू भी कर चुकी है।

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भारतीय किसान यूनियन मैनिफिस्टो में खुद कर चुकी है एमएसपी, मंडी और आढ़तियों से मुक्ति की मांग?भारतीय किसान यूनियन मैनिफिस्टो में खुद कर चुकी है एमएसपी, मंडी और आढ़तियों से मुक्ति की मांग?

इन्हीं मांगों को लेकर 1993 में तत्कालीन नरसिम्हा सरकार से लड़े थे पिता

इन्हीं मांगों को लेकर 1993 में तत्कालीन नरसिम्हा सरकार से लड़े थे पिता

दिलचस्प है, लेकिन यही वास्तविकता है। भारतीय किसान यूनियन प्रवक्ता राकेश सिंह टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने मोदी सरकार द्वारा कृषि कानून में किए गए प्रावधानों को लेकर 1993 में तत्कालीन पीवी नरसिम्हा राव सरकार से लड़े थे। तब उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के चेहरा रहे महेंद्र सिंह टिकैत समेत यूनियन के चार नेताओं ने पीएम नरसिम्हा राव के निमंत्रण पर उनसे मुलाकात में सरकार से कहा था कि वह किसानों को देश में कहीं भी अपने उत्पाद बेचने की अनुमति दे।

2019 में अपने मेनिफेस्टो में BKU ने बिचौलिया मुक्त कानून की मांग की है

2019 में अपने मेनिफेस्टो में BKU ने बिचौलिया मुक्त कानून की मांग की है

मजे की बात यह है कि इसी भारतीय किसान यूनियन ने 2019 में अपने मेनिफेस्टो में नए कृषि कानून में प्रावधानित कानून के समर्थन में सभी पार्टियों से एक राय बनाने की मांग करते हुए मंडी, बिचौलिया से किसानों को मुक्त करने और किसानों को फसल कहीं बेचने के मुद्दे की वकालत की थी, लेकिन अब वह खुद इसके विरूद्ध खड़ी हो गई है, जबकि नए कानून में उसके सारे मांगों को अक्षरशः मान लिया गया है। हैरानी की बात है कि यूनियन का नेतृत्व कर रहे राकेश सिंह टिकैत अब उन्हीं बातों को विरोध कर रहे हैं, जिसके लिए उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत की तत्कालीन सरकार से ठन गई थी।

किसान उनको अनाज बेच सके, जो उन्हें अच्छी कीमत देने को तैयार हो

किसान उनको अनाज बेच सके, जो उन्हें अच्छी कीमत देने को तैयार हो

तब महेंद्र सिंह टिकैत ने सरकार से मांग की थी कि किसान उनको अपना अनाज बेच सके, जो उन्हें अच्छी कीमत देने के लिए तैयार हो, जिसका विकल्प नए कानून में किया गया है कि किसान मंडी के अलावा भी कहीं भी और किसी को भी अपना उपज बेच सकते हैं। महेंद्र सिंह टिकैत ने तब वकालत करते हुए कहा था कि किसान के लिए पूरे देश का बाजार खोला जाए, जिससे किसी मंडी के लाइसेंसी को फसल बेचने की बाध्यता किसानों को नहीं हो और अब जब ऐसे प्रावधानों वाला कानून आ गया तो बेटा विरोध में खड़ा है, जो किसान आंदोलने के पीछे की विशुद्ध राजनीति को दर्शाती है।

नरसिम्हा सरकार ने मांगों को पूरा करने में तब असमर्थता दिखाई थी

नरसिम्हा सरकार ने मांगों को पूरा करने में तब असमर्थता दिखाई थी

गौरतलब है तत्कालीन कृषि मंत्रालय के सचिव एमएस गिल भी टिकैत और बीकेयू के नेताओं से मिले थे। उस समय पीएम नरसिम्हा राव ने मांगो को पूरी तरह से पूरा करने में असमर्थता दिखाई थी, जिसके बाद महेंद्र सिंह टिकैन ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था और मोदी सरकार द्वारा लाए नए कृषि कानून में पूरे किए गए प्रावधानों को पूरा करने के लिए विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। हालांकि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के किसानों के लिए किए गए आंदोलन के बावजूद इस मांग को पूरा नहीं किया गया था, जिसमें उन्होंने यह भी मांग की थी 1967 की कीमत के आधार पर गेहूं की कीमत तय की जाए।

यूनियन ने अपने इस स्टैंड को 2019 में अपने मेनिफिस्टों में रखा था

यूनियन ने अपने इस स्टैंड को 2019 में अपने मेनिफिस्टों में रखा था

भारतीय किसान यूनियन ने अपने इस स्टैंड को 2019 में अपने मेनिफिस्टों में रखा था और उस पर आम सहमति बनाने का आह्वान किया था। बीकेयू ने मेनिफिस्टो में किसानों को आढ़तियों से मुक्त दिलाने के लिए एपीएमसी एक्ट को खत्म करने का समर्थन किया था, जिससे आज भारतीय किसान यूनियन इनकार नहीं कर सकती है, क्योंकि भारतीय किसान यूनियन 3 अप्रैल, 2019 को अपने उक्त मेनिफिस्टो का ट्वीटर पर साझा किया था, जिसकी प्रति आज भी ट्वीटर पर महफूज है।

भारतीय किसान यूनियन किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही है

भारतीय किसान यूनियन किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही है

भारतीय किसान यूनियन में अपने मेनिफिस्टो में बाकायदा उन्हीं मांगों को सूचीबद्ध किया है, जिसके विरोध में खड़ी होकर वर्तमान में भारतीय किसान यूनियन किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही है, जबकि भारतीय किसान यूनियन अपने ट्वीट में मंडियों और आढ़तियों को खत्म करने वाली मांग को लेकर ऑल पार्टी सहमति भी बनाने की बात कर चुकी है। उनकी मांगों में एपीएमपी एक्ट का उन्मूलन और आवश्यक वस्तु अधिनियम शामिल है। उसने किसानों को आढ़तियों (बिचौलिया) प्रणाली से आजादी की मांग की थी।

BKU मेनिफिस्टों में रखी मांगों को कृषि कानून 2020 में पूरा कर दिया गया है

BKU मेनिफिस्टों में रखी मांगों को कृषि कानून 2020 में पूरा कर दिया गया है

विचित्र सी बात है कि अह जब भारतीय किसान यूनियन के मेनिफिस्टों में रखी मांगों को कृषि कानून 2020 में पूरा कर दिया गया है तो किस मुंह से बीकेयू उसका विरोध कर रही है। भारतीय किसान यूनियन विपक्षी पार्टियों का समर्थन कर कृषि कानून की आड़ में विपक्ष की राजनीतिक रोटियों को सेंकने में मदद कर रही है। कृषि कानून को लेकर निर्मूल आशंकाओं के गुब्बारे छोड़े गए, जिसका मकसद मोदी सरकार को झुकाना है। हालांकि मोदी सरकार ने अपने तेवर से स्पष्ट कर दिया है कि वह संशोधन के लिए राजी है, लेकिन कानून वापस नहीं लेगी, जिससे किसान आंदोलन की प्रासंगिकता बिखर गई है

भारतीय किसान यूनियन को किसानों के हितों के लिए आगे आना चाहिए

भारतीय किसान यूनियन को किसानों के हितों के लिए आगे आना चाहिए

भारतीय किसान यूनियन को किसानों के हितों के लिए जहां खुद आगे आना चाहिए और कृषि कानून में किए गए प्रावधानों पर किसानों को समझाना चाहिए, लेकिन किसानों की आशंकाओं का समाधान करने के बजाय खुद भारतीय किसान यूनियन उन्हें दिग्भ्रमित करके विपक्ष की सुर में सुर मिला रही है। कह सकते है कि वर्तमान में किसानों का शुभचिंतक दल बीकेयू अपने मेनिफिस्टों में मांगी गई मुद्दों के विरोध में सड़क पर खड़ी होकर किसानों का मजाक बना रही है।

नए कानून में किसानों को देश में कही भी उत्पाद बेचने की अनुमति मिली है

नए कानून में किसानों को देश में कही भी उत्पाद बेचने की अनुमति मिली है

उल्लेखनीय है नए कृषि कानून में किसानों को देश में कही भी अपने उत्पाद बेचने की अनुमति मिली है। 2011 में दुनिया को विदा कह चुके भारतीय किसान यूनियन के मुखिया चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत बेटे राकेश सिंह टिकैत के यू टर्न पर रोष कर रहे होंगे। हालांकि इस समय बीकेयू के मुखिया राकेश सिंह टिकैत के बड़े भाई नरेश सिंह टिकैत हैं, लेकिन केंद्र सरकार से बातचीत करने वाले किसानों के कोर ग्रुप में शामिल राकेश सिंह टिकैत के पास बीकेयू की असली बागडोर है।

महेंद्र सिंह टिकैत को किसानों का दूसरा मसीहा के नाम से पुकारा जाता था

महेंद्र सिंह टिकैत को किसानों का दूसरा मसीहा के नाम से पुकारा जाता था

भारतीय किसान यूनियन के पूर्व मुखिया और स्वतंत्र भारत के इतिहास के प्रसिद्ध किसान नेता शुमार महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के सिसोली गांव में वर्ष 1935 में हुआ था। किसानों के लिए लिए किए गए उनके काम के लिए उन्हें अक्सर किसानों का दूसरा मसीहा के नाम से पुकारा जाता था। टिकैत पहली बार सुर्खियों में तब आए थे, जब उन्होंने 1987 में मुजफ्फरनगर में किसानों के लिए बिजली बिल में माफी की मांग की थी।

दिल्ली किसान आंदोलन महेंद्र सिंह टिकैत को किसान नेता की पहचान मिली

दिल्ली किसान आंदोलन महेंद्र सिंह टिकैत को किसान नेता की पहचान मिली

महेंद्र सिंह टिकैत का बतौर किसान नेता के रूप में असली पहचान दिल्ली में हुए एक किसान आंदोलन में मिली। यह किसान आंदोलन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार को पांच लाख से अधिक किसानों के क्रोध का सामना करना पड़ा था। इस आंदोलन में किसानों ने 7 दिनों के लिए दिल्ली पर कब्जा कर लिया था। उस समय पुलिस द्वारा उन पर गोलियां चलाने के बाद भी किसान आंदोलन से पीछे नहीं हटे थे। हालांकि इस किसान आंदोलन में पुलिस की गोलियों के शिकार हुए राजेद्र सिंह और भूप सिंह नामक दो किसानों की मौत हो गई थी।

सरकार को झुकना पड़ा और कुल 35 मांगों को स्वीकार करना पड़ा था

सरकार को झुकना पड़ा और कुल 35 मांगों को स्वीकार करना पड़ा था

किसानों पर गोली चलाने को लेकर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्होंने किसानों के साथ दुश्मन की तरह व्यवहार किया। हालांकि उक्त किसान आंदोलन बाद में इतना आक्रामक हो गया था कि सरकार को किसानों की मांगों को आगे झुकना पड़ा था और किसानों की मांगी कुल 35 मांगों को स्वीकार करना पड़ा था, जिसके बाद किसान आंदोलन समाप्त हुआ था।

English summary
The dharna has entered the 19th day against the unbridled fears of MSP (Minimum Support Price) of farmers in Haryana and Punjab agitating against the Agricultural Law 2020. However, the government is constantly listening to the farmers and giving them confidence. It is important that Rakesh Singh Tikait, the leader of the Indian Farmers Union, who is leading the farmers, is opposing the new provisions in the agricultural law, also opposing his father Mahendra Singh Tikait, who has demanded this from the government 27 years ago. BKU has also made this demand in the manifesto of 2019.
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